मदुरै टू टोक्यो, जारी है संघर्षों का सफर

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टोक्यो ओलंपिक में जलवा बिखेरने के लिए तैयार V Revathi, यहां पढ़ें उनके  संघर्षों की दिलचस्प कहानी | 🏆 LatestLY हिन्दी

तमिलनाडु के छोटे से गांव से निकल कर टोक्यो ओलंपिक्स तक का सफर

नई दिल्ली। जीवन की गाड़ी का चालक जब संघर्षों के पथ पर चलता है तो रास्ते में आने वाले कांटें भी नए और बेहतर मोड़ की तरफ ले जाते है। ऐसा ही कुछ हुआ है तमिलनाडु के मदुरै के एक छोटे से गांव में जन्मी एथलीट वी रेवती के साथ जो अब टोक्यो में होने जा रहे ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

बचपन में माता-पिता को खोने के बाद भी नहीं रुकी
एथलीटों के सपना कहे जाने वाले टोक्यो ओलंपिक में भाग ले रही तमिलनाडु के मदुरै जिले की रेलवे टिकट कलेक्टर 23 वर्षीय वी रेवती 4×400 मिश्रित रिले स्पर्धा में भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक पदक की उम्मीदों में से एक हैं। उन्होंने बीते दिनों पटियाला कैंप में 53:55 सेकेंड का समय निकाला। रेवती का जीवन संघर्षों की प्रेरणादायक दास्ता हैं। रेवती ने 8 साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया, तो उनकी दादी ने पाला।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया ट्वीट
केंद्रीय मंत्री और नए सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने वी रेवती को सम्बोधित करते हुए एक ट्वीट किया जिसमें वह रेवती के संघर्षों के लिए व आगामी ओलंपिक्स के लिए बधाई दे रहे है।

"मिलिए वी. रेवती से 23 साल की उम्र में मदुरै जो मिश्रित रिले इवेंट में # टोक्यो 2020 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उसने अपने माता-पिता को खो दिया था जब वह चौथी कक्षा में थी और उसकी दादी ने उसकी परवरिश की थी, जो यहाँ चित्रित है। हमारे एथलीटों की यात्रा बाधाओं के खिलाफ जीत की कहानी है! #Cheer4India"
                                                                         
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