बुरख़ा और बाल काटती महिलाओं की आह! ने लिख दी थी ईरान की बर्बादी की दासताँ!

तेहरान, 10 अप्रैल 2026: ईरान में जबरन बुरख़ा ठीक से न पहनने को लेकर जेल भेजना और कैद में महिला की मौत होने के बाद से शुरू हुआ ईरानी सत्ता की बर्बादी का सफ़र अबतक नहीं थमा है. ऐसा लगा मानों अहंकारी सत्ता को अपनी ही आवाम की हाय लग गई हो. ईरान में सत्ता और जनता के विद्रोह के बाद लाज़मी था किसी तीसरे का फ़ायदा उठाना. मौका भी था और दस्तूर भी. इस विद्रोह की आड़ में शुरू हुआ ऐसा खेल की ईरान कबतक उससे उबर पाएगा कहना मुश्किल है. कहावत भी किसी ने सही लिखी है कि दो की लड़ाई में अक्सर तीसरा फ़ायदा उठाता है और हुआ भी यही देश में शुरू हुए विद्रोह की आड़ में आज़ादी दिलाने के बहाने एंट्री हो गई दो ऐसे विलेन की जिसने ईरान से उसका सबकुछ छीन लिया. ईरान की सत्ता में बैठे इस देश के सबसे ताकतवर लीडर को कब्र उसके सबसे सुरक्षित ठिकाना कहे जाने वाले स्थान पर नसीब हुई.
ऐसा लगा मानों आवाम की आह! ईरानी सत्ता को ले डूबी हो. इसके बाद इस देश में शुरू हुआ वो ख़ूनी खेल जिसे रोकने में दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्थाएं तक नाकाम हो गईं. आखिर मध्यस्थता के लिए सामने आया पाकिस्तान जिसने न जाने कितनी बार आतंक की फ़सल से भारत जैसे देशों में हमले करवाए बल्कि इस देश को दुनिया में आतंक की बेल लगाने वाला देश तक घोषित कर दिया गया. हालात ये हैं कि मध्यस्थता के लिए इस देश की दुनियाभर में वाहवाही हो रही है. अब देखना यह है कि ईरान इन हालातों से कैसे उबर पाता है. ईरान का इतिहास इस देश की पूरी कहानी बयां करता है, अगर आप नहीं जानते तो आइये जानते हैं फ़ारस से ईरान बनने तक के इस देश के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के बारे में…..
फारस से ईरान तक का सफ़र
ईरान (पूर्व नाम फारस) विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। 5वीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व से यहां शहरी बस्तियां मौजूद हैं। 550 ईसा पूर्व में साइरस महान ने अचेमेनिड साम्राज्य की नींव रखी, जो उस समय का सबसे बड़ा साम्राज्य था। इसके बाद सासानिड साम्राज्य (224-651 ईस्वी) ने वैज्ञानिक और सांस्कृतिक उन्नति की। 7वीं शताब्दी में इस्लामिक विजय के बाद ईरान मुस्लिम दुनिया का प्रमुख केंद्र बना। 1501 में सफाविद वंश ने शिया इस्लाम को राज्य धर्म घोषित किया।20वीं शताब्दी में पहलवी वंश (1925-1979) के शासन में आधुनिकीकरण, शिक्षा और तेल उद्योग ने तेज विकास किया। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान इस्लामिक गणराज्य बना।
आर्थिक विकास और समृद्धि:
ईरान तेल और गैस के विशाल भंडार वाला देश है, जो लंबे समय तक समृद्धि का आधार रहा। लेकिन 2018 से अमेरिकी प्रतिबंधों, 2025-26 के इजरायल संघर्ष और हालिया युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है। 2025 में मुद्रास्फीति 42.4% तक पहुंच गई, 2026 में भी 40% से ऊपर रहने का अनुमान है। रियाल की कीमत गिरावट पर है। युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था में 10% संकुचन की आशंका है। खाद्य मुद्रास्फीति चरम पर है – ब्रेड और अनाज 140%, मांस-मुर्गी 135% महंगे हो गए। मध्य वर्ग सिकुड़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें महंगी हो गई हैं। फिर भी ईरान क्षेत्रीय शक्ति बना हुआ है और तेल निर्यात, कृषि व उद्योगों में क्षमता रखता है।
खेल क्षेत्र में उपलब्धियाँ:
ईरान कुश्ती और ताइक्वांडो में विश्व पटल पर मजबूत है। 2024 पेरिस ओलंपिक में ईरान ने 12 पदक (3 स्वर्ण, 6 रजत, 3 कांस्य) जीते और 21वें स्थान पर रहा। महिला ताइक्वांडो खिलाड़ी नाहिद कियानी ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। 2025 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ईरान ने हर आयु वर्ग (U17, U20, U23, सीनियर) में टीम खिताब जीता और कुल 29 पदक हासिल किए। फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन कुश्ती में ईरानी खिलाड़ी लगातार स्वर्ण पदक जीत रहे हैं।
महिलाओं की आजादी और अधिकार:
1979 की क्रांति के बाद महिलाओं पर अनिवार्य हिजाब, परिवार कानून और कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध लगे। 2022 में महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद “महिला, जीवन, आजादी” (Woman, Life, Freedom) आंदोलन शुरू हुआ, जो आज भी जारी है। 2025-26 में महिलाएं हिजाब विरोध में शांतिपूर्ण प्रतिरोध कर रही हैं – हिजाब जलाना, बाल काटना और प्रदर्शन। संसद में महिलाओं की भागीदारी मात्र 4.8% है और कानूनी रूप से कई क्षेत्रों में पुरुषों से कम अधिकार हैं। फिर भी ईरानी महिलाएं शिक्षा, चिकित्सा और खेल में सक्रिय हैं। प्रदर्शनों में सैकड़ों मौतें और हजारों गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन महिलाएं लगातार अपनी आजादी की मांग कर रही हैं।ईरान प्राचीन विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और युवा आबादी की ताकत रखता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, आर्थिक संकट और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे (खासकर महिलाओं के अधिकार) इसके भविष्य को चुनौती दे रहे हैं।
वर्तमान हालात और ईरान
महिलाओं को लेकर चौतरफा घिरे ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों ने अचानक हालात बदल दिए. फिलहाल अनिगनत मौतें, तबाही का मंज़र और दुनिया की बड़ी शक्ति से टकरा रहा ईरान एक बहादुर लड़ाके के तौर पर जाना जाता रहा है और इस टकराव से उसने साबित किया कि युद्ध ताकत से नहीं बुद्धिमत्ता से जीते जाते हैं. अब वहां आंतरिक मुद्दे दफ़न हो चुके हैं और बच्चा, बूढ़ा, बुजुर्ग और महिलाओं के दिल में सिर्फ ईरान की मिट्टी की पहचान बनाए रखने का जज़्बा बचा है. ईरान की आवाम ने बेखौफ़ होकर जिस तरह से अपने राजनीतिक लीडर्स का साथ दिया है, दुनिया में चारों तरफ उसकी चर्चा हो रही है. ईरान का इतिहास उसकी पहचान समेटे हुए है. बाकी छोटे देशों पर आक्रमण कर सत्ता परिवर्तन का खेल लगातार जारी है. पाकिस्तान के मध्यस्थता के बाद क्या वाकई मिडिल ईस्ट शांत होगा, फिलहाल कहना जल्दबाज़ी होगा.