लेबनान में सीजफायर के बिना वार्ता बेकार, परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रॉक्सी पर मतभेद – ईरान

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल 2026: मिडिल ईस्ट में छह सप्ताह से चल रहे तनाव के बाद अब शांति की नई उम्मीद जगी है। ईरान का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गया। पाकिस्तान इस महत्वपूर्ण वार्ता की मेजबानी कर रहा है, जिसमें ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने पर चर्चा होगी। ईरानी डेलिगेशन की अगुवाई संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की. इस दल में करीब 70 सदस्य शामिल हैं, जिनमें सुरक्षा, आर्थिक और सैन्य विशेषज्ञ हैं। डेलिगेशन का स्वागत पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने नूर खान एयर बेस पर किया। पाकिस्तानी एयर फोर्स के जेट्स ने ईरानी विमान को एस्कॉर्ट भी प्रदान किया।
अमेरिका पर भरोसा नहीं: ईरान
ईरानी पक्ष ने साफ संदेश दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उनकी शर्तें मानी जाएंगी। गालिबाफ ने कहा, “हमारी नीयत अच्छी है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं है। पिछले अनुभवों से पता चलता है कि वादे अक्सर टूटते रहे हैं।” ईरान की मुख्य मांगें लेबनान में युद्धविराम, ब्लॉक की गई संपत्तियों की रिहाई और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं। अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वांस कर रहे हैं। उनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। वार्ता आज शनिवार को शुरू हुई है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों पक्षों से रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की है।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान के द्वारा कराई जा रही इस मध्यस्थता को कूटनीतिक तौर पर एक बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास मौजूद है, इसलिए नतीजे अभी अनिश्चित हैं। यह बैठक मध्य पूर्व में स्थिरता लाने और हार्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए अहम मानी जा रही है लेकिन वार्ता के बीच बड़ी चुनौतियाँ भी है.
क्या हैं प्रमुख चुनौतियाँ?
गहरा अविश्वास (Deep Mistrust)
ईरानी पक्ष ने साफ कहा है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं है। ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पहुंचते ही कहा — “हमारी नीयत अच्छी है, लेकिन हम भरोसा नहीं करते। अमेरिका के साथ पिछले अनुभव टूटे वादों से भरे हैं।”
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने भी चेतावनी दी कि अगर ईरान “खेल” करने की कोशिश करेगा तो अमेरिकी टीम सख्त रुख अपनाएगी। यह आपसी अविश्वास वार्ता को बाधित कर रहा है।
शर्तों में भारी अंतर (Maximalist Demands) ईरान का 10-पॉइंट प्रस्ताव: लेबनान में पूर्ण युद्धविराम, ब्लॉक की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई, प्रतिबंधों में ढील, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की मान्यता और युद्ध क्षति का मुआवजा।
अमेरिका का 15-पॉइंट प्रस्ताव: ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त करना, क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह, हमास आदि) पर रोक और सख्त सुरक्षा गारंटी। दोनों प्रस्तावों में लगभग कोई ओवरलैप नहीं है, जिससे समझौता मुश्किल हो सकता है।
लेबनान में इजराइली हमले
ईरान ने साफ शर्त रखी है कि जब तक इजराइल लेबनान (खासकर हिजबुल्लाह) पर हमले नहीं रोकता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। इजराइल ने लेबनान सीजफायर से इनकार कर रखा है, जिससे ईरानी डेलिगेशन बातचीत को “बेकार” बता रहा है। यह मुद्दा पूरे प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है।
नाजुक युद्धविराम (Fragile Ceasefire)
दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल तक है, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। अगर इस दौरान कोई बड़ा हमला हुआ तो वार्ता पूरी तरह टूट सकती है। इस वार्ता में तीसरा पक्ष इजराइल शामिल नहीं है, लेकिन उसकी कार्रवाई सीधे प्रभाव डाल रही है। ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी (हिजबुल्लाह, हमास) और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच तनाव बरकरार है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक तेल मार्ग पर नियंत्रण का मुद्दा भी विवादास्पद है।
आंतरिक राजनीति और दबाव
दोनों देशों में सख्त रुख अपनाने वाले तत्व मजबूत हैं। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन “अधिकतम दबाव” की नीति से पीछे हटना नहीं चाहता, जबकि ईरान में सुप्रीम लीडरशिप अपनी “प्रतिरोध” की छवि बनाए रखना चाहती है।
संभावित परिणाम
विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद में एक बड़ा समझौता इस वीकेंड में संभव नहीं है। अधिकतम उम्मीद एक अस्थायी समझौता या युद्धविराम को बढ़ाने की है। अगर बातचीत विफल हुई तो मध्य पूर्व में फिर से बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।पाकिस्तान की मध्यस्थता इस वार्ता को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है, लेकिन चुनौतियाँ इतनी बड़ी हैं कि नतीजे अभी अनिश्चित हैं।
यह खबर Arab News, Al Jazeera, Reuters, Dawn News, Times of Israel और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है (11 अप्रैल 2026 तक की अपडेट्स)।