AAP को झटका! 7 बागी सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी, अब BJP के हुए AAP ‘राघव’

आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या घटकर हुई 3, बीजेपी की राज्यसभा सदस्यों की संख्या हुई 113

नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन लोटस’का शिकार आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है. 7 सांसदों के बागी होने बाद उनकी बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की अर्जी भी नामंजूर हो गई है. राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने इस पार्टी के सातों बागी सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सदस्यो की संख्या 10 से घटकर 3 रह गई है. वहीं बीजेपी के सांसदों की राज्यसभा में संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है.

AAP की अपील खारिज

आम आदमी पार्टी ओर से राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी से बागी सातों सांसदो की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी. महत्वपूर्ण बात यह है कि सात सांसद AAP राज्यसभा दल की कुल 10 सदस्यों में दो-तिहाई बहुमत रखते थे। संविधान के 10वीं अनुसूची के प्रावधान के तहत दो-तिहाई सदस्यों के विलय पर अयोग्यता लागू नहीं होती। इसी आधार पर राज्यसभा सचिवालय ने मंजूरी दे दी। AAP ने अयोग्यता की मांग की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया और सातों सांसदों का बीजेपी में विलय हो गया. राज्यसभा की वेबसाइट पर अब ये सातों सांसद बीजेपी सदस्यों की सूची में दिखाई दे रहे हैं. वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर सातों बागी सांसदों के ‘रिकॉल’पर चर्चा का समय मांगा है.

विलय की मंजूरी

शुक्रवार को आम आदमी पार्टी से बागी सातों सांसदों ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर उन्हे विलय के बाद बीजेपी सांसद माने जाने के लिए निवेदन किया था, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया है. आम आदमी पार्टी के दल-बदल कानून के तहत सांसदों की सदस्यता रद्द करने का अनुरोध अस्वीकर कर दिया गया है.

हैरानी इस बात की हुई कि राघव चड्ढा की जगह पाने वाले अशोक मित्तल भी बीजेपी में शामिल हो गए. यही नहीं इन दोनों के साथ ही हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, राजिन्दर गुप्ता और विक्रम साहनी भी इनके साथ हो लिए और इन सभी राज्यसभा सदस्यं ने आम आदमी पार्टी का दामन छोड़ दिया. आम आदमी पार्टी का कहना है कि ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के डर से सभी बागी सदस्यों ने यह कदम उठाया है. यह पंजाब में मान सरकार को कमज़ोर करने का प्रयास है.

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