दहेज हत्या या आत्महत्या? ट्विशा शर्मा केस में कोर्ट में गरमाई बहस, कोर्ट में आरोपी पति समर्थ सिंह ने किया सरेंडर

ट्विशा के पति समर्थ की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई, वकील का आरोप – समर्थ सिंह को बचाने की कोशिश की जा रही है

नई दिल्ली: ट्विशा शर्मा केस को लेकर देशभर में चर्चाएं गर्म हैं. मृतका के परिवार और ससुराल पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. पति समर्थ अभी भी फरार है. वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में केन्द्र से सीबीआई जांच की मांग की सिफारिश की है जिससे न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती नज़र आ रही है.

आरोपी पति की ज़मानत पर सुनवाई

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की एकलपीठ के समक्ष ट्विशा के पति समर्थ की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. आवेदक का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह ने रखा. वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने भोपाल से केस डायरी मंगवाने के लिए समय मांगा था जिसके चलते कोर्ट ने आज ढाई बजे तक का समय दिया था. केस डायरी आने के बाद सुनवाई पुन: शुरू हुई.

आज कोर्ट में कई अहम घटनाक्रम देखने को मिले। मामले के मुख्य आरोपी और ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह ने जबलपुर जिला कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। समर्थ सिंह पिछले कई दिनों से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। उस पर 30 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। कोर्ट में सरेंडर के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।

पुन: पोस्टमार्ट के आदेश

हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का पुनः पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए हैं। परिवार का आरोप है कि पहली जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर दो अलग-अलग निशान मिलने की बात सामने आने के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। परिवार का कहना है कि यह सामान्य आत्महत्या का मामला नहीं हो सकता। इसी आधार पर AIIMS या विशेषज्ञ मेडिकल टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की गई थी।

पीड़िता पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने आदेश दिया था कि समर्थ सिंह या तो ट्रायल कोर्ट या फिर जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करें. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट भोपाल में है और जांच के लिए SIT भी शामिल है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि मामले में CBI की भूमिका को लेकर भी आदेश सामने आया है. वकील ने आरोप लगाया कि समर्थ सिंह को बचाने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने कहा कि वह जज के बेटे हैं और उन्हें विशेष संरक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि समर्थ को जबलपुर कोर्ट में सरेंडर करने की कोई वैध प्रक्रिया नहीं है, फिर भी उन्हें वहां लाया गया.

क्या है केस?

दरअसल ट्विशा शर्मा केस पूर्व जिला जज गिरिबाल सिंह के पुत्र समर्थ से संबंध रखता है. समर्थ पर मृतका पत्नी को पीड़ित करने का आरोप है. समर्थ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं. उन्होने पूरे केस को झूठा करार दिया है और कहा कि वाट्सएप चैट में प्रताड़ना और दहेज जैसी किसी बात का जिक्र नहीं है. चैट को एडिट किया जा सकता है.

वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से तय हुआ था रिश्ता

दरअसल, 31 वर्षीय त्विषा शर्मा की दिसंबर, 2025 में भोपाल निवासी समर्थ सिंह से शादी हुई थी। दोनों का रिश्ता वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से तय हुआ था। विवाह दिल्ली में संपन्न हुआ और इसके बाद ट्विशा अपने पति के साथ भोपाल में रहने लगी। कुछ दिन पहले वह अपने घर में फंदे से लटकी मिली थी। उस समय वह गर्भवती भी थी।

आत्महत्या नहीं की, उसे मारकर लटकाया गया

त्विषा के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की, उसे मारकर लटकाया गया है। वहीं दूसरी ओर समर्थ व उसकी मां गिरिबाला सिंह, जो सेवानिवृत्त जिला जज हैं, का आरोप है कि ट्विशा नशीले पदार्थों का सेवन करती थीं और मानसिक रूप से अस्थिर थी। मानसिक स्थिति और कथित नशे की लत उन घटनाओं की वजह बनी, जिनका अंत मौत के रूप में हुआ।

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