योगी सरकार की कैबिनेट में सांस्कृतिक पहचान, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा फोकस।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें सबसे अधिक चर्चा शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ करने के प्रस्ताव की रही।
इसके अलावा कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को मंजूरी देकर राज्य को देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वहीं लगभग 1.60 लाख होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
जलालाबाद का नाम बदलकर होगा ‘परशुरामपुरी’
योगी सरकार लगातार उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले शहरों तथा कस्बों के नामों को उनकी प्राचीन पहचान से जोड़ने का अभियान चला रही है। इसी क्रम में शाहजहांपुर जिले की नगर पालिका परिषद जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ करने के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय इतिहास, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखकर लिया गया है।
क्यों चुना गया ‘परशुरामपुरी’ नाम?
स्थानीय परंपराओं और कई पौराणिक ग्रंथों में शाहजहांपुर के इस क्षेत्र को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना गया है। इसी आधार पर वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्थान को आधिकारिक रूप से भगवान परशुराम की जन्मभूमि घोषित किया था।
यहां स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर को हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सरकार का मानना है कि नाम परिवर्तन से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
जलालाबाद नाम कैसे पड़ा?
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के बीच इस विषय पर अलग-अलग मत हैं। एक मत के अनुसार इस कस्बे का नाम मुगल सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के सम्मान में जलालाबाद रखा गया था। हालांकि कुछ इतिहासकार इसे स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा नाम भी मानते हैं। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण लंबे समय से इस क्षेत्र का नाम बदलने की मांग उठती रही थी।
योगी सरकार का नाम परिवर्तन मॉडल
साल 2017 से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश में ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान से जुड़े स्थानों के नाम बदलने की नीति पर काम कर रही है।
प्रमुख उदाहरण—
- इलाहाबाद → प्रयागराज
- फैजाबाद जिला → अयोध्या
- मुगलसराय रेलवे स्टेशन → पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन
- झांसी रेलवे स्टेशन का आधिकारिक नाम परिवर्तन
- कई नगर निकायों और स्थानों के नामों में बदलाव
सरकार का तर्क है कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करना है।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को मंजूरी
कैबिनेट की दूसरी सबसे बड़ी घोषणा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 रही। यह नीति अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के शीर्ष स्टार्टअप राज्यों की श्रेणी में लाना है। सरकार का लक्ष्य केवल नई कंपनियां बनाना नहीं बल्कि नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार हों।
नीति के प्रमुख उद्देश्य
नई स्टार्टअप नीति के तहत सरकार का फोकस निम्न बिंदुओं पर रहेगा—
- स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना
- युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना
- निवेश आकर्षित करना
- रोजगार सृजन
- नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा
- वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियों को प्रदेश में लाना
हाईटेक और डीप-टेक सेक्टर पर विशेष जोर
नई नीति में विशेष रूप से डीप-टेक (Deep Tech) क्षेत्रों पर निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
इनमें शामिल हैं—
- Artificial Intelligence (AI)
- Machine Learning
- Robotics
- Internet of Things (IoT)
- Semiconductor
- Biotechnology
- Drone Technology
- Space Technology
- Cyber Security
- Quantum Computing
- Defence Technology
सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था इन्हीं क्षेत्रों पर आधारित होगी।
स्टार्टअप्स को क्या मिलेगा?
नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को विभिन्न स्तरों पर सहायता मिलेगी।
मुख्य प्रावधान—
- सीड फंडिंग
- प्रोटोटाइप विकास सहायता
- मार्केटिंग सहायता
- पेटेंट शुल्क में सहायता
- इनक्यूबेशन सेंटर
- एक्सीलरेटर प्रोग्राम
- निवेशकों तक पहुंच
- महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति उद्यमियों के लिए अतिरिक्त लाभ
उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्यों में तेजी से उभरा है।
कुछ प्रमुख तथ्य
- राज्य में हजारों स्टार्टअप पंजीकृत हैं।
- प्रत्येक जिले में स्टार्टअप संस्कृति विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- लखनऊ, नोएडा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज प्रमुख स्टार्टअप हब बन रहे हैं।
- आईटी, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और फिनटेक सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है।
सरकार का लक्ष्य प्रदेश को देश के अग्रणी नवाचार केंद्रों में शामिल करना है।
गोरखपुर और मुरादाबाद जारी करेंगे म्यूनिसिपल बॉन्ड
कैबिनेट में गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम को म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने की मंजूरी भी दी गई।
म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिए नगर निगम पूंजी बाजार से धन जुटाकर शहरों में—
- सड़क
- सीवरेज
- पेयजल
- स्मार्ट सिटी परियोजनाएं
- शहरी परिवहन
- हरित विकास
जैसी परियोजनाओं को गति देंगे।
होमगार्ड स्वयंसेवकों को मिलेगी कैशलेस इलाज सुविधा
योगी सरकार ने प्रदेश के लगभग 1.60 लाख होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को बड़ी राहत दी है।
अब उन्हें सरकारी सहायता से कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रदेश में वर्तमान समय में—
- लगभग 1.18 लाख सक्रिय होमगार्ड स्वयंसेवक
- 41 हजार से अधिक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी
हो चुकी है।
इस फैसले से बड़ी संख्या में परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि होमगार्ड लंबे समय से पुलिस व्यवस्था की सहायक शक्ति रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में उन्हें सीमित लाभ मिलता था।
कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से—
- आर्थिक बोझ कम होगा।
- गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मिलेगी।
- परिवारों की सुरक्षा बढ़ेगी।
- सेवा के दौरान मनोबल मजबूत होगा।
योगी सरकार का व्यापक संदेश
इन फैसलों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार तीन मोर्चों पर समानांतर काम कर रही है—
पहला: सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
दूसरा: निवेश और रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था
तीसरा: सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
यही कारण है कि एक ही कैबिनेट बैठक में धार्मिक पहचान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे विविध विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
योगी सरकार की ताज़ा कैबिनेट बैठक प्रदेश की विकास रणनीति का व्यापक खाका प्रस्तुत करती है। जलालाबाद का ‘परशुरामपुरी’ नामकरण सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है, जबकि स्टार्टअप नीति-2026 उत्तर प्रदेश को तकनीकी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास है। वहीं होमगार्ड स्वयंसेवकों के लिए कैशलेस इलाज का निर्णय सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विरासत, निवेश, स्टार्टअप और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। (Amar Bharti)
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