Kashi Vidyapith Students Protest: वाइवा में कम अंक देने के विरोध में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, विभाग पर जड़ा ताला

Kashi Vidyapith Students Protest: प्लेसमेंट, पीएचडी और मूल्यांकन पर छात्रों का बड़ा आरोप, प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में वाइवा में कम अंक दिए जाने के विरोध में समाज कार्य संकाय के छात्रों का धरना और विभाग पर ताला।
Kashi Vidyapith Students Protest: काशी विद्यापीठ के समाज कार्य संकाय के छात्रों का वाइवा में कम अंक दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन

रिपोर्ट: प्रवेश सिंह, वाराणसी

Kashi Vidyapith Students Protest सोमवार को उस समय सुर्खियों में आ गया, जब महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाज कार्य संकाय (एमएसडब्ल्यू) के छात्रों ने वाइवा परीक्षा में कथित रूप से कम अंक दिए जाने के विरोध में विभाग के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इससे उनके भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

वाइवा के अंकों पर भड़का छात्रों का गुस्सा

प्रदर्शन की मुख्य वजह चतुर्थ सेमेस्टर की मौखिक (वाइवा) परीक्षा में मिले अंक बताए जा रहे हैं। Kashi Vidyapith Students Protest कर रहे छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले इंटरनल परीक्षा में पूरे 20 अंक देने का आश्वासन दिया था, लेकिन परिणाम घोषित होने पर अधिकांश विद्यार्थियों को केवल 12 से 14 अंक ही दिए गए। छात्रों का कहना है कि एक-दो अतिरिक्त अंक मिलने से कई विद्यार्थियों का ग्रेड बेहतर हो सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

छात्रों ने भविष्य से खिलवाड़ का लगाया आरोप

छात्र नेताओं ने कहा कि कम अंक दिए जाने से छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि अच्छे ग्रेड का सीधा असर उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कॉलरशिप और रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। Kashi Vidyapith Students Protest के दौरान छात्रों का आरोप है कि निष्पक्ष मूल्यांकन के बजाय मनमाने तरीके से अंक दिए गए, जिससे कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

नेतृत्व कर रहे छात्रों ने रखी अपनी बात

Kashi Vidyapith Students Protest का नेतृत्व समाज कार्य संकाय के छात्र और काशी विद्यापीठ छात्रसंघ महामंत्री पद के पूर्व प्रत्याशी रितिक सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के साथ किए गए वादे पूरे नहीं किए। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने छात्रों की बात गंभीरता से नहीं सुनी, जिससे छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्लेसमेंट व्यवस्था पर भी उठे गंभीर सवाल

छात्रों ने विश्वविद्यालय की प्लेसमेंट व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि समाज कार्य (एमएसडब्ल्यू) एक प्रोफेशनल कोर्स होने के बावजूद वर्ष 2022 के बाद से छात्रों के लिए कोई प्रभावी प्लेसमेंट अभियान नहीं चलाया गया। Kashi Vidyapith Students Protest केवल वाइवा के अंकों तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं।

बाहरी छात्रों को प्राथमिकता देने का आरोप

Kashi Vidyapith Students Protest के दौरान छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाओं में अपने विद्यार्थियों के बजाय अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब काशी विद्यापीठ में योग्य और प्रशिक्षित छात्र उपलब्ध हैं तो बाहरी संस्थानों के छात्रों को अवसर देना विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अन्याय है।

पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

छात्रों ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों को शोध और पीएचडी में पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, जबकि बाहरी अभ्यर्थियों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। Kashi Vidyapith Students Protest में छात्रों का कहना है कि इससे विश्वविद्यालय के अपने विद्यार्थियों का मनोबल लगातार गिर रहा है।

छात्राओं ने भी उठाई आवाज

Kashi Vidyapith Students Protest में शामिल छात्रा महिला अग्रहरि ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने मांग की कि परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और प्रत्येक छात्र को उसके प्रदर्शन के अनुसार निष्पक्ष अंक दिए जाएं। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रशासन को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम

Kashi Vidyapith Students Protest के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। छात्रों की मांग है कि वाइवा और इंटरनल परीक्षा के अंकों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, जिन छात्रों के साथ अन्याय हुआ है उन्हें न्याय मिले, प्लेसमेंट व्यवस्था को मजबूत किया जाए, पीएचडी और शोध परियोजनाओं में पारदर्शिता लाई जाए तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा। Kashi Vidyapith Students Protest मेंछात्रों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन भी किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और क्या बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकल पाता है। आने वाले 24 घंटे Kashi Vidyapith Students Protest मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं। (Amar Bharti)

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