टीजी मोहनदास बयान विवाद: आरएसएस ने बनाई दूरी, केरल सरकार ने जांच के दिए आदेश

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छात्र प्रदर्शन को लेकर हिंदुत्व विचारक टीजी मोहनदास की विवादित टिप्पणी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उनसे सार्वजनिक रूप से दूरी बना ली है। आरएसएस ने कहा कि मोहनदास के बयान उनके निजी विचार हैं और संगठन उनसे सहमत नहीं है। वहीं, केरल सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
टीजी मोहनदास बयान विवाद पर आरएसएस का स्पष्टीकरण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी केबी श्रीकुमार ने बयान जारी कर कहा कि टीजी मोहनदास किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हालिया छात्र प्रदर्शन पर उनकी टिप्पणियां पूरी तरह उनके निजी विचार हैं और आरएसएस उनकी हर संभव सबसे कड़े शब्दों में निंदा करता है।
यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया, जब मोहनदास के बयान को लेकर केरल और सोशल मीडिया पर व्यापक विरोध दर्ज किया गया।
क्या था टीजी मोहनदास का विवादित बयान
रिपोर्ट के अनुसार, टीजी मोहनदास ने एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड वीडियो में कहा था कि यदि वे जिम्मेदारी में होते तो जंतर-मंतर क्षेत्र में कर्फ्यू लगाते। उन्होंने यह भी कहा कि तीन बार चेतावनी देने के बाद भी यदि प्रदर्शनकारी नहीं हटते तो गोली चलाने का आदेश देते।
इसी बयान के बाद उनके खिलाफ विरोध शुरू हुआ और छात्र संगठनों ने इसे हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया।
एआईएसएफ़ की शिकायत और केरल सरकार की कार्रवाई
सीपीआई समर्थित छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ़) ने टीजी मोहनदास के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग की सार्वजनिक वकालत की, जो हिंसा को बढ़ावा देने वाला बयान है।
शिकायत में उनके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई। साथ ही बयान प्रसारित करने वाले यूट्यूब चैनल, वीडियो के स्रोत और उसके डिजिटल प्रसार की जांच की भी मांग की गई।
केरल सरकार ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शिकायतों के बाद वीडियो की जांच कराने का निर्देश दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मोहनदास की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि यह बयान असहमति के प्रति कठोर सोच को दर्शाता है।
कांग्रेस ने भी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह आरएसएस की “घृणित, हिंसक और महिला-विरोधी सोच” का प्रमाण है। हालांकि आरएसएस ने स्पष्ट किया कि मोहनदास का संगठन से कोई संबंध नहीं है और उनके विचार व्यक्तिगत हैं।

विवाद बढ़ने के बाद टीजी मोहनदास ने क्या कहा
विवाद बढ़ने के बाद टीजी मोहनदास ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर 31 मिनट की पूरी चर्चा के बजाय केवल एक से डेढ़ मिनट की क्लिप साझा की गई, जिससे उनके बयान का संदर्भ बदल गया।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य हिंसा का समर्थन करना नहीं था, बल्कि एक काल्पनिक उदाहरण के माध्यम से हिंसक दंगों से निपटने की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को समझाना था।
सोशल मीडिया पर भी हुई तीखी प्रतिक्रिया
टीजी मोहनदास के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने बयान की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। वहीं कुछ यूज़र्स ने आरएसएस से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की, जिसके बाद संगठन ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया।
विवाद गहराया
टीजी मोहनदास बयान विवाद को लेकर आरएसएस ने स्पष्ट किया है कि उनकी टिप्पणियां संगठन का आधिकारिक मत नहीं हैं। मामले में एआईएसएफ़ ने शिकायत दर्ज कराई है, केरल सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और विवाद पर राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। (Amar Bharti)
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