‘P’ से पिछड़ा या पंडित? 4 बार CM रहीं मायावती ने PDA फॉर्मूले पर उठाए सवाल

मायावती ने PDA फॉर्मूले को लेकर सपा पर लगाए संकीर्ण जातिवादी राजनीति के आरोप

PDA फॉर्मूला पर बयान देती बसपा प्रमुख मायावती
बसपा प्रमुख मायावती ने PDA फॉर्मूले को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर PDA फॉर्मूला चर्चा के केंद्र में आ गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के PDA फॉर्मूले को लेकर तीखा हमला बोला है। शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मायावती ने सपा पर चुनावी स्वार्थ के लिए समय-समय पर अपना राजनीतिक रुख बदलने और संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है और इसी विचारधारा के आधार पर उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार चला चुकी है।

बसपा की विचारधारा और चार बार सरकार चलाने का दावा

मायावती ने अपने बयान में कहा कि बहुजन समाज पार्टी की राजनीति किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार बसपा हमेशा से सामाजिक न्याय, समान अवसर और सर्वसमाज के हितों को प्राथमिकता देने वाली पार्टी रही है।

उन्होंने कहा कि बसपा का मूल सिद्धांत ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ है और पार्टी ने इसी विचारधारा के आधार पर जनता का विश्वास हासिल किया। मायावती ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा चार बार सरकार चला चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी को विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला है।

बसपा प्रमुख के अनुसार उनकी पार्टी का राजनीतिक दृष्टिकोण समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने पर आधारित है, जबकि कुछ अन्य दल चुनावी समीकरणों के आधार पर अपनी रणनीति बदलते रहते हैं।

PDA फॉर्मूले को लेकर सपा पर सीधा निशाना

अपने बयान में PDA फॉर्मूला को लेकर मायावती ने समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताकर राजनीति करती थी। लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उसकी व्याख्या बदलती दिखाई दे रही है।

मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अपरकास्ट, विशेषकर ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर झुकाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बसपा की ओर से ब्राह्मण समाज के लोगों को उम्मीदवार भी बनाया जा रहा है, जिससे सपा असहज नजर आ रही है।

उनके मुताबिक इसी कारण अब समाजवादी पार्टी के लिए PDA में ‘P’ का अर्थ ‘पंडित’ किया जाने लगा है। मायावती ने इसे सपा की बदलती राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह बदलाव चुनावी हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलने का आरोप

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर समय-समय पर अपना राजनीतिक रंग बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ के लिए विभिन्न सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश करना सपा की राजनीति का हिस्सा रहा है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने नारे, रणनीति या राजनीतिक संदेश को परिस्थितियों के अनुसार बदलना उसकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन इससे समाज के व्यापक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति का केंद्र चुनावी गणित है, जबकि बसपा सामाजिक न्याय और सर्वसमाज के विकास की बात करती है।

उन्होंने कहा कि किसी विशेष वर्ग को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक संदेशों की नई व्याख्या करना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे समाज में विभाजन की भावना भी पैदा हो सकती है।

संकीर्ण जातिवादी राजनीति पर उठाए सवाल

मायावती ने सपा की रणनीति को राजनीतिक छल और छलावे का प्रमाण बताते हुए कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति से किसी व्यक्ति या वर्ग को कुछ समय के लिए राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज का कल्याण नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने वाली राजनीति और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली सोच ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। बसपा प्रमुख के अनुसार राजनीतिक दलों को चुनावी फायदे के बजाय समाज के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

मायावती ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति या वर्ग की राजनीति नहीं करती, बल्कि सामाजिक समरसता और समान भागीदारी के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने बसपा को सर्वसमाज हितैषी पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी का लक्ष्य सभी वर्गों को सम्मान और प्रतिनिधित्व देना है।

सर्वसमाज से सावधान रहने की अपील

अपने बयान के अंत में मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से समाजवादी पार्टी की कथित जातिवादी राजनीति और राजनीतिक दांव-पेच से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोगों को राजनीतिक नारों और बदलती रणनीतियों को समझने की जरूरत है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति से सतर्क रहना पूरे समाज के हित में है। उन्होंने लोगों से सामाजिक सद्भाव और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर राजनीतिक निर्णय लेने की अपील की।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न सामाजिक वर्गों और वोट बैंक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। मायावती का यह हमला आने वाले समय में सपा और बसपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर सकता है।

आगे की राह

PDA फॉर्मूला को लेकर मायावती का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिक रुख बदलने, संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने और PDA की नई व्याख्या प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। वहीं बसपा ने एक बार फिर अपनी ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति को सामने रखते हुए खुद को सर्वसमाज की पार्टी बताया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है। (Amar Bharti)

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