मोदी कैबिनेट में फेरबदल की आहट? 12 पद खाली, 3 मंत्रियों के इस्तीफे से बढ़ी फेरबदल की चर्चा

मोदी कैबिनेट में फेरबदल: यूपी, MP समेत 6 राज्यों से आ सकते हैं युवा चेहरे

मोदी कैबिनेट फेरबदल में युवा चेहरों की संभावित एंट्री
मोदी कैबिनेट फेरबदल की चर्चा के बीच युवा चेहरों पर नजर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में आने वाले महीनों में फेरबदल की चर्चा तेज है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के गठन के बाद अब संभावित कैबिनेट विस्तार या बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि इस बार युवाओं और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ आगामी चुनावी समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

मोदी कैबिनेट में बढ़ सकते हैं युवा चेहरे

तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय मोदी कैबिनेट में 65 फीसदी से अधिक मंत्री 51 से 70 वर्ष की आयु वर्ग में थे। वहीं 31 से 50 वर्ष की उम्र वाले मंत्रियों की हिस्सेदारी करीब 24 फीसदी थी।

मौजूदा मंत्रिपरिषद में 70 वर्ष से अधिक उम्र के 12 कैबिनेट और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। 81 वर्षीय जीतन राम मांझी सबसे अधिक उम्र वाले कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि 38 वर्षीय के. राम मोहन नायडू सबसे युवा कैबिनेट मंत्री हैं।

ऐसे में मोदी कैबिनेट के संभावित फेरबदल में युवा चेहरों को अधिक जगह मिलने की चर्चा ने जोर पकड़ा है। खासकर हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार मंत्रिपरिषद में पीढ़ीगत संतुलन को और मजबूत करेगी।

12 मंत्री पद अभी खाली, तीन मंत्रियों के इस्तीफे के बाद बदले समीकरण

मोदी कैबिनेट में बदलाव की एक बड़ी वजह मौजूदा रिक्तियां भी हैं। हाल में तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है। इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू शामिल हैं।

इसके बाद प्रधानमंत्री को मिलाकर मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं। इनमें 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री शामिल हैं।

संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। इस हिसाब से 12 पद खाली हैं। हालांकि संभावित फेरबदल में इन रिक्त पदों को भरने के अलावा मौजूदा मंत्रियों के विभागों और जिम्मेदारियों में भी बदलाव हो सकता है।

किन मौजूदा मंत्रियों पर पड़ सकता है असर?

मोदी कैबिनेट में फेरबदल में कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदलने या उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाए जाने की संभावना पर भी चर्चा है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में पूरा होने की बात कही गई है।

मंत्रियों के प्रदर्शन को भी संभावित बदलाव का एक आधार माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव की संभावना पर भी चर्चा है।

यूपी, MP समेत इन राज्यों पर नजर

संभावित मंत्रिपरिषद फेरबदल में उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से नए चेहरों को जगह मिलने की चर्चा है।

मोदी कैबिनेट में इन राज्यों से युवा नेताओं को केंद्र की टीम में शामिल किए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि अभी किसी नाम को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए संभावित नामों को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

सहयोगी दलों के लिए भी खुल सकता है रास्ता

मोदी कैबिनेट में संभावित बदलाव का एक दूसरा पहलू एनडीए के सहयोगी दल भी हैं। चर्चा है कि नए सहयोगी दलों को मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

डीएमके, एनसीपी-एसपी और अकाली दल को लेकर भी राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं कि क्या ये दल एनडीए के साथ आ सकते हैं। इसके अलावा टीएमसी के बागियों से बनी एनसीपीआई से किसी नेता को मंत्री बनाए जाने की अटकलें भी सामने आ रही हैं।

पंजाब के चुनावी समीकरण को देखते हुए भाजपा में आए आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों में से किसी को मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना की भी चर्चा है।

शिवसेना से श्रीकांत शिंदे के नाम की चर्चा

महाराष्ट्र के लिहाज से शिवसेना को भी संभावित मंत्रिपरिषद फेरबदल में अहम माना जा रहा है। खबर के मुताबिक, शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शामिल होने के बाद शिवसेना की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

ऐसे में शिवसेना को कैबिनेट पद मिलने की संभावना की चर्चा है। पार्टी की ओर से श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है। हालांकि इसे लेकर भी अभी आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

14 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय

मौजूदा मंत्रिपरिषद में 14 मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार है। इनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, ललन सिंह, प्रल्हाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरेन रिजिजू, मनसुख मांडविया और जी किशन रेड्डी शामिल हैं।

ऐसे में संभावित फेरबदल में कुछ मंत्रियों का विभागीय भार कम किया जा सकता है। इससे खाली पदों पर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने के साथ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज का पुनर्गठन भी संभव हो सकता है।

चुनावी समीकरण और 2029 पर भी नजर

संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल को केवल खाली पदों को भरने की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है।

युवाओं और महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की चर्चा के साथ-साथ सहयोगी दलों की भागीदारी, राज्यों का संतुलन और मंत्रियों के प्रदर्शन जैसे पहलू भी अहम हो सकते हैं।

क्या बदलेगी मोदी कैबिनेट की तस्वीर?

फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है। लेकिन खाली पदों, हालिया इस्तीफों, संगठन में हुए बदलाव और आगामी चुनावी समीकरणों ने संभावित विस्तार या फेरबदल की अटकलों को तेज कर दिया है। यदि बदलाव होता है तो यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के साथ युवा चेहरों और सहयोगी दलों पर विशेष नजर रहेगी। (Amar Bharti)

Swine Flu पर ICMR का बड़ा अपडेट, जानें किसे वैक्सीन लगवानी चाहिए

DRDO की सभी पारंपरिक मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योग को होगी ट्रांसफर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *