BRICS: व्यापार बढ़ा, लेकिन भारत के लिए तस्वीर पूरी सकारात्मक नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। BRICS को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए भारत की कूटनीतिक पहुंच और सम्मेलन की मेजबानी के फायदे गिनाए हैं।
BRICS पर चिदंबरम और थरूर की राय ऐसे समय सामने आई है, जब भारत में 12 और 13 सितंबर को BRICS समिट होने वाला है। हालांकि, थरूर ने BRICS के महत्व के साथ-साथ समूह के सामने मौजूद चुनौतियों और भारत के व्यापार संतुलन को लेकर चिंता भी जताई है।
थरूर ने बताया BRICS क्यों है महत्वपूर्ण
शशि थरूर ने दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन से पहले समूह के महत्व पर अपनी राय रखी। उन्होंने BRICS को ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
थरूर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश इन देशों की विविधता और अलग-अलग विचारों को काफी हद तक सामने रखते हैं। उन्होंने कहा कि BRICS के 11 देश दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक GDP में उनकी हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है।
थरूर ने इसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दुनिया के बाकी देशों को भी इस समूह को गंभीरता से लेना पड़ता है।

भारत के लिए BRICS की मेजबानी क्यों अहम?
थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया। उनके अनुसार, सम्मेलन में BRICS देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता भी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि इतने देशों के शीर्ष नेताओं का भारत आना देश की कूटनीतिक पहुंच और अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाने की क्षमता को दर्शाता है। थरूर के मुताबिक, वैश्विक मंच पर भारत की यह कूटनीतिक क्षमता अपने आप में महत्वपूर्ण है।
BRICS के सामने हैं कई चुनौतियां
शशि थरूर ने BRICS को केवल फायदे के नजरिए से नहीं देखा। उन्होंने समूह के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग सदस्य देशों के बीच महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सहमति बनाने की है।
थरूर ने ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि BRICS के सभी देशों के बीच वैश्विक मुद्दों पर एक राय बनाना आसान नहीं है।
उन्होंने बताया कि मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच युद्ध को लेकर मतभेद सामने आए थे। इन मतभेदों के कारण सदस्य देश साझा बयान पर सहमत नहीं हो सके थे।
साझा बयान पर सहमति नहीं बनने का मुद्दा
थरूर के मुताबिक, पिछली विदेश मंत्रियों की बैठक में BRICS देशों के बीच साझा घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी थी। इसके बाद भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर की घोषणा जारी की थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आगामी सम्मेलन में भी ऐसा ही होगा। थरूर के अनुसार, अगर फिर से साझा बयान पर सहमति नहीं बनती है तो कुछ लोग इसे BRICS के लिए झटका और समूह के भीतर बुनियादी असहमति का संकेत मान सकते हैं।
उनके मुताबिक, अलग-अलग देशों के मतभेदों को संभालना और उनके बीच सहमति बनाना भारतीय राजनयिकों के सामने बड़ी चुनौती होगी।
BRICS देशों के साथ व्यापार को लेकर थरूर की चिंता
थरूर ने BRICS देशों के साथ भारत के व्यापार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भारत के नजरिए से तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है।
उनके मुताबिक, BRICS देशों को भारत का निर्यात घटा है, जबकि इन देशों से भारत का आयात बढ़ गया है। यानी व्यापार बढ़ने के बावजूद भारत के लिए व्यापार संतुलन नुकसान की दिशा में जा रहा है।

चिदंबरम ने BRICS को लेकर क्या सवाल उठाया?
शशि थरूर की टिप्पणी से एक दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभों पर सवाल उठाया था।
चिदंबरम ने कहा था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों में उन्हें कोई खास या ठोस नतीजा नजर नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO, G20 और QUAD जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है।
चिदंबरम के मुताबिक, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन मंचों से भारत को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है। उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस फायदा या ठोस परिणाम मिला है।
BJP ने चिदंबरम के बयान पर साधा निशाना
चिदंबरम के बयान के बाद BJP ने भी कांग्रेस नेता पर निशाना साधा था। BJP ने उन्हें उन ‘नाराज फूफा’ लोगों में शामिल बताया था, जो भारत की प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं।
इस तरह BRICS को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग राय सामने आई है। चिदंबरम ने जहां पिछले सम्मेलनों के ठोस नतीजों पर सवाल उठाया, वहीं थरूर ने BRICS की वैश्विक भूमिका, भारत की कूटनीतिक पहुंच और सम्मेलन की मेजबानी के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने समूह की चुनौतियों और भारत के व्यापार संतुलन को लेकर चिंता भी जताई है।
BRICS पर चिदंबरम और थरूर की राय का सार
BRICS पर चिदंबरम और थरूर के बयानों से कांग्रेस के भीतर समूह को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आया है। चिदंबरम ने भारत को मिले ठोस परिणामों पर सवाल उठाया है, जबकि थरूर ने इसे ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए भारत की कूटनीतिक भूमिका को अहम माना है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट में अब समूह के सामने मौजूद चुनौतियों और भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी। (Amar Bharti)
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