प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी द्वारा संपादित ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ भाग 4 का भव्य लोकार्पण

दीक्षित दनकौरी की ग़ज़ल-साधना की सराहना, हिंदी और उर्दू को करीब लाने का प्रयास

ग़ज़ल दुष्यंत के बाद भाग 4 के लोकार्पण कार्यक्रम में दीक्षित दनकौरी
हंसराज कॉलेज में ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ भाग 4 का लोकार्पण।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी द्वारा संपादित ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ भाग 4 का भव्य लोकार्पण हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम में वरिष्ठ शायर शकील शिफ़ाई, विज्ञान व्रत और दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी समेत दिल्ली-NCR और देशभर से आए अनेक शायर, शायरा और ग़ज़ल प्रेमी मौजूद रहे।

हंसराज कॉलेज में हुआ ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ भाग 4 का लोकार्पण

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर शकील शिफ़ाई ने की, जबकि वरिष्ठ शायर विज्ञान व्रत मुख्य अतिथि और दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे।

कार्यक्रम में अंबर खरबन्दा, डॉ. रहमान मुसव्विर, अनिल ‘मीत’, डॉ. अमर पंकज, प्रो. श्याम वशिष्ठ, डॉ. शिवकांत शर्मा ‘शिव’, डॉ. सुधीर त्यागी, अशोक कश्यप, जगदीश जोशी ‘अम्बर’, अरविंद ‘असर’, गुरचरन मेहता ‘रजत’, अभिषेक अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र पुष्प, डॉ. खुर्रम नूर, राजीव सिंघल, जितेंद्र सिंह, रचना निर्मल, चेतना कपूर, गार्गी कौशिक और सोनम यादव सहित अनेक साहित्यकार और ग़ज़ल प्रेमी उपस्थित रहे।

‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ श्रृंखला के पहले तीन भाग पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय और चर्चित हो चुके हैं।

हिंदी और उर्दू को करीब लाने का प्रयास

कार्यक्रम का संचालन मोईन शादाब ने किया। उन्होंने कहा कि फारसी और उर्दू की विधा ग़ज़ल को हिंदुस्तान की अनेक भाषाओं ने अपनाया है और हिंदी में भी ग़ज़ल बेहद लोकप्रिय हुई है। उनके मुताबिक, हिंदी और उर्दू को करीब लाने में दीक्षित दनकौरी सेतु का काम कर रहे हैं।

वरिष्ठ हिंदी ग़ज़लकार और समीक्षक ज्ञान प्रकाश विवेक ने लोकार्पित पुस्तक पर विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने दीक्षित दनकौरी के इस कार्य को ग़ज़ल की साधना बताया।

ज्ञान प्रकाश विवेक ने कहा कि ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ के पहले भाग से चौथे भाग तक की यात्रा हिंदी ग़ज़ल की यात्रा है। उनके अनुसार, श्रृंखला के चारों भागों में एक हजार से अधिक रचनाकारों के फोटो और परिचय के साथ पांच हजार से अधिक ग़ज़लें शामिल हैं।

उन्होंने इसे हिंदी ग़ज़ल की सामूहिक चेतना का रचनात्मक वैभव बताया और संकलन में शामिल कई शेरों का भी उल्लेख किया।

पुस्तक में ग़ज़ल के नए अंदाज की चर्चा

ज्ञान प्रकाश विवेक ने हिंदी ग़ज़ल में बतकही के नए अंदाज का उदाहरण देते हुए संतोष सिंह के शेरों का जिक्र किया। वहीं स्त्री की अभिव्यक्ति में दुख की लहर के संदर्भ में उन्होंने संकलन में शामिल अर्चना अर्चन के शेरों का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम में मौजूद दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी ने ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ शीर्षक से शुरू हुई इस संग्रहणीय श्रृंखला पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने हिंदी ग़ज़ल के प्रचार-प्रसार में दीक्षित दनकौरी के प्रयासों की सराहना की।

वरिष्ठ शायर विज्ञान व्रत ने भी अपने संक्षिप्त संबोधन में वाणी प्रकाशन और दीक्षित दनकौरी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

दीक्षित दनकौरी ने साझा किए 26 वर्षों के संस्मरण

अंजुमन फ़रोग़ ए उर्दू के अध्यक्ष मोईन अख़्तर अंसारी ने भारत सरकार और राज्य सरकार से दीक्षित दनकौरी को हिंदी और उर्दू को करीब लाने के इस कार्य के लिए समुचित सम्मान और पुरस्कार दिए जाने की अपील की।

वहीं दीक्षित दनकौरी ने इस श्रृंखला के संपादन के दौरान पिछले 26 वर्षों के अपने खट्टे-मीठे और चुटीले संस्मरण साझा किए। उनके संस्मरणों ने कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं को प्रभावित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शकील शिफ़ाई ने कहा कि इतना बड़ा और प्रामाणिक काम कोई दीवाना ही कर सकता है। उन्होंने दीक्षित दनकौरी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि सभी को साथ लेकर चलना, बड़ों का आदर करना और छोटों को स्नेह देना उनका स्वभाव है।

शकील शिफ़ाई के मुताबिक, ‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ के चारों भाग नवोदित रचनाकारों और आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं और ग़ज़ल प्रेमी सुधीजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

खबर का संक्षिप्त निष्कर्ष:
‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’ भाग 4 का लोकार्पण हिंदी ग़ज़ल के रचनाकारों और प्रेमियों की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम में दीक्षित दनकौरी के संपादन कार्य, हिंदी ग़ज़ल के प्रचार-प्रसार और हिंदी-उर्दू को करीब लाने के प्रयासों की सराहना की गई। (Amar Bharti)

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