Russia-India Oil: अमेरिका को दो टूक, रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा भारत

India-Russia Oil:भारत के करीब 52% कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी

रूस से कच्चे तेल की खरीद पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का रुख बताया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि रूसी तेल भारत के एनर्जी मिक्स का हिस्सा बना रहेगा। बैठक में भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका के प्रस्तावित 100% टैरिफ को लेकर चर्चा हुई।

रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भारत का रुख

विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में रूस से कच्चे तेल की खरीद और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूसी कच्चा तेल भारत के एनर्जी मिक्स का हिस्सा बना रहेगा।

बैठक में सांसदों के साथ रूस पर भारत की कच्चे तेल के लिए निर्भरता और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में भारत की भूमिका पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने सांसदों को बताया कि बाहरी दबाव के बावजूद नई दिल्ली मॉस्को के साथ अपने संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं बताया। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को दोनों देशों के बीच बहुआयामी जुड़ाव का हिस्सा बताया गया।

भारत के करीब 52% कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी

बैठक में बताया गया कि भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत है। यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिम एशिया के पारंपरिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं पर असर पड़ा है। ऐसे में बैठक में रूसी तेल को भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर चर्चा के दौरान यह भी बात सामने आई कि युद्ध जारी रहने के बावजूद यूरोपीय देश भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का कुछ हिस्सा रूस से आयात कर रहे हैं।

भारत ने रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को बनाए रखने के संकेत दिए हैं। बैठक में भारत की ऊर्जा जरूरतों और रूस के साथ व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर सांसदों ने सवाल भी उठाए।

यूक्रेन युद्ध पर भारत ने दोहराया बातचीत और कूटनीति का रुख

बैठक में यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के भारत के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। भारत का रुख है कि युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे का रास्ता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी नेतृत्व, दोनों से बातचीत कर चुके हैं। भारत लगातार संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे के साथ यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख को भी बैठक में महत्वपूर्ण विषय के तौर पर रखा गया। जयशंकर ने भी भारत-रूस संबंधों और यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत की स्थिति पर जोर दिया।

जयशंकर ने एक्स पर साझा की बैठक की जानकारी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस के साथ अपने बहुआयामी जुड़ाव और यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत एवं कूटनीति को सक्रिय समर्थन देने पर जोर दिया।

उन्होंने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को भारत-रूस रिश्तों का अहम हिस्सा बताया।

बैठक में रूस से कच्चे तेल की खरीद के अलावा दोनों देशों के व्यापक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने मॉस्को के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अमेरिका के 100% टैरिफ प्रस्ताव पर भी चर्चा

बैठक में रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ को लेकर भी चिंता जताई गई। सांसदों ने इस संभावित कदम के भारत-रूस व्यापार और ऊर्जा संबंधों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए।

चर्चा का एक अहम विषय यह रहा कि यदि ऐसे टैरिफ लागू होते हैं तो भारत की ऊर्जा जरूरतों और रूस के साथ व्यापारिक रिश्तों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत के रुख के बीच यह मुद्दा इसलिए भी बैठक में चर्चा का हिस्सा रहा क्योंकि रूस भारत के कच्चे तेल के आयात में करीब 52 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।

सलाहकार समिति की बैठक में कई दलों के सांसद शामिल

विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में कई राजनीतिक दलों के सांसद मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से मनीष तिवारी, मुकुल वासनिक और गुरजीत औजला ने हिस्सा लिया।

वहीं, BJP की ओर से विनोद तावड़े, विक्रमजीत साहनी और के. सुधाकर बैठक में शामिल हुए। AITC सांसद बाबुल सुप्रियो और CPM सांसद पी. संतोष कुमार भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक में भारत-रूस संबंधों, ऊर्जा, यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सांसदों के साथ चर्चा हुई।

भारत ने रूस के साथ ऊर्जा संबंध बनाए रखने का संकेत दिया

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान भारत के मौजूदा रुख को स्पष्ट करता है। बैठक में रूसी तेल को भारत के एनर्जी मिक्स का हिस्सा बनाए रखने की बात कही गई।

साथ ही भारत ने रूस के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को अपने बहुआयामी जुड़ाव का हिस्सा बताया। यूक्रेन युद्ध को लेकर भी भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

भारत की नीति

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि रूसी तेल भारत के एनर्जी मिक्स का हिस्सा बना रहेगा। विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिका के प्रस्तावित 100% टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सांसदों के साथ चर्चा हुई। (Amar Bharti)

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