लेबनान में 254 मौतें, 1165 घायल, ईरान बोला – उल्लंघन, पाकिस्तान ने संयम की अपील की

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद ऐसा लगा कि शायद मिडिल ईस्ट में कुछ समय के लिए टकराव का सिलसिला रूकेगा लेकिन दो हफ्ते के अस्थायी सीज़फायर को 24 से 48 घंटे का समय भी नहीं बीता है लेबनान लगातार हो रहे भारी हमलों से दहल रहा है जिससे स्थिति और नाज़ुक बन चुकी है. ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि सीज़फायर लेबनानन सहित पूरे क्षेत्र पर लागू होता है जबकि इज़रायल और अमरिका के राष्ट्रपति ट्रंप इस बात से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि सीज़फ़ायर केवल ईरान तक सीमित है. यह लेबनान या हिजबुल्लाह पर लागू नहीं होता.
क्या हो रहा है लेबनान में?
8 अप्रैल 2026 को एक तरफ वार्ता का दौर और सीज़फायर की बातचीत दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान पर अबतक का सबसे बड़ा हमला कर दिया. आईडीएफ ने महज़ 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा इलाकों पर हमले किए जिनमें बेरूत, बेका घाटी, दक्षिणी लेबनान और सिडोन सहित कई अन्य इलाके शामिल हैं.
लेबनान के स्वास्थ मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार इस हमले में 254 लोगों की मौत हो गई और 1, 165 से ज्यादा घायल हो गए. अचानक हुए इस हमले में भारी संख्या में हताहत होने की वजह से 8 अप्रैल के दिन को संघर्ष का सबसे ख़ूनी दिन करार दिया गया. हिजबुल्लाह ने शुरूआत में हमलों को रोक दिया ता लेकिन इज़रायल के लगातार किए जा रहे हमलों के जवाब में उसने उत्तर इज़रायल पर रॉकेट दागे. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हमलों को “बार्बरिक” बताया, जबकि अरब लीग ने इजराइल पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया।
सीजफायर में लेबनान को लेकर विवाद क्यों?
पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद लगने लगा कि मिडिल ईस्ट धमाकों की गूंज से कुछ समय के लिए शांत हो जाएगा लेकिन कुछ ही समय में तस्वीर फिर बदल गई. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने घोषणा की थी कि सीज़फायर लेबनान सहित हर जगह लागू होगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह शर्त साफ थी, इसके बावजूद लेबनान पर हमले किए गए. ईरान इसे ग्रेव वॉयलेशन (गंभीर उल्लंघन) बता रहा है और कह रहा है कि अगर हमले नहीं रुके तो सीजफायर खत्म माना जाएगा।
इजराइल और अमेरिका का रुख:
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा – “सीजफायर लेबनान को शामिल नहीं करता”। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे “अलग झड़प” बताया क्योंकि इसमें हिजबुल्लाह शामिल है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी यही बात दोहराई. इज़रायल अमेरिका के इस रूख का परिणाम यह हुआ कि ईरान ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद कर दिया है जिस टैंकरों आवागमन फिर से बाधिक हो गया है और वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो गया है.
लेबनान को इज़रायल क्यों कर रहा टारगे?
लेबनान में इज़रायल-हिजबुल्लाह संघर्ष मार्च 2026 से और तेज़ हो गया है. इसका कारण ईरान समर्थित हिजबुल्लाह माना जा रहा है. लेबनान में अबतक 17000 से ज्यादा मौत हो चुकी हैं और 12 लाख से ज्यादा लोग विस्तापित हो चुके हैं. इज़रायल का लक्ष्य दक्षिणी लेबनान में बफ़र ज़ोन बनाने की है और वह यहां से हिजबुल्लाह की ताकत पूरी तरह ख़त्म करना चाहता है. ईरान हिजबुल्लाह को अपना “प्रॉक्सी” मानता है, इसलिए लेबनान पर हमलों को वह सीधे अपनी सुरक्षा से जुड़ा मामला बताता है.
क्या है ताज़ा स्थिति?
लेबनान पर हमलों ने स्थिति को फिर वहीं लाकर खड़ा कर दिया इसलिए वर्तमान सीज़फ़ायर कागज़ी लग रहा है. ईरान ने साफ़ कर दिया है कि 10 अप्रैल को होने जा रही इस्लामाबाद वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब लेबनान में हमले रूकेंगे. वहीं पाकिस्तान ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. आपको बता दें कि लेबनान का मुद्दा US-ईरान सीजफायर का सबसे बड़ा स्टंबलिंग ब्लॉक बन चुका है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की साख अब इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है। फिलहाल क्षेत्रीय शांति के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.