69000 शिक्षक भर्ती मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: सरकार ने बिना किसी को हटाए नियुक्ति देने का दिया आश्वासन

छह सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने जताई सहमति

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती प्रकरण को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह किसी भी मौजूदा शिक्षक को प्रभावित किए बिना उन अभ्यर्थियों की सूची तैयार करेगी, जिन्हें भर्ती प्रक्रिया में नुकसान हुआ है। सरकार ने कहा कि कोर्ट की सहमति के बाद ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सरकार के इस प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि बिना किसी को हटाए नियुक्ति देने की दिशा में सरकार काम कर रही है तो यह सराहनीय कदम है। कोर्ट ने सरकार को पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तब तक मामले की याचिका लंबित रहेगी।

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने जताई सहमति

सरकार के प्रस्ताव पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सहमति जताई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि लंबे समय से सुनवाई नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों में निराशा और चिंता का माहौल था। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थी लगातार सरकार से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी कराने और अधिवक्ता भेजने की मांग कर रहे थे।

अमरेंद्र पटेल ने कहा कि मंगलवार को हुई सुनवाई में सरकार ने हाई कोर्ट की डबल बेंच के आदेश के अनुसार उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने का वादा किया है, जो अब तक नौकरी पाने से वंचित रह गए हैं। इसके लिए सरकार ने कोर्ट से समय मांगा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने छह सप्ताह का समय प्रदान किया है।

आरक्षण नियमों के पालन की उठी मांग

अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार 27 प्रतिशत और 21 प्रतिशत आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए नई सूची तैयार करेगी, ताकि आरक्षित वर्ग के अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके। मामले की अगली सुनवाई अब सरकार द्वारा सूची और प्रक्रिया संबंधी रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद होगी।

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