
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को ज़ोरदार झटका लगा है। पार्टी ने राघव को हटाकर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर और पार्टी सांसद अशोक कुमार मित्तल को डिप्टी लीडर बनाया है। राघव चड्ढा से संबंधित एक पत्र राज्यसभा सचिवालय को भेजा गया है जिसमें सांसद राघव चड्ढा की जगह सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उपनेता नियुक्त करने का आग्रह किया गया हालांकि इस बदलाव के पीछे की वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। फिलहाल तो राजनीतिक गलियारों में आबकारी नीति मामले में राघव की चुप्पी ही पार्टी से उनकी दूरियों की वजह मानी जा रही है। गौरतलब है कि आबकारी नीति मामले में मिली राहत के बाद से अबतक अरविन्द केजरीवाल की मुलाकात राघव से न होना और इस मुद्दे को लेकर राघव की कोई प्रतिक्रिया किसी प्लेटफॉर्म पर न आना ही डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने की वजह मानी जा रही है।
राघव पर बोले डिप्टी लीडर अशोक मित्तल – परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया
राघव चड्ढा के डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में उठ रही हलचल को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होने कहा कि “पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होने कहा – ”पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया है. पहले एनडी गुप्ता जी उपनेता थे, फिर राघव जी ने पदभार संभाला और अब मुझे यह जिम्मेदारी दी गई है. कल किसी और को यह मौका मिल सकता है. पार्टी चाहती है कि हर सांसद और नेता विभिन्न भूमिकाओं में सीखे और अनुभव प्राप्त करे, और मुझे प्रशासनिक और राजनीतिक कौशल विकसित करने के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है.” उन्होंने कहा कि ये महज़ अफवाहें हैं और ऐसी बातें फैलती रहती हैं और इन्हें महत्व नहीं देना चाहिए.
अशोक मित्तल कौन हैं?
राघव चड्ढा के हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर बने सांसद अशोक मित्तल बनाए गए हैं। उन्हें वर्ष 2022 में पंजाब से राज्यसभा भेजा गया था। कृषि और शिक्षा जेसे मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रखना अशोक मित्तल की पहचान है। इसके अलावा वह रक्षा समिति, वित्त समिति और फरवरी 2026 में गठित समिति सहित कई संसदीय समितियों के मेंबर रह चुके हैं।
सांसद अशोक मित्तल भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री समूह का हिस्सा भी रहे हैं, पहलगाम आतंकी हमले के बाद डीएमके सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में रूस, स्पेन, स्लोवेनिया, लातविया और ग्रीस भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भी वह शामिल थे।
फिलहाल देखना यह है कि डिप्टी लीडर बनने के बाद वह पार्टी के मुद्दों को सदन के पटल पर कितने प्रभावी ढंग से रख पाते हैं?