
“तीसरे विश्व युद्ध का खतरा?”
दुनिया आज जिस कगार पर खड़ी है उसे किसकी देन माना जाए?लोकतांत्रिक देशों की या फिर ताकतवर चुनिंदा देशों के सनकी तानाशाहों की. लोकतंत्र को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले देश वर्तमान में भेड़ की खाल में भेड़िये की तरह नज़र आ रहे हैं. ईरान में स्कूलों में आंखों में भविष्य के सपने लिए पहुंचे मासूमों के शरीरों के चिथड़े बिखर गए. रात में डर के साए में जी रहे तमाम लोग एक झटके में हमेशा के लिए सो गए. विदेशों से शिक्षा के लिए पहुंचे न जाने कितने बच्चों के सपने और संपत्ति इन्हीं हमलों में ज़मीदोज़ हो गई…. लाशों के ढेर पर किस लोकतंत्र को बसाने की बात करते हैं लोकतंत्र का चोला ओढ़े तानाशाह. कभी लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले सदनों में विकास, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ, किसानों और विज्ञान की बात होती थी आज बात चेहरों को चमकाने की होती है. खुद को दूसरे से बेहतर साबित करने की होती है…
ज़मी से लेकर आसमां तक, हवा से लेकर पानी तक और जानवरों से लेकर इंसानों तक ज़हर ही ज़हर फ़ैला नज़र आता है. होड़ इस बात की है कि दुनिया को झुकाना है अपना वर्चस्व बढ़ाना है. धर्म को धारण करने और आपसी भाईचारे की बातें महज़ इतिहास का हिस्सा हो चुकी हैं… गाने के बोल सहसा दिल-ओ-दिमाग पर गूंजने लगते हैं, देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान.
मौजूदा स्थिति क्या है?
हालात बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण हो चले हैं मिडिल ईस्ट के. हालांकि इज़रायल-ईरान-अमेरिका के बीच का टकराव अभी सीधे युद्ध में नहीं बदला है लेकिन लगातार चल रहे टकराव ने मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है. तनाव कई स्तरों पर है. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक हर स्तर पर मामला संगीन हो चला है. इज़रायल लगातार ईरान समर्थित ठिकानों और सैन्य ढांचे पर प्रहार कर रहा है वहीं ईरान प्रॉक्सी वॉर का तरीका अपना रहा है. अमेरिका इज़रायल की हर संभव मदद कर रहा है और मिडिल ईस्ट के इलाकों में अपनी सैन्य मौजूदगी को बढ़ा रहा है जिससे हालात और गंभीर होते जा रहे हैं.
टकराव की मुख्य वजहें
ईरान के परमाणु कार्यक्रमों ने इज़रायल और अमेरिका दोनों की चिंता बढ़ा दी है. इज़रायल इसे अपने अस्तित्व के लिए एक बड़ा ख़तरा बता रहा है. अमेरिका इज़रायल के समर्थन में है और वह भी ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाना चाहता है. वहीं ईरान ने जिस तरह से पलटवार किया है और अमेरिका और इज़रायल को सबक सिखाने की बात कर रहा है उससे यह साफ हो चला है कि ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है. ईरान के ज़बरदस्त अटैक ने अमेरिका और इज़रायल को हिला कर रख दिया. इतना ही नहीं जिन देशों में अमेरिका ने अपने बेस बना रखे थे उनपर सीधे अटैक कर दिया. शायद इसकी उम्मीद न तो अमेरिका को थी और न ही सहयोगी देशों को.
ईरान की रणनीति है प्रॉक्सी वॉर
ईरान भी सीधे युद्ध में नहीं उतर रहा है बल्कि वो इस टकराव में कई संगठनों के जरिए लड़ रहा है. लेबनान में हिज़्बुल्लाह, गाज़ा में हमास और यमन में हूती संगठन उसकी मज़बूती की वजह हैं. यही वज़ह है कि इज़रायल इन संगठनों को निशाना बना रहा है जिससे टकराव बढ़ता जा रहा है. हालिया सैन्य घटनाएं बता रही हैं कि मामला बेहत चिंताजनक है. कई बार स्थिति सीधे टकराव तक पहुंच गई. सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले विमान धराशाई हो गए, करोड़ों खर्च करके तैयार किए गए डिफेंस सिस्टम भी नेस्तनाबूत होने की ख़बरें सामने आईं. हालांकि अभी तक की स्थिति लो इंटेन्सिटी कनफ्लिक्ट की बनी हुई है लेकिन हालात बेहद संवेदनशील हैं. अगर बड़े स्तर पर सीधा हमला हुआ तो फुल-स्केल वॉर की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता और अगर युद्ध हुआ तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर नज़र आएगा.
दुनिया पर असर
हालिया टकरवा में मिडिल ईस्ट पर असर पड़ता दिखा है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया, ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है और क़रीबी देशों की बात की जाए तो भारत जैसे देशों पर भी आर्थिक असर पड़ता नज़र आया है. फिलहाल हालात ख़तरनाक स्तर पर हैं देखना होगा कि टकराव कब तक चलता है हालांकि कूटनीति के ज़रिए इसे शांत करने की कोशिशें जारी हैं. 29 मार्च 2026 को चार फॉरेन मिनिस्टर्स ने एक पहल की. इनमें चार देशों पाकिस्तान, टर्की, इजिप्ट और सऊदी अरब के फॉरेन मिनिस्टर्स शामिल थे. दो दिन इनके बीच में चर्चा हुई जिसमें ईरान और अमेरिका सीधे एक-दूसरे से संवाद करके कोई रास्ता निकालें इससे पहले की टकराव युद्ध में बदले. अब सवाल ये है कि ये चार देश क्यों, यूनाइटेड नेशन्स कहां हैं, यूरोप कहां है या अमेरिका खुद क्यों नहीं सीधे संवाद की स्थिति में है. क्या दुनिया के हालात इतने बदल चुके हैं कि आज कोई मीडिएटर ही नहीं बचा है जो ऐसे हालातों में स्थिति को संभाल सके, क्या ऐसी संस्थाएं महज़ बिना नाखूनों और दातों वाला शेर बनकर रह गई हैं जिन्हे दो विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शान्ति और समानता बनाए रखने के लिए बनाया गया था. अगर ऐसा है तो यह स्थिति भयावह है. क्या तनाशाहों का किंग लाइक बिहेवियर दुनिया को अस्थिर बना रहा है. बेहद चिंता का विषय है.