पीएम मोदी: “नारी शक्ति वंदन 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय, विपक्ष अब बहानेबाजी कर रहा है।”

850 सीटों का प्रस्ताव, उत्तर-दक्षिण संतुलन पर बहस, 2029 में 33% महिला सांसद-विधायक सुनिश्चित

नई दिल्ली – गुरूवार का दिन सदन के ऐतिहासिक दिनों में से एक रहा. महिलाओं की राजनीति में भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. विपक्ष महिला आरक्षण को लेकर सहज दिखा लेकिन परिसीमन को लेकर उसने आपत्ति जाहिर की, साथ ही विधेयक में अल्पसंख्य महिलाओं की उपेक्षा करने का आरोप सरकार पर लगाया. हालांकि विपक्ष की आपत्तियों के बीच विधेयक पास हो ही जाएगा. चलिए आज के दिन लोकसभा में क्या क्या हुआ शुरू से बताते हैं.

सर्वप्रथम सरकार ने तीन विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा जिनमें संविधान(131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए सक्षम विधेयक शामिल रहे. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में तीनों विधेयक पेश किए. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अमल में लाने की हो रही है. इस विधेयक के तहत लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की बात सदन के पटल पर रखी गई है. सरकार इस विधेयक को आधी आबादी को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने सदन में कहा कि “हम सब भाग्यशाली हैं कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में भागीदारी मिल रही है। जिन लोगों ने महिलाओं को अधिकार देने का विरोध किया, वे चुनाव में हारे हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि यह संविधान की भावना के अनुरूप है और महिलाओं को लंबे समय से इसका इंतजार था। पीएम ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि 2023 में बिल सर्वसम्मति से पास हुआ था लेकिन जब लागू करने का समय आया तो बहानेबाजी हो रही है.

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि तीनों बिल साथ आने थे और सदन की सहमति से तीनों विधेयक पास 2023 में पास हुए थे लेकिन अब विपक्ष इसका विरोध कर रहा है क्योंकि चुनाव करीब हैं.

सरकार का तर्क है कि 1976 के बाद जनसंख्या में आये भारी बदलाव के चलते ही लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव लाया गया है. आरक्षम लागू करने में राज्य की सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, सीटें कम नहीं होंगी और महिलाओं को रोटेशन के आधार पर आरक्षित सीटें मिलें सकेंगी. परिसीमन 2026 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव में यह प्रभावी हो. सरकार ने विपक्षी राज्यों को लेकर जताई जा रही चिंता पर कहा कि इस आरक्षण से दक्षिण सभी दक्षिण राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा क्योंकि आनुपातिक रूप से सीटों का विस्तार होगा.

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