ईरान-अमेरिका सीजफायर विस्तार पर पाकिस्तान-तुर्की मध्यस्थता तेज, परमाणु और होर्मुज पर गतिरोध बरकरार

मिडिल ईस्ट में फिलहाल शांति है लेकिन इस शांति की डेडलाइन 21 अप्रैल तक ही है. ऐसे में दुनिया की निगाह इस बात पर टिकी है कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी या नहीं. अगर पहुंचती है तो राहत की बात लेकिन शर्तों पर बात नहीं बनी तो दुनिया क्या एक और विश्व युद्ध झेलने के लिए तैयार है. अमेरिका की तानाशाही जिस तरह की है उसका समर्थन शायद ही कोई देश करे सिवाय उसके सहयोगी देशों के हालांकि 70 से ज्यादा देशों और नाटो में शामिल कई देशों ने कई मुद्दों पर अमेरिका से पल्ला झाड़ लिया. अमेरिका के लिए भी यह टकराव उसके गले की हड्डी बना हुआ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विरोधाभासी बयानबाजी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. एक तरफ वह शांति की बात करते हैं तो दूसरी ओर सैन्य दबाव बनाए रखना चाहते हैं.
एक तरफ वार्ता जारी है तो दूसरी तरफ ट्रंप का कोई न कोई बयान मामले को फिर गर्मा देता है. ट्रंप कहते नज़र आ रहे हैं कि डील करो, नहीं तो फिर से बमबारी के लिए तैयार रहो. मतलब साफ है कि ट्रंप अब ईरान से आर-पार के मूड में हैं. अगर सीज़फायर तक डील नहीं हुई तो हमले दोबारा शुरू हो जाएंगे. ऐसे में टकराव बड़े युद्ध की तरफ बढ़ सकता है.
दरअसल एअर फोर्स वन पर पत्रकारों से हुई कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि शायद मैं इसे एक्सटेंड न करूं. अगर ऐसा हुआ तो ब्लॉकेड जारी रहेगा और हमें फिर से बम गिराने पड़ सकते हैं. दूसरी ओर ईरान ने कहा कि उसे अमेरिका पर भरोसा कम है.
हालिया ख़बरों में सामने आया है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में एक नई बातचीत शुरू कर सकते हैं हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन संकेत मिल रहे हैं जल्द ही दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में लगे हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक सोमवार को इस्लामाबाद में मुलाकात हो सकती है. रविवार तक दोनों देशों के नेता पाकिस्तान पहुंचेंगे. आपको बता दें कि पिछले दौर की बातचीत बेनतीज़ा खत्म हो गई थी. ऐसे में इस वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है.
अब देखना होगा कि क्या 21 तारीख दुनिया के लिए शुभ संकेत लेकर आएगी या फिर यह तारीख इतिहास में एक और युद्ध की तरफ धकेल देगी.