बुंदेलखंड क्रेटॉन की खनिज संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श, संभावित भंडारों की पहचान पर जोर

एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, उन्नत तकनीक से छिपे खनिज भंडारों की पहचान की तलाशी संभावना

लखनऊ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के उत्तरी क्षेत्र लखनऊ में बुंदेलखंड क्रेटॉन की खनिज संभावनाएं महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष ध्यान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जीएसआई के महानिदेशक असित साहा वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस अवसर पर जोयेश बागची, रजिन्द्र कुमार सहित विभिन्न हितधारकों, नीति-निर्माताओं, आईआईटी/विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।

कार्यशाला बुंदेलखंड क्रेटॉन की खनिज संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनी। इसमें देश की भविष्य की संसाधन सुरक्षा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। विशेषज्ञों ने क्रेटॉन के टेक्टोनिक विकास, भू-वैज्ञानिक संरचना और धात्विक संभावनाओं पर गहन चर्चा करते हुए इसे खनिज अन्वेषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

इस खास मौके पर असित साहा ने बुंदेलखंड क्रेटॉन को महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए एक प्रमुख क्षेत्र बताते हुए इसकी अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के महत्व को रेखांकित करते हुए आइसोटोपिक और उच्च-सटीक विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग से संभावित भंडारों की पहचान को तेज करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने जीएसआई और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए एक दूरदर्शी रणनीति विकसित करने की आवश्यकता बताई।

जोयेश बागची ने अपने संबोधन में कहा कि बुंदेलखंड क्रेटॉन भू-वैज्ञानिक दृष्टि से जटिल होने के बावजूद अत्यंत संभावनाशील क्षेत्र है। उन्होंने इसे दुर्लभ मृदा तत्व (REE) खनिजों के लिए समृद्ध बताते हुए वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित अन्वेषण पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया, ताकि क्षेत्र की पूर्ण खनिज क्षमता को सामने लाया जा सके।

वहीं रजिन्द्र कुमार ने जीएसआई के उत्तरी क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 32 भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट, 19 भू-वैज्ञानिक ज्ञापन और 5 एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ब्लॉक्स नीलामी के लिए सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने वैनाडियम, आयरन, जिरकोनियम, पोटाश, लिथियम और बेस मेटल्स जैसे प्रमुख खनिजों की खोज में हुई प्रगति की जानकारी दी। साथ ही, क्षेत्र में जारी भू-मानचित्रण, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और भू-रासायनिक जांच गतिविधियों का भी उल्लेख किया। कार्यशाला के दौरान विभिन्न प्रकाशनों, जिनमें कार्यशाला का सार-संग्रह और Miscellaneous Publication No. 30 (हिमाचल प्रदेश की भू-वैज्ञानिक संरचना एवं खनिज संभावनाओं पर आधारित) शामिल हैं, का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्रों में बुंदेलखंड क्रेटॉन के टेक्टोनिक विकास, धात्विक ढांचे और खनिज प्रणालियों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि संरचनात्मक, भू-रासायनिक और भू-भौतिकीय आंकड़ों के समेकन से अन्वेषण रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे छिपे खनिज भंडारों की पहचान संभव होगी।

जीएसआई के बारे में

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना वर्ष 1851 में मुख्य रूप से रेलवे के लिए कोयला भंडारों की खोज हेतु की गई थी। समय के साथ यह देश में भू-विज्ञान संबंधी जानकारी का प्रमुख स्रोत बन गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित भू-वैज्ञानिक संगठन के रूप में स्थापित हुआ है।

जीएसआई का मुख्य कार्य राष्ट्रीय भू-विज्ञान डेटा का निर्माण और अद्यतन करना तथा खनिज संसाधनों का आकलन करना है। यह कार्य भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, वायवीय और समुद्री सर्वेक्षण, खनिज अन्वेषण, बहु-विषयक अध्ययन और प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण के माध्यम से किया जाता है।

कोलकाता मुख्यालय के साथ जीएसआई के छह क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद, शिलांग और कोलकाता स्थित हैं और यह भारत सरकार के खान मंत्रालय के अधीन एक संबद्ध कार्यालय है।

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