लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में देख सकेंगे 100 वर्ष पुराने पेड़ों की पूरी कुंडली

100 वर्ष व अधिक उम्र पार कर चुके पेड़ों की रिसर्च करने के निर्देश, प्रजाति एवंं लोकेशन का तैयार होगा कैटेलॉग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 100 साल की उम्र पार कर चुके हेरिटेज पेड़ों की मैपिंग होगी। इसके अंतर्गत पेड़ों की प्रजाति व लोकेशन के साथ ही एक पूरा कैटलॉग तैयार होगा। जिसे लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में प्रदर्शित किया जाएगा। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बुधवार को वर्ल्ड अर्थ-डे पर इस बाबत आदेश जारी किये हैं।

एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि कैंट स्थित दिलकुशा गार्डेन में बरगद का एक पुराना पेड़ है। लोगों की मान्यता है यह पेड़ लगभग 400 वर्ष पुराना है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार केशव वर्मा ने इस पेड़ का मुआयना किया। पेड़ के चारों तरफ आरसीसी का चबूतरा बना था। उन्होंने बताया कि पेड़ों की विभिन्न प्रजातियों में एक उम्र के बाद टाइलोसिस की प्रक्रिया होती है, जिससे पेड़ का तना अंदर से खोखला होने लगता है।

कैम्बियम में टाइलोसिस उत्पन्न होने से तने के मध्य भाग में भोजन/पोषक तत्व जाना अवरुद्ध हो जाता है। ऐसी परिस्थिति आने पर पेड़ अपनी बाहरी सतह से आवश्यक पोषक तत्व खींचकर पनपता है। लेकिन, लोग पेड़ों के चारों तरफ आरसीसी के चबूतरे बना देते हैं। जिससे पेड़ अपनी बाहरी सतह से पोषक तत्व नहीं ले पाता है और धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। उन्होंने सलाह दी कि लोगों को इस तरह के पुराने पेड़ों के संरक्षण को लेकर जागरूक किया जाए।

हरित विरासत को मिलेगी पहचान

इसे ध्यान में रखते हुए अब लखनऊ के हेरिटेज पेड़ों की मैपिंग का कार्य कराया जाएगा। पेड़ कहां है, किस प्रजाति का है, कितना पुराना है, उसका क्या इतिहास है, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। लोग पेड़ों की तस्वीर के साथ उसका पूरा ब्योरा लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में देख सकेंगे। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इससे न सिर्फ लोग शहर की इन हरित विरासत की पहचान कर सकेंगे, बल्कि पेड़ों के संरक्षण को भी बल मिलेगा।

एनबीआरआई के सहयोग से रिसर्च

एलडीए उपाध्यक्ष ने लखनऊ म्यूजियम की क्यूरेशन टीम, प्राधिकरण के उद्यान अनुभाग एवं प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल को शहर में 100 वर्ष व उससे अधिक उम्र पार कर चुके पेड़ों के बारे में रिसर्च करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि एनबीआरआई से सहयोग लेकर यह रिसर्च पूरा किया जाएगा। यह अपने आप में एक अनूठी पहल होगी।

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