119 में से 93 पार्षदों ने सर्वसम्मति से पारित किया निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस-सपा को

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026: लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) के गिरने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे को अब शहरी स्थानीय निकायों तक ले जाने की भाजपा की रणनीति के तहत आज लखनऊ नगर निगम की विशेष सदन बैठक में भारी हंगामा हुआ। बैठक में भाजपा ने सपा और कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया, जबकि विपक्षी पार्षदों ने इसे “अवैध” बताते हुए जमकर विरोध किया।
महापौर सुषमा खर्कवाल की अध्यक्षता में बुलाई गई इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा लोकसभा में बिल गिरने पर विपक्षी दलों की भूमिका की निंदा करना था। बैठक शुरू होते ही सपा और कांग्रेस के पार्षदों ने महापौर को बोलने नहीं दिया और नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक का एजेंडा पहले से साफ नहीं बताया गया था और यह “राजनीतिक साजिश” है।
पक्ष-विपक्ष तकरार
विपक्षी पार्षदों ने महापौर को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन असल में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पर हमला कर रही है। एक महिला पार्षद ने हाथ में प्लेकार्ड उठाते हुए नारा लगाया – “कांग्रेस की आदत पुरानी, नारी सम्मान की झूठी कहानी”। वहीं भाजपा पार्षदों ने भी जोरदार जवाबी नारेबाजी की और विपक्ष पर “महिलाओं के अधिकार छीनने” का आरोप लगाया।
भाजपा ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि लोकसभा में बिल गिराने वाले दलों को अब शहरी निकायों के स्तर पर भी जवाब दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भर के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में इसी तरह के निंदा प्रस्ताव पारित कराए जाने की बड़ी योजना तैयार की गई है। इसका मकसद विपक्ष को घेरना और शहरी मतदाताओं तक “महिलाओं के साथ धोखा” का संदेश पहुंचाना है।बैठक के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। अंततः भाजपा बहुमत के आधार पर निंदा प्रस्ताव पारित कराने में सफल रही।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा, “महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। विपक्ष ने आधी आबादी के अधिकारों पर हमला किया है, इसलिए उनकी निंदा जरूरी है।” इस घटना से उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण को लेकर सियासी जंग और तेज हो गई है।
भाजपा इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है, जबकि सपा-कांग्रेस इसे “BJP की साजिश” बता रही हैं। आने वाले दिनों में अन्य नगर निगमों में भी ऐसे प्रस्ताव आने की संभावना है, जो 2026 के नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। महिला आरक्षण बिल पर अब सड़क से सदन तक बहस जारी है। क्या यह मुद्दा आगामी चुनावों में निर्णायक साबित होगा? यह देखना दिलचस्प होगा।