4 मई, बंगाल में सरकार नई! क्या कहता है बंगाल का सियासी दंगल ?

37 सीटें बदल देंगी सियासी गलियारों का गणित, 1977 से ‘बेलवेदर सीटें’ बनी हैं सत्ता की सीढ़ियां

नई दिल्ली। साल 2026 में हुए पांच राज्यों के चुनावी नतीज़ों का इंतज़ार हर किसी को है जिसमें देश की नज़र पश्चिम बंगाल के नतीज़ों पर टिकी हैं. जहां बीजेपी इस बार एंटी इनकंबेंसी बताकर नतीज़े अपने पक्ष में आने की बात कह रही है तो वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जीत का दावा कर रही हैं. जहां बीजेपी विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों को जीत की वजह बता रही है वहीं टीएमसी बंगाल की बेटी जैसे भावनात्मक मुद्दों का हवाला दे रही है. ऐसे में किसी भी राजनीतिक विश्लेषक के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा सीटों का सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है.

अगर टीएमसी जीत हासिल करती है तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता पर कायम होंगी और अगर जीत बीजेपी का हाथ लगती है तो यह उसके लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा और पहली बार पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की इसे बड़ी जीत माना जाएगा.

हालांकि कुछ चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि 37 सीटें महत्वपूर्ण हैं जो पूरे चुनावी गणित को पलट सकती हैं. इन सीटों को ‘बेलवेदर सीट्स’ कहा जा रहा है. खास बात यह है कि 1977 से लेकर अबतक जिस दल ने इन सीटों में से ज्यादा सीटें हासिल की हैं सत्ता पर वही दल काबिज हो पाया है. इन सीटों का इतिहास अबतक सटीक साबित हुआ है. ऐसे में ‘बेलवेदर सीट्स’ ही सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता तय करेगा ऐसे में सबकी नज़र इन्ही सीटों पर टिकी हैं.

अब देखना है किसके मुद्दे दल के लिए बूस्टर डोज़ का काम करेंगे. जहां TMC ने इस बार सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। ममता बनर्जी ने पूरे चुनाव अभियान में बंगाली अस्मिता, केंद्र सरकार की नीतियों और विकास के मुद्दों को उठाया। वहीं भाजपा ने भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और पलायन जैसे मुद्दों पर जोर दिया। भाजपा का दावा है कि इस बार बंगाल में वह पहली बार अपना मुख्यमंत्री देने जा रही है.

फिलहाल 4 मई को मतगणना के दिन बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. या तो इतिहास खुद को दोहराएगा या नया इतिहास पन्नों में दर्ज़ हो जाएगा.

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