AC की आग ने लील ली 9 ज़िंदगियां, किसकी सह पर की जाती है सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी!

9 लाशें बरामद (1 पहली मंजिल, 5 दूसरी, 3 सीढ़ी), शाहदारा DCP राजेंद्र प्रसाद मीणा। FIR दर्ज, कारण की जांच जा

भीषण आग ने छीन ली 9 जिंदगियां

नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में एसी चलाना आज आम हो गया है लेकिन एक के बाद एक हादसे इस बात का अहसास करा रहे हैं कि किसी इलेक्ट्रॉनिक चीज़ के इस्तेमाल से पहले उसके कुछ नकारात्मक पहलुओं पर अमल कर लिया जाए तो अपने और अपने परिवार सुरक्षा के लिए हम तैयार रहते हैं. दिल्ली के विवेक विहार फेज-1 में 3 मई 2026 की सुबह चार मंजिला इमारत में लगी आग ने लोगों में दहशत पैदा कर दी. आग इतनी विकराल थी कि इसमें 9 लोगों की मौत हो गई जिसमें 1 साल का मासूम भी शामिल था.

जानकारी के मुताबिक इस चार मंजिला इमारत में आग 3.30 के करीब शुरू हुई और देखते ही देखते इसने दूसरी तीसरी और चौथी मंजिल को भी अपनी चपेट में ले लिया. मृतकों में पांच शव दूसरी मंजिल से तीन शव सीढ़ियों से (बंद थीं) और एक पहली मंजिल से बरामद हुआ है.

पीड़ित परिवार और शिकार

दूसरी मंजिल पर रहने वाले जैन परिवार के 5 सदस्यों की जान चली गई — अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी अनीता जैन (58), बेटा निशांत जैन (35), बहू अंचल जैन (33) और पोता आकाश जैन (1)। तीसरी मंजिल पर नितिन जैन (50), उनकी पत्नी शैली जैन (48) और बेटा सम्यक जैन (25) की मौत हो गई। पहली मंजिल पर शिखा जैन (45) की लाश मिली, जबकि उनके पति नवीन जैन घायल हुए।

आग का कारण और इमारत की लापरवाही

आग लगने की वजह एसी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है हालंकि इसे अभी संदेह के तौर पर देखा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक आग पीछे की तरफ लगी और तेज़ी से फैलने लगी. इमारत में केवल एक सीढ़ी है जिसमें कोई इमरजेंसी एक्जिट नहीं है. बालकनी पर आयरन ग्रिल लगे थे और टेरेस का दरवाज़ा लॉक था जिससे जो जहां था वहां फंस कर रह गया. धुंए और घुटन की वजह से भी कई लोगों की जानें गईं। मौके पर 14 फायर टेंडर पहुंचे जिन्होंने 10 से 15 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया और दो घायलों को अस्पताल पहुंचाया. आग का फैलाव इतना ज्यादा था कि इसने पड़ोस की इमारतों को कुछ नुकसान पहुंचाया. पड़ोस की इमारतों के बीच कोई गैप न होने के चलते हादसे की संभावना और ज्यादा रहती है.

गहरे उठते सवाल, जांच का दायरा

बिल्डर्स का पैंसों के लालच में बिना सेफ्टी और फायर नॉर्म्स की लापरवाही को देखने वाला विभाग अक्सर सोया क्यों रहता है. कई इमारतों में सीढ़ियां, ब्लॉक, टेरेस लॉक और ग्रिल लगे होने जैसे मुद्दे आम हो चले हैं. गर्मी के मौसम में आग लगना आम बात है लेकिन किसी बिल्डर के सोसाएटी को डेवलप करने का मौसम हमेसा बहार लिये रहता है. हो सकता है वक्त के साथ इस हादसे को भुला दिया जाएगा लेकिन क्या अपनों को खो चुके परिवारों को उनके अपने वापस किये जा सकेंगे. क्या वजह है जो इतनी महंगी सोसाएटी में रहने के बावजूद आंख बंद करके सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी की जाती है. इसके जिम्मेदार लोगों को कब इनके किए की सज़ा मिलेगी या फिर यूं ही बिल्डर्स और विभाग की सांठ-गांठ लोगों की लाशों पर इमारतें खड़ी कर पैसा कमाते रहेंगे. यह त्रासदी सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा लगती है। दिल्ली जैसे घने शहर में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं.

इस घटना को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संवेदना और प्रार्थना पर जोर दिया है। अभी तक उन्होंने कोई और विस्तृत टिप्पणी या मौके पर जाने का ऐलान नहीं किया है।

वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है.

अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मुख्य रूप से दिल्ली CM और LG की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *