बिहार में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज

नई दिल्ली/अमर भारती। बिहार की राजनीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को एक बार फिर Z श्रेणी की सुरक्षा मिलने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार ने दोनों वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद उन्हें दोबारा Z श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। हालांकि शुक्रवार देर रात तक गृह विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। आदेश जारी होने के बाद ही नई सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी होगी।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब एक महीने पहले ही राज्य सरकार ने दोनों नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव करते हुए Z Plus सुरक्षा वापस ले ली थी। अब सुरक्षा बहाल किए जाने की खबर ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
राजद नेताओं ने कहा— मीडिया से मिली जानकारी
राष्ट्रीय जनता दल के कई नेताओं का कहना है कि उन्हें भी सुरक्षा बहाल किए जाने की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक बिहार गृह विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव नहीं माना जा सकता।
राजद का कहना है कि औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही सुरक्षा एजेंसियां नई व्यवस्था लागू करेंगी।
एक महीने पहले घटाई गई थी सुरक्षा
गौरतलब है कि 4 जून को बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की Z Plus सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया था। उस समय गृह विभाग ने सुरक्षा समीक्षा के आधार पर उनकी सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया था।
हालांकि सुरक्षा में कटौती के बावजूद दोनों नेताओं के सरकारी आवास पर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) के जवानों की तैनाती जारी रखी गई थी। इसके अलावा उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी उपलब्ध थी।
इसके बावजूद लालू परिवार ने सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए सरकारी सुरक्षा स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इस कदम के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
सुरक्षा कटौती पर विपक्ष ने उठाए थे सवाल
Z Plus सुरक्षा हटाए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने राज्य सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।
राजद नेताओं का कहना था कि सुरक्षा में कमी का फैसला राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से लिया गया है। इसके विरोध में लालू परिवार ने सरकारी सुरक्षा कर्मियों को वापस भेज दिया था।
इसके बाद पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी राजद कार्यकर्ताओं ने स्वयं संभाल ली थी। पार्टी कार्यकर्ता अलग-अलग शिफ्टों में आवास के बाहर तैनात रहे और सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभालते रहे।
सरकारी सुरक्षा के बिना सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचे थे नेता
सुरक्षा वापस करने के बाद कई मौकों पर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सार्वजनिक कार्यक्रमों में बिना सरकारी सुरक्षा के पहुंचे थे।
इस दौरान विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही उचित नहीं है।
राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर भी देखा गया।
निजी आवास में शिफ्ट होने के बाद फिर बढ़ी चर्चा
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना स्थित सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड छोड़कर कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी आवास में रहने का फैसला किया है।
इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि सरकार सुरक्षा व्यवस्था की नई समीक्षा कर सकती है। अब Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल होने की खबर को उनके नए आवास और सुरक्षा व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि सुरक्षा बहाल करने का निर्णय किन कारणों और किस खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया है।
क्या होती है Z श्रेणी की सुरक्षा?
भारत में विशिष्ट व्यक्तियों को संभावित सुरक्षा खतरे के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों की सुरक्षा प्रदान की जाती है। इनमें X, Y, Y Plus, Z और Z Plus जैसी श्रेणियां शामिल हैं।
Z श्रेणी की सुरक्षा में आमतौर पर 20 से 25 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होते हैं—
- सशस्त्र कमांडो
- पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO)
- एस्कॉर्ट वाहन
- आवास की सुरक्षा
- यात्रा के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंध
- आवश्यकता के अनुसार स्थानीय पुलिस का सहयोग
सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर खतरे के आकलन (Threat Assessment) के आधार पर इन श्रेणियों की समीक्षा करती हैं और उसी के अनुसार सुरक्षा बढ़ाने या घटाने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार की राजनीति में फैसले के कई मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा बहाल करने का निर्णय बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।
एक ओर यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन का परिणाम हो सकता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इसे लेकर नई राजनीतिक बहस भी छिड़ सकती है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी भी राजनीतिक कारण की पुष्टि नहीं की गई है।
गृह विभाग की अधिसूचना पर टिकी निगाहें
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार गृह विभाग आधिकारिक आदेश कब जारी करेगा। अधिसूचना जारी होने के बाद ही दोनों नेताओं को दोबारा Z श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
सुरक्षा एजेंसियां आदेश मिलने के बाद नई तैनाती, सुरक्षा घेरा और आवश्यक व्यवस्थाएं लागू करेंगी।
राजनीतिक हलचल बढ़ी
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को एक बार फिर Z श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की तैयारी ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक महीने पहले सुरक्षा में कटौती और उसके बाद राजनीतिक विवाद के बीच अब सुरक्षा बहाल होने की खबर कई सवाल भी खड़े कर रही है। हालांकि अंतिम स्थिति बिहार गृह विभाग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। तब तक राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों की नजर इस फैसले पर बनी रहेगी। (Amar Bharti)
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