FCRA Bill 2026: दूतावास- “विदेशी फंड का नियमन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है”

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली: FCRA Bill 2026 पर संसद और राजनीतिक गलियारों में जारी चर्चा के बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को एक विस्तृत पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि भारत के एक सांसद के रूप में वह यह अपना दायित्व समझते हैं कि FCRA Bill 2026 को लेकर उठाई गई आशंकाओं और चिंताओं को स्पष्ट किया जाए।
सुजीत कुमार ने अपने पत्र में कहा कि रिले मूर द्वारा FCRA Bill 2026 के संबंध में दिए गए बयान “मिसगाइडेड” हैं। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य के रूप में दिया गया ऐसा बयान भारत और अमेरिका दोनों देशों के हित में नहीं है। पत्र में यह भी कहा गया कि भारतीय ईसाइयों के हितों की बात करते हुए उठाई गई चिंताएं भी तथ्यों के अनुरूप नहीं हैं।
रिले मूर को लिखे पत्र में क्या कहा गया?
राज्यसभा सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि FCRA Bill 2026 को लेकर की जा रही आलोचना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाती। उन्होंने कहा कि भारतीय ईसाइयों के नाम पर उठाई जा रही आशंकाएं उचित नहीं हैं।
सुजीत कुमार के अनुसार, विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को लेकर भारत की अपनी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और नियमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने रिले मूर से आग्रह किया कि वे इस विषय को व्यापक संदर्भ में देखें और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं।
भारतीय दूतावास ने गलतफहमियों का किया उल्लेख
FCRA Bill 2026 को लेकर भारतीय दूतावास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास के अनुसार, इस कानून को लेकर मीडिया और नागरिक समाज के कुछ वर्गों में कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं।
दूतावास का कहना है कि विदेशी फंड के नियमन का विषय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। साथ ही यह भी कहा गया कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में विदेशी धन और उसके उपयोग को लेकर नियम और कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
दूतावास ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत विदेशी योगदान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का स्वागत करता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन आवश्यक है।
संपत्ति जब्ती संबंधी दावों पर दूतावास की सफाई
FCRA Bill 2026 पर बहस के दौरान कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि विदेशी चंदे पर निर्भर गैर-सरकारी संगठनों (NGO), धार्मिक चैरिटी संस्थाओं, पूजा स्थलों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य धर्मार्थ संस्थानों की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं।

हालांकि भारतीय दूतावास ने इन दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। दूतावास ने यह भी दोहराया कि भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके उपयोग के लिए पहले से कानूनी व्यवस्था मौजूद है।
दूतावास के मुताबिक, विदेशी योगदान लेना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों और कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।
कांग्रेस ने FCRA Bill 2026 का किया विरोध
जहां एक ओर सरकार और उसके समर्थक FCRA Bill 2026 को आवश्यक नियामक कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस विधेयक का विरोध कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि FCRA Bill 2026 के नए प्रावधानों का असर विशेष रूप से दूर-दराज, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत ईसाई संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों पर पड़ सकता है। पार्टी ने इस विधेयक को ईसाई विरोधी बताते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
कांग्रेस का मानना है कि नए नियमों से ऐसे संस्थानों के संचालन और विदेशी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद लगातार बने हुए हैं।
FCRA Bill 2026 पर बढ़ी राजनीतिक बहस
FCRA Bill 2026 को लेकर अब बहस केवल संसद तक सीमित नहीं रह गई है। भारतीय सांसद और अमेरिकी सांसद के बीच पत्राचार ने इस विषय को नई चर्चा का केंद्र बना दिया है। एक तरफ सरकार और भारतीय दूतावास इस कानून को राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है।
आने वाले समय में FCRA Bill 2026 को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है।
आगे की राह
FCRA Bill 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को पत्र लिखकर उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। वहीं भारतीय दूतावास ने भी कानून को लेकर फैल रही गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की है। दूसरी ओर कांग्रेस इस विधेयक का विरोध जारी रखे हुए है। फिलहाल यह मुद्दा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। (Amar Bharti)
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