सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में हैं अभिषेक बनर्जी?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी। अदालत ने अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा को मंजूरी देते हुए उन्हें सितंबर में तीन सप्ताह तक विदेश में चिकित्सा उपचार कराने की इजाजत दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस अनुमति के साथ कई शर्तें भी तय की हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम Court के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। जहां अदालत ने व्यक्ति के इलाज और विदेश यात्रा के अधिकार को महत्व दिया, वहीं भाजपा नेताओं ने इस फैसले को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं।
अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति को विदेश यात्रा करने का अधिकार है और उसे अपना चिकित्सा उपचार चुनने की स्वतंत्रता भी प्राप्त है। अदालत ने कहा कि यह तय करना किसी और का काम नहीं है कि कोई व्यक्ति अपना इलाज कहां कराए।
इसी आधार पर कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा को मंजूरी देते हुए उन्हें सितंबर महीने में तीन सप्ताह तक विदेश में इलाज कराने की अनुमति प्रदान की। यह अनुमति उनकी आंखों के उपचार के लिए दी गई है।
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान उनकी आंख में चोट लगी थी। उसी चोट के इलाज के लिए उन्होंने विदेश जाने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने किन शर्तों के साथ दी अनुमति?
हालांकि अदालत ने राहत दी है, लेकिन अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा पर कुछ स्पष्ट शर्तें भी लगाई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे अपनी पूरी यात्रा का कार्यक्रम संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें।
इसके अलावा उन्हें अपनी उड़ानों का विवरण, विदेश में ठहरने का स्थान और उपचार करने वाले डॉक्टरों व अस्पताल की पूरी जानकारी भी देनी होगी। अदालत ने कहा कि यात्रा और उपचार से जुड़ी सभी जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कोर्ट की ओर से लगाई गई ये शर्तें पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से तय की गई हैं।
किस मामले की वजह से चर्चा में हैं अभिषेक बनर्जी?
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर धमकाने वाले बयान देने से जुड़ा एक पुलिस मामला दर्ज है।
इसी पृष्ठभूमि में अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा का मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केवल चिकित्सा उपचार और व्यक्तिगत अधिकारों को आधार बनाया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार उपचार चुनने का अधिकार है और उसे केवल इस आधार पर रोका नहीं जा सकता।
बीजेपी नेताओं ने फैसले पर क्या सवाल उठाए?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पश्चिम बंगाल की मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया कि लोकसभा सांसद अपनी चिकित्सा स्थिति का उपयोग देश छोड़ने के बहाने के रूप में कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी को इलाज की आवश्यकता है तो पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में भी उनके लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के अस्पतालों में लाखों लोगों का इलाज होता है।
अग्निमित्रा पॉल ने आशंका जताई कि यह देश से बाहर जाने की एक योजना हो सकती है। उनके बयान के बाद अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा का मुद्दा और अधिक राजनीतिक हो गया।
डिप्लोमैटिक पासपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता भारतीय कानून से बचने के लिए अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट का दुरुपयोग कर सकते हैं।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे विदेश जाने के लिए बेताब हैं क्योंकि वे भागना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे देश पहुंच जाता है, जिसके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है, तो उसे वापस लाना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि ये सभी आरोप और दावे राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के रूप में सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ऐसी किसी आशंका का उल्लेख नहीं किया गया है।
फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा का मुद्दा कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है। एक ओर अदालत ने व्यक्ति की स्वतंत्रता और चिकित्सा उपचार के अधिकार को महत्व दिया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के कारण यह मामला केवल एक चिकित्सा यात्रा तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसे लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
अदालत के आदेश के बाद आगे क्या?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा को मंजूरी देते हुए तीन सप्ताह तक विदेश में इलाज कराने की अनुमति दी है। साथ ही यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध कराने की शर्त भी लगाई है।
अब अभिषेक बनर्जी सितंबर में अपने आंखों के उपचार के लिए विदेश जा सकेंगे। वहीं अदालत के इस आदेश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों कारणों से चर्चा में बना रह सकता है।
फैसले के बाद आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति को विदेश यात्रा और अपनी पसंद के चिकित्सा उपचार का अधिकार है। हालांकि अदालत ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई शर्तें भी लगाई हैं। दूसरी ओर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने इस मामले को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। (Amar Bharti)
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