Ladakh Water Conservation: ग्लेशियर के पानी से बंजर जमीन होगी हरी, 2.4 करोड़ लीटर जल भंडारण की तैयारी

Ladakh Water Conservation के तहत स्टोक ग्लेशियर के पानी से चार जलाशय बनाए गए हैं। 2.4 करोड़ लीटर पानी से कृषि को मिलेगा बढ़ावा।

Ladakh Water Conservation: Project Him Sarovar
लद्दाख के स्पितुक फरका में ग्लेशियर के पानी को संरक्षित करने के लिए तैयार किए गए जलाशय। Ladakh

डिजिटल डेस्क, लेह। Ladakh प्रशासन ने जल संरक्षण और कृषि भूमि के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। लेह जिले के स्पितुक फरका क्षेत्र में स्टोक ग्लेशियर से बहकर व्यर्थ जाने वाले पानी को संरक्षित कर बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत करीब पांच महीने में ग्लेशियर के पानी को इगू-फे नदी की ओर मोड़कर चार जलाशय तैयार किए गए हैं।

इन जलाशयों में अब ग्लेशियर से पिघलने वाला पानी जमा किया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, इस पानी का इस्तेमाल आसपास की सैकड़ों एकड़ जमीन को कृषि योग्य बनाने और स्थानीय लोगों की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

चार जलाशयों में जमा हुआ ग्लेशियर का पानी

स्पितुक फरका में बनाए गए चार जलाशयों में प्रत्येक की लंबाई करीब 60 मीटर, चौड़ाई 40 मीटर और गहराई दो मीटर है। प्रत्येक जलाशय में लगभग 60 लाख लीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता बताई गई है। इस तरह चारों जलाशयों की कुल जल भंडारण क्षमता करीब 2.4 करोड़ लीटर है।

इन जलाशयों के निर्माण का काम इसी वर्ष 10 अप्रैल को शुरू हुआ था। Ladakh ग्लेशियर से आने वाले पानी के कारण पहला जलाशय 21 जून तक भर गया। इसके बाद दूसरा जलाशय 19 जुलाई, तीसरा 24 अगस्त और चौथा जलाशय 9 सितंबर तक भर गया।

एक हजार एकड़ जमीन पर खेती की योजना

Ladakh प्रशासन के मुताबिक, इन जलाशयों में जमा पानी का इस्तेमाल कृषि गतिविधियों को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस परियोजना को लद्दाख में कृषि को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

प्रशासन का कहना है कि ग्लेशियर से पहले व्यर्थ बह जाने वाले पानी को संरक्षित करने से करीब 1,000 एकड़ जमीन पर खेती को मदद मिल सकती है। इससे पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर कृषि गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

3,200 लीटर पानी रोजाना सो कार झील की ओर मोड़ा जा रहा

Ladakh में जल संरक्षण की इसी मुहिम के तहत रुपशो खारनाक ग्लेशियर से रोजाना बहने वाले करीब 3,200 लीटर पानी को मोड़कर सिकुड़ रही सो कार झील को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। लद्दाख प्रशासन का जोर ग्लेशियरों और नदियों से मिलने वाले पानी को स्थानीय जरूरतों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से संरक्षित करने पर है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जल संचयन की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

चेक डैम के जरिए पानी रोकने की कोशिश

Ladakh जैसे ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्र में जल उपलब्धता लंबे समय से चुनौती रही है। गर्मियों के दौरान ऊपरी इलाकों में ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है। प्रशासन अब इस पानी को रोकने और संरक्षित करने के लिए प्राकृतिक तरीके से चेक डैम और जल संचयन संरचनाएं तैयार कर रहा है।

इन संरचनाओं में जमा पानी का इस्तेमाल गर्मियों और अन्य जरूरतों के दौरान स्थानीय इलाकों में किया जा सकता है। इससे ग्लेशियर के पानी के बेहतर प्रबंधन के साथ कृषि और स्थानीय जल आपूर्ति को भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

लद्दाख में जल संरक्षण पर बढ़ा जोर

Ladakh में सीमित जल संसाधनों के बीच ग्लेशियरों से मिलने वाला पानी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि पिघलने के बाद तेजी से बह जाने वाले पानी को जलाशयों और अन्य संरचनाओं में संग्रहित किया जाए। स्पितुक फरका में प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत तैयार किए गए चार जलाशय इसी प्रयास का हिस्सा हैं। करीब 2.4 करोड़ लीटर की संयुक्त क्षमता वाले इन जलाशयों से न सिर्फ पानी का संरक्षण होगा, बल्कि कृषि योग्य भूमि के विस्तार और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। (amar bharti)

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