नरेंद्र मोदी: लोकप्रियता का सवाल और जनता का मूड

डिजिटल डेस्क, अमर भारती: भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी का सफर अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां उनके राजनीतिक जीवन को केवल चुनावी जीत या सरकार के कार्यकाल के आधार पर नहीं देखा जा सकता। 10 जून 2026 को मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए और लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने के मामले में जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया।
2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार NDA के सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। इस लंबे राजनीतिक दौर ने भारतीय राजनीति, शासन व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और भारत की वैश्विक भूमिका पर व्यापक प्रभाव डाला है।
राजनीतिक सफर से प्रधानमंत्री पद तक
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा गुजरात से शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंची। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2001 से 2014 तक लगभग 13 वर्षों के बाद 2014 में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 2019 में दूसरी और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के साथ उनका राजनीतिक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बना रहा।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को अकेले बहुमत नहीं मिला और 240 सीटों पर उसे संतोष करना पड़ा, जिसके बाद NDA सहयोगियों के साथ सरकार बनी। यही बदलाव मोदी के तीसरे कार्यकाल की राजनीतिक संरचना को पहले दो कार्यकालों से अलग करता है।
लोकप्रियता का सवाल और जनता का मूड
नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता भारतीय राजनीति के सबसे अधिक चर्चा वाले विषयों में बनी हुई है। उपलब्ध जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता अभी भी काफी मजबूत है, हालांकि आंकड़ों में समय के साथ उतार-चढ़ाव भी दिखाई देता है।
अगस्त 2026 के India Today-CVoter Mood of the Nation सर्वेक्षण में 48.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने मोदी को अगले प्रधानमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया। इसे देश की पूरी आबादी की स्थायी राय नहीं बल्कि उस समय किए गए सर्वेक्षण में शामिल उत्तरदाताओं की राय के रूप में देखना चाहिए।
योजनाओं से बदली शासन की तस्वीर
नरेंद्र मोदी सरकार के शासन मॉडल में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष लाभ वाली योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार दिखाई देता है। जन धन योजना ने बैंकिंग सेवाओं को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया, आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार किया और जल जीवन मिशन ने ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य आगे बढ़ाया।
आवास, गैस कनेक्शन, सड़क, बिजली, डिजिटल भुगतान और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं ने सरकार और आम नागरिक के बीच सीधे संपर्क वाले शासन मॉडल को मजबूत किया है।

UPI से डिजिटल भारत की पहचान
भारत के डिजिटल परिवर्तन की सबसे स्पष्ट तस्वीर UPI के विस्तार में दिखाई देती है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 24.5 अरब लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल भुगतान अब भारतीय अर्थव्यवस्था के रोजमर्रा के व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
हालांकि इस बदलाव को केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी; इसमें NPCI, बैंकिंग व्यवस्था, फिनटेक कंपनियों, व्यापारियों और करोड़ों उपयोगकर्ताओं की भी भूमिका है।
अर्थव्यवस्था: आंकड़े क्या कहते हैं?
वर्तमान आर्थिक तस्वीर में भारत की तेज विकास दर एक महत्वपूर्ण बिंदु है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। इसी अवधि में निजी निवेश में भी तेजी दर्ज की गई और विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 9.2 प्रतिशत रही। ये आंकड़े आर्थिक गतिविधि की मजबूती की ओर संकेत करते हैं, लेकिन इसके साथ रोजगार, घरेलू आय और महंगाई जैसे सवालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रोजगार के मोर्चे पर अगस्त 2026 में बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत रही, जो छह महीने का निचला स्तर था। श्रम बल भागीदारी दर भी बढ़कर 55.6 प्रतिशत हुई। फिर भी शहरी और ग्रामीण रोजगार, महिलाओं की श्रम भागीदारी और उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन आने वाले समय में महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में Global South, रणनीतिक साझेदारियों, G20, जलवायु सहयोग और तकनीकी कूटनीति को विशेष महत्व मिला है। 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया।
भारत ने International Solar Alliance और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

2026 में भी भारत की वैश्विक आर्थिक और तकनीकी महत्वाकांक्षा दिखाई दे रही है। 17 सितंबर 2026 को अमेरिकी कंपनी Applied Materials ने भारत में अगले दशक में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। यह निवेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने की कोशिशों से जुड़ा है। हालांकि बड़े पैमाने की semiconductor fabrication क्षमता खड़ी करना अभी भी भारत के लिए चुनौती बना हुआ है।
2047 का विजन और अगली परीक्षा
मोदी सरकार के दीर्घकालीन एजेंडे का केंद्रीय विचार Viksit Bharat @2047 है। इसका लक्ष्य स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए केवल GDP बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, आधुनिक विनिर्माण, तकनीक, कृषि उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।
यही कारण है कि मोदी के सामने अगला बड़ा प्रश्न योजनाओं की घोषणा से ज्यादा उनके जमीनी परिणामों का है। सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रोजगार और ग्रामीण आय तक, आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि कितनी व्यापक और टिकाऊ बनती है।
सामने की चुनौतियां
भारत की अर्थव्यवस्था के सामने वैश्विक तेल कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताएं और महंगाई जैसे बाहरी जोखिम मौजूद हैं। अप्रैल-जून 2026 की मजबूत वृद्धि के बावजूद Reuters ने तेल कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को भारत की आर्थिक संभावनाओं के लिए जोखिमों में शामिल किया है।
इसके साथ रोजगार की गुणवत्ता, युवाओं के लिए अवसर, कौशल विकास, विनिर्माण क्षमता, सामाजिक सहमति और राज्यों के साथ प्रभावी समन्वय जैसे घरेलू मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इसलिए मोदी के तीसरे कार्यकाल की असली कसौटी केवल राजनीतिक स्थायित्व नहीं बल्कि आर्थिक विकास को व्यापक सामाजिक लाभ में बदलना होगी।
मोदी युग का अगला अध्याय—उपलब्धियों से परिणामों तक
Expose India के इस विश्लेषण में नरेंद्र मोदी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखें तो तस्वीर कई परतों वाली है। एक ओर लंबा राजनीतिक अनुभव, लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद, तेज आर्थिक वृद्धि, डिजिटल भारत का विस्तार, बुनियादी ढांचे में निवेश और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रियता है; दूसरी ओर रोजगार, निवेश की गुणवत्ता, महंगाई, विनिर्माण क्षमता और सामाजिक-आर्थिक अपेक्षाओं को पूरा करने जैसी चुनौतियां हैं।
आने वाला दौर इस बात से तय होगा कि पिछले वर्षों में तैयार की गई नीतियां और योजनाएं कितनी प्रभावी ढंग से लोगों की आय, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता में बदलती हैं। यही 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। (Amar Bharti)
एक नज़र इन पर भी डालें
PM Modi Birthday 2026: 76वें जन्मदिन पर जानिए नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की पूरी कहानी