जाति जनगणना पर डॉ. अरुणेश यादव की मांग, 2027 की गणना में BC को अलग श्रेणी में शामिल करने पर जोर

जाति जनगणना PC: 19 सितंबर को ‘ब्लैक डे’ मनाने का आह्वान

जाति आधारित जनगणना को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस
जाति आधारित जनगणना को लेकर नई दिल्ली में सामाजिक संगठनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन में ‘वी द पीपल’, ‘संविधान बचाओ संघर्ष समिति’, ‘ऑल इंडिया फेडरेशन फॉर सोशल जस्टिस’ और अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक आयोजित किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को डॉ. सूरज यादव मंडल, डॉ. अरुणेश यादव, एडवोकेट बलराज मालिक, पूर्व जज मनोज कुमार, ज्योति माला, शशि बाला यादव, सुनील सरदार, झारखंड राष्ट्रीय OBC मोर्चा के अध्यक्ष राजेश गुप्ता और राजनारायण ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार इस मामले में देश की जनता को बार-बार धोखा दे रही है। वक्ताओं के मुताबिक, यदि जातियों की पहचान और वर्गीकरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं हुई तो ऐसा डेटा सामने आ सकता है जिसका आगे सही तरीके से विश्लेषण करना मुश्किल होगा और इसका असर OBC से जुड़े हितों पर पड़ सकता है।

इन आरोपों को आयोजकों के पक्ष के तौर पर देखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया मूल सामग्री में शामिल नहीं है। जाति जनगणना

2027 की जनगणना में BC को अलग से शामिल करने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. अरुणेश यादव और अन्य वक्ताओं की मुख्य मांग 2027 की जनगणना से जुड़ी रही। आयोजकों ने कहा कि बहुसंख्यक समुदाय के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए 2027 में ऐसी जाति जनगणना होनी चाहिए, जिसमें आंकड़े स्पष्ट और उपयोगी रूप में सामने आएं।

उनकी मांग है कि जनगणना के प्रश्न संख्या 10 में SC और ST की संवैधानिक श्रेणियों के साथ पिछड़े वर्गों यानी BC को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।

यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार ने Census 2027 के दूसरे चरण के लिए 40 सवालों वाली प्रश्नावली अधिसूचित कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दूसरे चरण में जाति की गणना की जाएगी। प्रश्न संख्या 10 का शीर्षक ‘Scheduled Caste (SC)/Scheduled Tribe (ST)/Caste’ है।

हालांकि, वर्तमान प्रश्नावली में OBC या BC को अलग नाम वाली श्रेणी के रूप में शामिल करने की मांग को लेकर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा और आपत्तियां सामने आई हैं। इसी संदर्भ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने अपनी मांग रखी।

SC, ST और BC के लिए राज्यवार सूची की मांग

डॉ. अरुणेश यादव समेत प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वक्ताओं ने केवल BC को शामिल करने की मांग तक बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने SC, ST और BC से संबंधित जातियों के लिए राज्यवार ड्रॉप-डाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग भी की।

आयोजकों का कहना है कि प्रत्येक संवैधानिक श्रेणी के लिए पहले से उपलब्ध राज्यवार सूची को डिजिटल जनगणना प्रणाली में शामिल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे जातियों की पहचान और रिकॉर्डिंग अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकेगी।

वर्तमान Census 2027 की अधिसूचित प्रश्नावली में प्रश्न संख्या 10 के तहत SC/ST और caste से संबंधित जानकारी मांगी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC और ST के लिए निर्धारित सूचियों के आधार पर विकल्प दिए जाते हैं, जबकि अन्य जातियों के लिए जाति का नाम दर्ज करने की व्यवस्था रखी गई है।

यही व्यवस्था आयोजकों की आपत्ति का एक प्रमुख आधार है। उनका कहना है कि BC को भी स्पष्ट श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए और संबंधित जातियों की राज्यवार ड्रॉप-डाउन सूची उपलब्ध कराई जाए।

19 सितंबर को ‘ब्लैक डे’ मनाने का आह्वान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए 19 सितंबर को ‘ब्लैक डे’ मनाने का आह्वान भी किया गया।

आयोजकों ने केंद्र सरकार पर OBC के साथ जाति जनगणना के मामले में कथित धोखे और फ्रॉड का आरोप लगाते हुए लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। इसके लिए #जाति_जनगणना और #19SeptemberBlackDay जैसे हैशटैग का इस्तेमाल करने की बात कही गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह संदेश दिया गया कि 2027 की जनगणना में BC को स्पष्ट रूप से शामिल करना और SC, ST तथा BC के लिए राज्यवार सूची उपलब्ध कराना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।

जाति जनगणना पर अब बहस प्रश्नावली के तरीके को लेकर

Census 2027 में जाति की गणना को लेकर केंद्र सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है। गृह मंत्रालय ने फरवरी 2026 में कहा था कि दूसरे चरण यानी Population Enumeration में जाति की गणना की जाएगी और जाति से जुड़े सवालों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप दिया जाएगा।

इसके बाद 14 अगस्त 2026 को दूसरे चरण की प्रश्नावली अधिसूचित की गई। आधिकारिक Census Digital Library में भी दूसरे चरण की Population Enumeration की प्रश्नावली दर्ज है।

ऐसे में अब विवाद का एक प्रमुख हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि जाति संबंधी जानकारी किस तरीके से दर्ज की जाएगी और अलग-अलग सामाजिक श्रेणियों की पहचान के लिए किस तरह की व्यवस्था होगी। 17 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. अरुणेश यादव और अन्य वक्ताओं ने इसी मुद्दे पर अपनी मांग सामने रखी।

डॉ. अरुणेश यादव के साथ इन मुद्दों पर बनी रणनीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी गई मांगों के मुताबिक आयोजक 2027 की जनगणना में BC को स्पष्ट रूप से शामिल किए जाने और जातियों के लिए राज्यवार ड्रॉप-डाउन सूची की व्यवस्था चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जाति जनगणना से जुड़े सवालों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

19 सितंबर को ‘ब्लैक डे’ मनाने का आह्वान इसी विरोध अभियान का हिस्सा बताया गया है। आयोजकों की ओर से लोगों से जाति जनगणना के मुद्दे को लेकर अभियान में शामिल होने और संबंधित हैशटैग के जरिए अपनी बात रखने की अपील की गई है।

जाति जनगणना पर संगठनों की प्रमुख मांगें

17 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई मांगों को मुख्य रूप से तीन बिंदुओं में देखा जा सकता है—2027 की जनगणना के प्रश्न संख्या 10 में BC को स्पष्ट रूप से शामिल करना, SC-ST के साथ BC के लिए भी राज्यवार जाति सूची उपलब्ध कराना और जाति जनगणना की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर सरकार से जवाब मांगना।

आयोजकों ने 19 सितंबर को ‘ब्लैक डे’ मनाने का आह्वान करते हुए #जाति_जनगणना और #19SeptemberBlackDay के जरिए अभियान चलाने की अपील की है। (Amar Bharti)

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