नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन (Nana Patekar death) हो गया। जानिए उनके फिल्मी सफर, NAAM Foundation, समाजसेवा और यादगार किरदारों की पूरी कहानी।

डिजिटल डेस्क, गोवा। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन (Nana Patekar death) हो गया। गोवा स्थित अपने आवास पर वह बेहोशी की हालत में मिले, जिसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। अस्पताल की ओर से कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया।
नाना के निधन से सिनेमा जगत में शोक
नाना पाटेकर का निधन (Nana Patekar death) भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़े अध्याय का अंत माना जा रहा है। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और किरदारों को जीने की शैली ने उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग पहचान दी।
‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘नटसम्राट’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग रंग देखने को मिले। गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक नाना ने अपनी अभिनय क्षमता का व्यापक दायरा दिखाया। उन्हें पद्मश्री सहित कई सम्मान मिले।
प्रधानमंत्री मोदी समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने उनके प्रभावशाली और विविधतापूर्ण अभिनय तथा यादगार किरदारों को याद किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई नेताओं और फिल्मी कलाकारों ने भी उनके निधन पर शोक जताया।
अभिनय से आगे समाजसेवा बनी नाना की पहचान
नाना पाटेकर (Nana Patekar death) की कहानी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी। महाराष्ट्र में सूखे और किसान संकट की खबरों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ सितंबर 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की।
NAAM Foundation का मुख्य उद्देश्य सूखा प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद करना रहा है। संस्था किसानों के लिए जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जरूरतमंद परिवारों के सहयोग जैसे क्षेत्रों में काम करती रही है। संस्था के अनुसार पानी की कमी और ग्रामीण संकट को दूर करने के लिए कई जल संरक्षण परियोजनाएं चलाई गईं।
नाना की समाजसेवा ने यह संदेश दिया कि लोकप्रियता सिर्फ पर्दे पर तालियां पाने का नाम नहीं है। समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़ा होना भी सार्वजनिक जीवन की एक बड़ी जिम्मेदारी हो सकती है।
अंतिम विदाई में उमड़े चाहने वाले
नाना के निधन (Nana Patekar death) के बाद उनके चाहने वालों में गहरा शोक है। जिस कलाकार की आवाज और संवाद दशकों तक लोगों के बीच गूंजते रहे, आज वही आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।
उनका जाना केवल एक अभिनेता का जाना नहीं है। यह उस कलाकार की विदाई है जिसने सिनेमा में अपनी पहचान बनाई, लेकिन समाज और गांवों से अपना रिश्ता कभी नहीं छोड़ा। नाना पाटेकर का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए इस बात की मिसाल रहेगा कि कला की ऊंचाई और जमीन से जुड़ी संवेदना एक साथ चल सकती है। अमर भारती ग्रुप और एक्सपोज इंडिया नाना पाटेकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है। (amar bharti)
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