SIR Protest: राहुल गाँधी, नेहा बोरा और अभिजीत दीपके अपने-अपने तरीके से चुनाव आयोग को घेरने में जुटे

डिजिटल डेस्क, अमर भारती। चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध तेज़ होता जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा और सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके अपने-अपने तरीके से चुनाव आयोग को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।
पहले बात करते हैं सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी की। बैंगलुरू के फ्रीडम पार्क में SIR को लेकर सीजेपी की ओर से पीपुल्स ट्रिब्यूनल का आयोजन किया गया। इस आयोजन के बाद चप्पल प्रदर्शन की बात कही गई।
CJP के People’s Tribunal में ध्रुव राठी की एंट्री
युवाओं के बीच बड़ा चेहरा हैं ध्रुव राठी
CJP के SIR को लेकर किए जा रहे इस प्रदर्शन का विशेष आकर्षण हैं यूट्यूबर और इनफ्लूएंसर ध्रुव राठी। ध्रुव राठी युवाओं के लिए एक बड़ा चेहरा हैं। उनकी विशेषता हमेशा उनका कंटेंट रहता है। यही वजह है कि एक बड़ा तबका ध्रुव राठी को फॉलो करता है।
आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के आयोजन में शामिल हो रहे ध्रुव राठी को एक मर्तबा चुनौती दी गई थी यदि दम हो तो भारत में आकर वीडियो शूट करके दिखाओ, उस दौरान ध्रुव न सिर्फ भारत आए बल्कि इण्डिया गेट पर अपना वीडियो शूट किया और सोशल मीडिया पर चुनौती को स्वीकार करते हुए उस वीडियो को शेयर भी किया।
ध्रुव राठी की मौजूदगी को लेकर युवाओं में उत्सुकता
ध्रुव राठी के बैंगुलूर में होने वाले पीपुल्स ट्रिब्यूनल कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर युवाओं में काफी उत्सुकता दिखी और इसे बिग बॉस या अन्य कार्यक्रमों की तरह वाइल्ड कार्ड एंट्री के तौर पर देखा गया।
प्रकाश राज भी बने CJP के आयोजन का आकर्षण
वहीं बैंगलुरू में सीजेपी के इस आयोजन का दूसरा आकर्षण हैं फिल्म अभिनेता प्रकाश राज। प्रकाश राज सरकार के कुछ कामों को देश के खिलाफ मानते रहे हैं और वह इससे पहले भी कई प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं। खास बात यह है कि इन आंदोलनों के बीच अभी तक भारत के मशहूर वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की न कोई प्रतिक्रिया आई है, और न ही कहीं नज़र आए हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक वीडियो जरूर शेयर किया था जिसमें कहा था कि तैयार रहो हम आ रहे हैं।
विरोध की राजनीति में नए चेहरों का उभार
फिलहाल SIR को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के दौर के बीच एक बड़ी बात यह नज़र आ रही है कि देश में कुछ ही चेहरों तक सीमित राजनीति अब कई नए चेहरों पर जा टिकी है। इनमें अगर सबसे ऊपर कोई नाम है तो वह नाम है राहुल गाँधी का।

इसके बाद आते हैं नेहा बोरा और सीजेपी के अभिजीत दीपके, अभिषेक राकाँ और सौरभ दास। राहुल गाँधी ने अपने संघर्षों को निरंतर जारी रखा, तथ्यों और सबूतों के साथ प्रेस काँफ्रेंस कीं… आज हालात यह है कि प्रिंट के तमाम अख़बारों ने उन्हें फ्रंट पेज पर जगह दी है।
राजनीति में शब्दों की सादगी और बदलते हालात
यहां आपको थोड़ा पीछे ले जाते हैं, कहते हैं कि राजनीति हो या जिंदगी शब्दों में सादगी होनी चाहिए लेकिन कभी-कभी सादगी भी अहंकार से भर जाती है या कुछ ऐसा कह जाती है जिसका जवाब सृष्टि परिस्थितियों को बदलकर देती है कि शब्दों का इस्तेमाल ऐसे करो कि उसमें अहंकार नज़र न आए।
आपको याद होगा एक वक्त था जब मनमोहन सिंह की अगुवाई में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनी थी और बीजेपी काफी कम सीटों पर सिमट कर रह गई थी। उस वक्त मनमोहन सिंह ने बीजेपी के खत्म होते वर्चस्व यानी अस्तित्व पर अफसोस जताया था।
इसके बाद से ही परिस्थितियाँ बदलने लगीं और एक के बाद एक कांग्रेस ऐसी स्थिति में पहुंच गई कि उसके स्वयं के अस्तित्व पर ही सवाल उठ गए। हालात यह हो गए कि राहुल गाँधी को कभी घर से निकाला गया, कभी पप्पू जैसे टाइटल के ज़रिए इमेज को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश की गई तो कभी उनकी माँ सोनिया गाँधी के चरित्र पर ही सवाल खड़े किए गए।
23 दिन के अनशन से नेहा बोरा की नई पहचान
वहीं SIR के प्रदर्शन में नेहा बोरा तेज़ी से उभरी हैं। नेहा बोरा के वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में फैली अव्यवस्थाओं और नीट पेपर लीक के खिलाफ 23 दिन के अनशन ने उनको एक दबंग, चतुर और हार न मानने वाली लीडर के रूप में पहचान दिलाई, नेहा के ऊपर स्याही फेंके जाने के बाद उनका नाम सुर्खियों में आ गया।
जंतर-मंतर पर संघर्ष से मजबूत हुई नेहा की पहचान
SIR को लेकर अब जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन में सड़कों पर नेहा का संघर्ष उसकी इच्छाशक्ति को दर्शा रहा है। नेहा बोरा पर अभी तक किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़े होने का ठप्पा भी नहीं लगा है। इसलिए नए और युवा चेहरों में नेहा बोरा को अगर नंबर एक की युवा लीडर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
अभिजीत दीपके और CJP का उभार
अभिजीत दीपके तब सुर्खियों में जब सीजेआई की कॉकरोच वाली टिप्पणी को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर ही कॉकरोच जनता पार्टी बना डाली। अभिजीत एक इन्फ्लूएंसर के तौर पर उभरे और रातों-रात उनके फॉलोअर्स मिलियन्स में हो गए। हालात यह हो गए कि सीजेआई को अपने बयान पर यू-टर्न लेना पड़ा।
शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर भी CJP की सक्रियता
इसके बाद जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्थाओं को लेकर सरकार के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा दिलवा देना, अभिजीत की एक बड़ी उपलब्धि बन गया। यहां सीजेपी के अभिजीत दीपके का ही नाम नहीं लेना होगा बल्कि इसमें अभिषेक राकाँ और सौरभ दास का चेहरा भी उभरकर सामने आया।
सीजेपी से जब राजनीतिक पार्टी बनने का सवाल पूछा गया तो अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया कि वह कोई राजनीतिक दल नहीं बनाने जा रहे बल्कि वह देश के लिए एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेंगे और इस वक्त वह कुछ ऐसा ही करते हुए नज़र आ रहे हैं। फिलहाल ये सभी चेहर इन दिलों SIR पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
CJP को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठे
हालांकि अभिजीत दीपके और सौरभ दास पर आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष से जुड़े होने का आरोप जरूर है। यही वजह है कि जब सीजेपी स्कूलों का दौरा कर रही थी तब सवाल यही उठे कि इसकी शुरूआत पंजाब से क्यों नहीं हुई। हालांकि इस पर कोई सफाई भी सामने नहीं आई। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद क्या इन प्रदर्शनों से चुनाव आयुक्त का भी इस्तीफा संभव होगा।
नए चेहरों का उभार और राजनीति में बदलाव का सवाल
फिलहाल यही कहा जा सकता है कि जिन चेहरों की बात की जा रही है उनके सामने आने से एक बात स्पष्ट है कि जो लोग दुनियाभर में यह भ्रम फैला रहे थे कि माँ भारती के पास सिर्फ एक ही चेहरा है जो देश को चला सकता है, उनके मुँह पर यह करारा तमाचा है और जवाब भी है कि माँ भारती की कोख संघर्ष और क्रांति लाने वाले युवाओं से कभी खाली नहीं रही। वह आज भी अपने दामन में ऐसी चिंगारी पैदा करने वाले युवा रखे हुए है जो समय आने पर ज्वाला बनकर क्रांति की अनगिनत मशाल जला सकते हैं।

अब सवाल—चिंगारी ज्वाला बनेगी या ठंडी पड़ जाएगी?
अब देखना यह होगा कि SIR के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे प्रदर्शन में इस चिंगारी से उठने वाली आग कुछ समय बाद ठंडी पड़ जाएगी या नए भारत के निर्माण में अपना विशेष योगदान देगी। (Amar Bharti)
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