जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन मामला: यात्री की पहचान मोहम्मद शोएब के रूप में हुई है

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के बैग से करीब 155 ग्राम पीले रंग का संदिग्ध पाउडर मिलने का मामला सामने आया है। सीआईएसएफ के जवानों ने नियमित जांच के दौरान यात्री के बैग की तलाशी ली तो कपड़ों में रखे एक अंडरगारमेंट की सिलाई के भीतर यह पाउडर छिपा मिला।
जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पकड़े गए यात्री की पहचान मोहम्मद शोएब के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला बताया गया है और उसने खुद को मलेशिया के कुआलालंपुर में रहने वाला एनआरआई बताया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यात्री इस पदार्थ को लेकर कोई वैध बिल या मालिकाना हक से जुड़ा दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान नारकोटिक्स विभाग से भी संपर्क किया गया, लेकिन प्रयोगशाला परीक्षण में पदार्थ के मादक या नारकोटिक होने की पुष्टि नहीं हुई।
पुलिस ने इसके बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की।
सुरक्षा जांच के दौरान संदिग्ध पाउडर मिला
जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का यह मामला 17 अक्टूबर 2026 का बताया गया है। जानकारी के अनुसार, मोहम्मद शोएब जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन से लाजपत नगर जाने के लिए पहुंचा था। स्टेशन में प्रवेश के दौरान वह सुरक्षा जांच से गुजर रहा था। इसी दौरान स्कैनिंग मशीन में उसके पिट्ठू बैग को लेकर सीआईएसएफ कर्मियों को संदेह हुआ।
इसके बाद बैग की गहन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कपड़ों के बीच रखे एक अंडरगारमेंट की सिलाई में छिपाकर रखा गया पीले रंग का पाउडर मिला। इसका वजन करीब 155 ग्राम बताया गया। शुरुआती तौर पर इसे संदिग्ध गोल्ड पाउडर माना गया है।
जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर मौजूद सीआईएसएफ कर्मियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलने पर एएसआई मासूम रजा मौके पर पहुंचे। इसके बाद यात्री को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पुलिस के हवाले कर दिया गया।
मलेशिया से दिल्ली आने की बात कही
पूछताछ के दौरान मोहम्मद शोएब ने बताया कि वह मलेशिया में टेक्सटाइल सेक्टर में काम करता है। उसने यह भी बताया कि उसकी पत्नी और बच्चे मलेशियाई नागरिक हैं। उसके मुताबिक, वह 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली आया था और जामा मस्जिद इलाके के एक होटल में ठहरा हुआ था।
घटना वाले दिन वह लाजपत नगर जाने के लिए मेट्रो स्टेशन पहुंचा था। इसी दौरान सुरक्षा जांच में उसके बैग से संदिग्ध पाउडर बरामद हुआ। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आए इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल, मामले में मुख्य सवाल यह है कि बरामद पदार्थ वास्तव में क्या है और यात्री के पास उसका कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज क्यों नहीं था। इन सवालों के जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेंगे।
कस्टम्स और नारकोटिक्स विभाग से किया गया संपर्क
संदिग्ध पदार्थ मिलने के बाद पुलिस ने कस्टम्स विभाग को सूचना दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कस्टम्स विभाग ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थता जताई। इसके बाद पुलिस ने पदार्थ के मादक होने की आशंका के मद्देनजर नारकोटिक्स विभाग से संपर्क किया।
पदार्थ की जांच प्रयोगशाला में कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि बरामद पाउडर कोई ड्रग्स या नारकोटिक पदार्थ नहीं है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में प्रयोगशाला की रिपोर्ट का पूरा ब्योरा या पदार्थ की सटीक रासायनिक पहचान नहीं दी गई है। इसलिए इसे निश्चित रूप से सोना या किसी अन्य धातु का पाउडर बताने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
यह पहलू मामले को महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि शुरुआती तलाशी में किसी वस्तु का संदिग्ध दिखना और जांच में उसकी वास्तविक पहचान सामने आना अलग-अलग बातें हैं। पुलिस को अब पदार्थ की प्रकृति, उसके स्रोत और यात्री के पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
दस्तावेज नहीं दिखाने पर पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद शोएब बरामद किए गए करीब 155 ग्राम पदार्थ के संबंध में कोई वैध बिल या मालिकाना हक का दस्तावेज पेश नहीं कर सका। पूछताछ के दौरान भी वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसी आधार पर उसके खिलाफ डीपी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
DP Act का मतलब आम तौर पर Delhi Police Act (दिल्ली पुलिस अधिनियम), 1978 होता है। यह दिल्ली में पुलिस के कामकाज और उसकी शक्तियों से संबंधित कानून है।
फिलहाल अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन थाने में दर्ज प्रक्रिया से जुड़ा है। हालांकि, जामा मस्जिद स्टेशन पर हुई घटना और मामले से संबंधित थाने के नाम के बीच क्या बात हुई इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जांच की जा रही है और यह पाउडर ले जाने का मकसद क्या था पुलिस इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरे मामले की तस्वीर
जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर हुई इस घटना में सीआईएसएफ की नियमित सुरक्षा जांच के दौरान यात्री के बैग से संदिग्ध पाउडर मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पदार्थ की जांच में उसके मादक होने की पुष्टि नहीं हुई, जबकि उसके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज न मिलने का मुद्दा जांच का आधार बना।
अब मामले की आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पदार्थ की वास्तविक पहचान और उसके स्रोत को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। फिलहाल, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे संदिग्ध पदार्थ की बरामदगी और दस्तावेजों के अभाव में की गई पुलिस कार्रवाई का मामला कहना अधिक उचित होगा। (Amar Bharti)
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