2011 में डेब्यू, टेस्ट टीम के बने भरोसेमंद बल्लेबाज, 3 साल से टीम इंडिया से बाहर थे रहाणे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे संन्यास की घोषणा के साथ अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम दे चुके हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी और क्रिकेट यात्रा में साथ देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। इस घोषणा के साथ भारतीय क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण दौर का अंत हो गया।
अजिंक्य रहाणे संन्यास का भावुक ऐलान
अजिंक्य रहाणे संन्यास की जानकारी उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो के जरिए सामने आई। वीडियो में रहाणे अपने क्रिकेट करियर को याद करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), साथी खिलाड़ियों, कोचों, परिवार और प्रशंसकों का धन्यवाद किया।
वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “कैप 278 अब विदा ले रहा है। इतने सालों तक मिले प्यार, समर्थन और विश्वास के लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं हमेशा इसके लिए आभारी रहूंगा।”
2011 में हुआ डेब्यू, टेस्ट टीम के बने भरोसेमंद बल्लेबाज
अजिंक्य रहाणे ने 31 अगस्त 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत की और टेस्ट क्रिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विदेशी दौरों पर उनका प्रदर्शन विशेष रूप से सराहा गया। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने कई अहम पारियां खेलीं। दबाव के समय टीम को संभालने की उनकी क्षमता उन्हें अलग पहचान दिलाती रही।
तीन साल से टीम इंडिया से बाहर थे रहाणे
अजिंक्य रहाणे संन्यास का फैसला ऐसे समय में आया है जब वह लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मुकाबले के रूप में खेला था।
उनका आखिरी वनडे मुकाबला 2018 में और आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच 2016 में खेला गया था। हालांकि राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने के बावजूद वह घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में सक्रिय बने रहे।
टेस्ट क्रिकेट में शानदार रहा करियर
अजिंक्य रहाणे का सबसे बड़ा योगदान टेस्ट क्रिकेट में माना जाता है। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट मैचों की 144 पारियों में 38.46 की औसत से 5077 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 12 शतक और 26 अर्धशतक निकले। टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर 188 रन रहा।

मेलबर्न, लॉर्ड्स और जोहानिसबर्ग जैसे मैदानों पर खेली गई उनकी पारियां भारतीय क्रिकेट इतिहास की यादगार पारियों में गिनी जाती हैं। अजिंक्य रहाणे संन्यास के साथ भारतीय टेस्ट क्रिकेट के एक भरोसेमंद बल्लेबाज का अध्याय समाप्त हुआ है।
कप्तान के रूप में भी रहे सफल
रहाणे ने केवल बल्लेबाज के रूप में ही नहीं, बल्कि कप्तान के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने भारत की ओर से 6 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिनमें 4 मुकाबलों में टीम को जीत मिली जबकि 2 मैच ड्रॉ रहे।
उनकी कप्तानी का सबसे चर्चित दौर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर देखने को मिला, जहां उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम का नेतृत्व किया। उनकी शांत नेतृत्व शैली और खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की क्षमता की अक्सर सराहना की गई।
वनडे और टी20 में भी निभाई अहम भूमिका
अजिंक्य रहाणे संन्यास की घोषणा के बाद उनके सीमित ओवरों के करियर की भी चर्चा हो रही है। उन्होंने 90 वनडे मैचों में 35.26 की औसत से 2962 रन बनाए, जिसमें 3 शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे।

टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 20 मैचों में 113.29 के स्ट्राइक रेट से 375 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने 3 वनडे मैचों में कप्तानी करते हुए सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की। वहीं 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी के दौरान एक जीत और एक हार उनके खाते में रही।
धैर्य का प्रतीक रहाणे
अजिंक्य रहाणे संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक भावुक क्षण है। रहाणे ने अपने करियर में केवल रन ही नहीं बनाए, बल्कि टीम के लिए जिम्मेदारी, धैर्य और समर्पण का उदाहरण भी पेश किया। एक बल्लेबाज, कप्तान और टीम खिलाड़ी के रूप में उनका योगदान भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। (Amar Bharti)
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