बड़े बदलाव के साथ लोकसभा में पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026, आम लोगों पर क्या होगा असर?

जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026: रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पारित
हंगामे के बीच लोकसभा से पारित हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किए गए इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे सीधे सदन की मंजूरी मिल गई। विधेयक के पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।

लोकसभा में कैसे पारित हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026

लोकसभा में विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के बीच जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 सदन में पेश किया गया। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को पटल पर रखा, जिसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विपक्ष के शोर-शराबे के कारण विधेयक पर विस्तृत बहस नहीं हो सकी। इसके बावजूद सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक भी देखने को मिली।

किरेन रिजिजू ने विपक्ष को क्या नसीहत दी

विधेयक के पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सांसदों को जनता ने अपने क्षेत्र की समस्याएं और मुद्दे उठाने के लिए संसद भेजा है, न कि बिना वजह हंगामा करने के लिए।

रिजिजू ने विपक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष सदन में चर्चा में हिस्सा नहीं लेता और बाद में मीडिया के सामने यह आरोप लगाता है कि सरकार बिना चर्चा के विधेयक पारित कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देती है, इसलिए चर्चा में भाग लेने के बजाय हंगामा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।

जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 में क्या हैं प्रमुख प्रावधान

जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 के तहत देश में जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

नए प्रावधानों के लागू होने के बाद पूरे देश में जन्म और मृत्यु का डेटा एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी हिस्से में होने वाले जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड एकीकृत प्रणाली में उपलब्ध रहेगा।

सरकार का उद्देश्य पंजीकरण व्यवस्था को आधुनिक बनाना और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आम लोगों पर क्या होगा असर

नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र की उपयोगिता और बढ़ सकती है। सरकार का कहना है कि जन्म से संबंधित रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस बनने से रिकॉर्ड तक पहुंच आसान हो सकती है और विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इसके अलावा जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को एकीकृत प्रणाली में लाने से प्रशासनिक कार्यों में भी सुविधा मिलने की संभावना है।

आगे क्या होगा

लोकसभा से पारित होने के बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 आगे की संसदीय और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

वहीं विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा न होने को मुद्दा बनाया है, जबकि सरकार का दावा है कि विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय हंगामे का रास्ता चुना। ऐसे में यह विधेयक संसद और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। (Amar Bharti)

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