एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद बढ़ा विवाद, दिल्ली पुलिस मुख्यालय के अंदर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने ही विभाग के अधिकारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने इसकी जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई को दी है। इस प्रदर्शन को लेकर फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर और नेहा बोरा के बीच सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई। नेहा बोरा ने सवाल उठाया कि अगर पुलिसकर्मी पुलिस के समर्थन में अपने ही विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करें, तो क्या उन्हें हिरासत में लिया जाएगा?
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब 100 पुलिसकर्मियों ने किया प्रदर्शन
सोमवार सुबह करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस के लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटने लगे। इनमें ज्यादातर उत्तर-पूर्वी जिले के पुलिसकर्मी थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले रद्द करने की मांग की गई थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात करना चाहते हैं। पुलिस मुख्यालय के गेट पर उनके ही सहकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा कि उनकी मांगें स्पष्ट हैं और वे पुलिस कमिश्नर से मिलना चाहते हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों के लिए ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP बनाने की मांग भी रखी।
वशिष्ठ ने कहा, “अगर हमारे साथ ऐसा होता है, तो हम शहर के लोगों की सुरक्षा के लिए कैसे लड़ेंगे?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर पुलिस थानों के अंदर ही पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं हैं, तो वे दूसरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार के तबादले पर विवाद
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला 28 अक्टूबर को किया गया था। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए टकराव के पांच दिन बाद हुई थी। इस घटना में कथित तौर पर एक वकील के सिर में चोट लगी थी।
वकीलों ने आरोप लगाया था कि एसीपी और एसएचओ ने उन वकीलों को धमकाया था, जो ललित बंसल पर हमले के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने थाने पहुंचे थे। वकीलों का यह भी आरोप था कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भरी हुई रिवॉल्वर लहराई और उन्हें धमकाया।

इस मामले में शहर के जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। उनकी मांग दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादले से जुड़ी थी। अधिकारियों के तबादले की घोषणा के बाद वकीलों ने हड़ताल समाप्त कर दी।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने दोनों अधिकारियों के तबादले को लेकर नाराजगी जताई और पुलिस कमिश्नर से सीधे बातचीत की मांग की।
पुलिस मुख्यालय के अंदर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अनुशासन बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों जैसा व्यवहार नहीं करने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को मुख्यालय के अंदर आकर बातचीत करने के लिए कहा।
दोपहर करीब 1:30 बजे प्रदर्शनकारी पुलिस मुख्यालय की इमारत के अंदर दाखिल हो गए और परिसर में धरने पर बैठ गए। वे पुलिस एकता के समर्थन में नारे लगा रहे थे। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद प्रदर्शन जारी रहने से पुलिस मुख्यालय में असहज स्थिति बन गई।
‘द टेलीग्राफ’ के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और सभी विशेष पुलिस आयुक्त भी मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया गया। ‘संपर्क सभा’ नाम से यह बैठक शाम करीब 5:30 बजे शुरू हुई। इस दौरान दूसरे जिलों के पुलिसकर्मी भी मुख्यालय पहुंचने लगे।
दिल्ली पुलिस के एक पूर्व कमिश्नर ने ‘द टेलीग्राफ’ से बातचीत में कहा कि उन्होंने पहली बार पुलिसकर्मियों को मुख्यालय के अंदर परिसर में खुलेआम विरोध प्रदर्शन करते देखा है।
नेहा बोरा ने मोहम्मद जुबैर की पोस्ट पर उठाया सवाल
पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने इस वीडियो को एक्स पर रीपोस्ट करते हुए लिखा कि उम्मीद है नेहा बोरा दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करेंगी और इसमें शामिल होंगी।
इस पर नेहा बोरा ने जवाब दिया, “मुझे हैरानी है कि अगर आप दिल्ली पुलिस के समर्थन में, दिल्ली पुलिस के ही ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हैं, और वह भी ऐसे इलाक़े में जहाँ दिल्ली पुलिस ने धारा 163 लागू कर रखी है, तो क्या आपको हिरासत में ले लिया जाएगा?”

इस प्रदर्शन पर विपक्षी नेताओं ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने लिखा कि अगर वह बंगाल में नहीं होतीं, तो पुलिस बनाम पुलिस के इस प्रदर्शन में शामिल हो जातीं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी पूछा कि दिल्ली पुलिस के किस समूह को लाठियां पड़ रही हैं और हिरासत में ले जाया जा रहा है।
सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को शांति भंग करने के आरोप में शांति बनाए रखने के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाएगा।
क्या पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर सकते हैं?
पुलिसकर्मियों के सार्वजनिक प्रदर्शन का अधिकार आम नागरिकों की तरह असीमित नहीं है। वे अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन, तबादले और कामकाज की परिस्थितियों से जुड़े फैसलों को निर्धारित शिकायत निवारण प्रक्रिया और कानूनी माध्यमों से चुनौती दे सकते हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करने पर विशेष कानून और नियम लागू होते हैं।
पुलिस-फोर्स (रिस्ट्रिक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 1966 क्या कहता है?
इस मामले से जुड़ा प्रमुख कानून पुलिस-फोर्स (रिस्ट्रिक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 1966 है। इंडिया कोड के मुताबिक, यह कानून 3 दिसंबर 1966 को दिल्ली में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों के कुछ मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाकर पुलिस बल में अनुशासन बनाए रखना और उन्हें अपने कर्तव्यों का उचित तरीके से पालन करने में सक्षम बनाना है।

इस कानून में एक सीमित अपवाद भी है। किसी अधिकृत संगठन की ओर से उसके स्वीकृत उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए बुलाई गई बैठक, यदि सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर हो, तो वह इस अपवाद के दायरे में आ सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिसकर्मियों को सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य रूप से प्रदर्शन करने की अनुमति मिल गई है।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद मामला चर्चा में
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन कई मायनों में असामान्य रहा। पुलिसकर्मियों ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात और तबादले रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बाद में मुख्यालय के अंदर धरना भी दिया गया। अब प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
शाहदरा में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए टकराव के बाद दो पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए थे। इसके विरोध में दिल्ली पुलिस के करीब 100 कर्मियों ने मुख्यालय के बाहर और परिसर के अंदर प्रदर्शन किया। इस मामले में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है, जबकि नेहा बोरा की सोशल मीडिया टिप्पणी ने भी घटना को चर्चा में ला दिया है। (Amar Bharti)
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