इण्डिया गठबंधन ने टटोला देश का मिजाज, रामलीला मैदान में रिकॉर्ड जनसैलाब

मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना, देश की आत्मा को चोट पहुंचाने वालों को नहीं छोड़ेंगे

रामलीला मैदान में इण्डिया गठबंधन की रैली में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और विपक्षी नेताओं की मौजूदगी।
रामलीला मैदान में इण्डिया गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी ने दी विपक्ष को संजीवनी

डिजिटल डेस्क, एक्सपोज़ इण्डिया। रामलीला मैदान में इण्डिया गठबंधन की पुकार पर जुटे लोगों ने देश के मिज़ाज को दुनिया के पटल पर रख दिया। लाखों की भीड़ को इस तरह से संयमित देखना न केवल सुखद था बल्कि भारत की सही तस्वीर को भी बयां कर रहा था। शोर था तो केवल नारों का, सलीका था, संयम था और आपसी भाईचारा भी साफ नज़र आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे रामलीला का मैदान एक और एतिहासिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा हो।

सत्य की संजीवनी

वहीं बिना लीडरशिप के अपने वजूद को तलाश रही कांग्रेस को मानों राहुल गाँधी ने संजीवनी देने का काम कर दिया। सत्य के मार्ग की यह संजीवनी केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं थी बल्कि एक के बाद एक अपने गढ़ों को खोते और हाथ मलते देख रहे अन्य प्रदेशों के उन दलों के लिए भी रही जो अबतक कांग्रेस के करीब आने से बच रहे थे।

इण्डिया गठबंधन इससे पहले कभी इतना मज़बूत नज़र नहीं आया जितना रामलीला मैदान में दिख रहा था। देशभर से आए लोगों की संख्या कितनी थी इसका अनुमान लगाना बेहद मुश्किल था। सुबह से ही लोगों की भीड़ हाथों में अपने-अपने नेताओं की तस्वीरें और झंडे लिए घूम रही थी। कनॉट प्लेस, मिंटो रोड से होते हुए दिल्ली रेलवे स्टेशन और उसके बाद रामलीला का मैदान हर जगह जन सैलाब था और बदलाव लाने का जुनून।

देश का मिज़ाज

इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं में एक अलग तरह का जोश दिखा। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नाराज़गी साफ सभी के अंदर साफ दिख रही थी। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे तक इस दिल्ली चलो अभियान का हिस्सा बने। ड्रोन व्यू साफ बता रहा था कि देश का मिज़ाज फिर बदल रहा है।

इण्डिया गठबंधन की अलग-अलग विचारधाराएं ऐसी प्रतीत हुईं मानो अलग-अलग नदियों की धाराएं समंदर में मिल जाने को व्याकुल हैं और एक सैलाब बनने को बेताब हैं। अब देखना यह होगा कि यह सैलाब इतिहास के पन्नों में नई इबारत लिखेगा या फिर समंदर की गहराई में मिलकर अपनी पहचान खो देगा।

राहुल का संदेश

इण्डिया गठबंधन के हर नेता ने बातें तो अलग-अलग कहीं लेकिन सबका सार एक ही था, संविधान बचाओ, देश बचाओ। राहुल गाँधी काफी सधे हुए नज़र आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से नफ़रत नहीं है, न ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से, न गृहमंत्री अमित शाह से और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से।

इस बात को कहते हुए उन्होंने एक बार फिर मोहब्बत की दुकान का जिक्र किया और यह बताने की कोशिश की कि नफ़रत केवल देश की ज़ड़ों खोखला करती है। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़ा हमला बोला और कहा कि वोट और अधिकारों की चोरी देश की आत्मा पर चोट पहुंचाने जैसा है, हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई देश की आत्मा को चोट पहुंचाए।

ज्ञानेश कुमार को आड़े हाथों लेते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि आपने क्राइम किया है, इसकी सज़ा आपको भुगतना ही पड़ेगी। अपने इस बयान के साथ ही रामलीला मैदान में मौजूद जनता को बार-बार यह भरोसा दिलाया कि देर-सवेर ज्ञानेश कुमार को जेल जाना ही होगा। हालांकि इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी निशाना साधा।

इण्डिया गठबंधन के हर नेता ने अपनी बातों को मज़बूती से रखा और देश के मिज़ाज को टटोलने की कोशिश की। साथ ही यह भी बताने कि कोशिश की हर जो चिंगारी उठी है, वह अब हर राज्य से एक मशाल की तरह आगे बढ़ेगी और देश को उसकी सही तस्वीर और पहचान वापस करेगी।

मीडिया में सुर्खियाँ

रामलीला मैदान में इण्डिया गठबंधन के साथ जुटी भीड़ को लेकर देशभर के मीडिया संस्थानों में चर्चा गर्म रही। कुछ चैनल दिखा रहे थे कि कुर्सियाँ खाली है और रैली में न के बराबर लोग जुटे तो कुछ कह रहे थे कि भीड़ नहीं सैलाब था। अब सच्चाई यह है कि स्टूडियो कभी भी घटनास्थल के गवाह नहीं बन सकते है, सही तस्वीर जानने के लिए ग्राउंड ज़ीरो पर होना ज्यादा विश्वसनीय रहता है। हक़ीकत यही है कि भीड़ नहीं थी बल्कि सैलाब था, जो देश सड़कों पर उबाल मार रहा था।

सैलाब के मायने

इण्डिया गठबंधन का एकजुट होना भले ही सुखद लग रहा हो लेकिन हर बार सवाल यह खड़ा हो कि अब अगला कदम क्या तो मन में एक संशय होता है, क्या वाकई बदलाव होगा। सत्ता के शिखर पर बैठे किसी भी दल को सत्ता से उखाड़ फेंकना आसान नहीं होता खासकर तब जब आप एक दशक से भी ज्यादा समय से सत्ता से दूर हों। फिलहाल गठबंधन की गांठ तो मज़बूत हो चुकी है लेकिन यह मज़बूती सत्ता को उखाड़ देगी यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगा। (Amar Bharti)

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