सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा – रामायण-महाभारत का भी प्रसारण बंद हो जाएगा!

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भगवान जगन्नाथ पर आधारित महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोगों की भावनाओं के आधार पर कला और रचनात्मकता को दबाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही ओडिशा सरकार की पुनर्विचार संबंधी मांग को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया।
महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म पर रोक की मांग क्यों उठी?
महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म को लेकर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और ओडिशा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म में कुछ ऐसे चित्रण किए गए हैं जो पारंपरिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म में दिखाए गए कुछ दृश्य बच्चों के बीच गलत संदेश पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ को एनिमेशन चरित्र के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तरह की याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाया।
जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या अदालत से यह कहलवाना चाहा जा रहा है कि हिंदू देवी-देवताओं पर फिल्में नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोगों की संवेदनशीलता के आधार पर ऐसी याचिकाएं लगातार दाखिल होती रहीं, तो स्थिति ऐसी हो सकती है कि हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं पर कोई कलाकृति या फिल्म ही न बनाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में रामायण और महाभारत के प्रसारण पर भी सवाल उठ सकते हैं।

एनिमेशन बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का माध्यम
याचिका में यह तर्क भी दिया गया था कि भगवान जगन्नाथ को डोरेमोन या स्पाइडर मैन जैसे एनिमेशन पात्रों की तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए। इस दलील को स्वीकार करने से अदालत ने इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म जैसी एनिमेशन प्रस्तुति बच्चों को भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं से जोड़ने का एक माध्यम हो सकती है। अदालत के अनुसार, इस तरह के चित्रण से भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा प्रभावित नहीं होती।
पहले भी मिल चुकी थी रिलीज की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म को पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के समापन के बाद रिलीज करने की अनुमति दी थी। 28 जुलाई को रथ यात्रा का समापन हो चुका है।
इसके बाद ओडिशा सरकार ने अदालत से अपने पुराने आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा।
देशभर में प्रदर्शन का रास्ता साफ
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्माता चाहें तो अपने विवेक से फिल्म में कुछ संशोधन कर सकते हैं, लेकिन अदालत रचनात्मक विषयों में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म के देशभर में प्रदर्शन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि रचनात्मक अभिव्यक्ति और कलात्मक स्वतंत्रता पर केवल आपत्तियों के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
रिलीज का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट ने महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग को खारिज करते हुए कला और रचनात्मक स्वतंत्रता के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया है। अदालत ने माना कि महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म जैसी एनिमेशन फिल्में बच्चों को संस्कृति और पौराणिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं। फैसले के बाद महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। (Amar Bharti)
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