जेएनयू में महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह में साहित्यकारों और शायरों ने साझा की हिंदी-उर्दू की सांस्कृतिक विरासत

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर साहित्य, संस्कृति और भाषाई सौहार्द का साक्षी बना। यहां साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘रौशनाई’ के तत्वावधान में आयोजित महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुशायरा, कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का सुंदर समन्वय देखने को मिला। देशभर से आए साहित्यकारों, शायरों, कवियों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया। महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह के दौरान हिंदी और उर्दू साहित्य की साझा विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी दिया गया।
सरस्वती वंदना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह की शुरुआत सुप्रसिद्ध गायिका एवं साहित्यकार डॉ. किरण तिवारी की भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुई। उनकी प्रस्तुति ने पूरे सभागार में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण कर दिया। इसके बाद संस्था के संरक्षक एवं पीएफ कमिश्नर आलोक यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की भूमिका रखी।
उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है और ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति तथा भाषाई समरसता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
‘रौशनाई’ की सोच और उद्देश्य साझा किए सिया सचदेव ने
कार्यक्रम में संस्था रौशनाई की संस्थापक एवं शायरा सिया सचदेव ने संस्था की स्थापना के पीछे की प्रेरणा साझा की। उन्होंने कहा कि रौशनाई केवल एक साहित्यिक संस्था नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संघर्ष, विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “मैंने तन्हाई को रौशनाई में बदला है। रौशनाई मेरे लिए प्रेम, श्रद्धा, संघर्ष और विश्वास की पहचान है। जब इंसान अपने दर्द को उद्देश्य में बदल देता है, तो वही दर्द समाज के लिए रोशनी बन जाता है।”
उनके इस विचार को उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं ने खूब सराहा।

नुसरत मेहदी को मिला ‘महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान’
महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा जब मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक नुसरत मेहदी को ‘महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
उन्हें उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने नुसरत मेहदी के साहित्यिक कार्यों और सांस्कृतिक योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने उर्दू भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और साहित्यिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महेंद्र सिंह के व्यक्तित्व और योगदान को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश शर्मा ने महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह की परंपरा, उसके उद्देश्य और स्वर्गीय महेंद्र सिंह के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि महेंद्र सिंह का जीवन समाज सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उनके सम्मान में आयोजित यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक मूल्यों और साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि इस सम्मान के जरिए उन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मुशायरा और कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह के अंतर्गत आयोजित मुशायरा एवं कवि सम्मेलन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में डॉ. अख़लाक़ ‘आहन’ (जेएनयू), सुधाकर पाठक, डॉ. किरण तिवारी, अमित शुक्ला, ज्योति जुल्का, पुष्प राज, अभिषेक शर्मा और आरिश रईस ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, समाज, संस्कृति, राष्ट्र और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
श्रोताओं ने कविताओं और ग़ज़लों का भरपूर आनंद लिया और कई प्रस्तुतियों पर देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।

हिंदी-उर्दू की साझा विरासत का दिया संदेश
आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें हिंदी और उर्दू साहित्य को समान महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि दोनों भाषाएं भारतीय संस्कृति की साझा विरासत हैं और गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान भी।
महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह के माध्यम से भाषाई सौहार्द, सांस्कृतिक समन्वय और साहित्यिक संवाद को मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद साहित्यकारों ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने का कार्य करता है और ऐसे आयोजनों की आज पहले से अधिक आवश्यकता है।
आभार के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में रौशनाई की संस्थापक सिया सचदेव ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, शायरों, कवियों, शिक्षाविदों, सहयोगियों और उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी हिंदी, उर्दू सहित भारतीय भाषाओं के साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इसी प्रकार के सार्थक आयोजन करती रहेगी। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना और भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना है।

साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का बना प्रभावी मंच
महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह केवल एक सम्मान समारोह नहीं रहा, बल्कि साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता का उत्सव बनकर सामने आया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य समाज को जोड़ने, नई सोच विकसित करने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
जेएनयू में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि जब साहित्यकार, शिक्षाविद, कलाकार और समाजसेवी एक मंच पर आते हैं तो संवाद, संवेदना और संस्कृति का नया अध्याय लिखा जाता है। ऐसे आयोजन न केवल साहित्यिक परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं। (Amar Bharti)
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