हर सार्वजनिक संस्थान में मेडिकल केयर यूनिट्स स्थापित करने की मांग, स्वास्थ्य अधिकार और रोजगार को बताया राष्ट्रीय प्राथमिकता

रेवाड़ी। मेडिकल केयर यूनिट्स की स्थापना को लेकर राष्ट्रीय सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच ने केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल नीति बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, न्यायालयों, औद्योगिक इकाइयों, विश्वविद्यालयों, मॉल, सरकारी और निजी कार्यालयों सहित सभी सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों में मेडिकल केयर यूनिट्स (फर्स्ट एड सेंटर) स्थापित किए जाने चाहिए। मंच का तर्क है कि इससे हेल्थ इमरजेंसी के दौरान समय पर प्राथमिक उपचार मिलेगा, असामयिक मौतों में कमी आएगी और प्रशिक्षित नर्सिंग एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

जनसंपर्क अभियान के दौरान नर्सिंग छात्रों से संवाद
लोक सेवा मंच के मेगा जनसंपर्क अभियान के तहत राष्ट्रीय प्रगतिशील विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान, कोर कमेटी सदस्य बीके राम सिंह, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल और नंदलाल यादव ने रेवाड़ी के नारनौल रोड स्थित एक कॉलेज में नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों से मुलाकात की।
बैठक में प्रशिक्षणार्थियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सीमित रोजगार, बढ़ती महंगाई और हेल्थ इमरजेंसी के दौरान समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त की। प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी होने के बावजूद पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हैं।
फर्स्ट एड की कमी से बढ़ती हैं असामयिक मौतें
बैठक को संबोधित करते हुए अशोक प्रधान ने कहा कि कई मामलों में दुर्घटना, हार्ट अटैक, शुगर, ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों में मरीज को समय पर फर्स्ट एड नहीं मिल पाती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक उपचार मिलने से अस्पताल पहुंचने तक मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है, वहां मेडिकल केयर यूनिट्स की उपलब्धता जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
10 से अधिक लोगों की आवाजाही वाले संस्थानों में हो मेडिकल केयर यूनिट्स
लोक सेवा मंच ने सुझाव दिया कि जिन सार्वजनिक और निजी संस्थानों में नियमित रूप से 10 या उससे अधिक लोगों का आवागमन होता है, वहां प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके।
संगठन का मानना है कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी बल्कि प्रशिक्षित नर्सिंग और पैरामेडिकल युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उठी मांग
अशोक प्रधान ने कहा कि आज के समय में हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, चोट, बुखार, उल्टी, दस्त, चक्कर, सिरदर्द और पेट दर्द जैसी समस्याएं अचानक सामने आती हैं। यदि ऐसे मामलों में तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध हो जाए तो गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाने और सार्वजनिक स्थानों पर प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की अपील की।
कानूनी दृष्टि से क्या कहता है संविधान और न्यायपालिका?
मेडिकल केयर यूनिट्स की मांग केवल सामाजिक आवश्यकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध नागरिकों के जीवन के अधिकार से भी जुड़ा है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी इसका हिस्सा है।
इसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य का यह दायित्व बताया गया है कि वह जनस्वास्थ्य के स्तर में सुधार करे। हालांकि यह नीति-निर्देशक तत्व है और सीधे अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन सरकारों के लिए यह महत्वपूर्ण संवैधानिक मार्गदर्शक सिद्धांत है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि वर्तमान में ऐसा कोई केंद्रीय कानून नहीं है जो प्रत्येक सार्वजनिक या निजी संस्थान में मेडिकल केयर यूनिट्स स्थापित करना अनिवार्य बनाता हो। इसलिए लोक सेवा मंच की यह मांग एक नीतिगत सुझाव है, जिस पर निर्णय लेना सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

सर्वसम्मति से पारित किया गया प्रस्ताव
बैठक के अंत में उपस्थित सदस्यों और प्रशिक्षणार्थियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र और राज्य सरकारों से सभी प्रमुख सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों में मेडिकल केयर यूनिट्स स्थापित करने की दिशा में शीघ्र कदम उठाने की अपील की।
संगठन का कहना है कि यदि इस दिशा में ठोस नीति बनाई जाती है तो इससे जनस्वास्थ्य की सुरक्षा मजबूत होगी, आपातकालीन चिकित्सा सहायता की उपलब्धता बढ़ेगी और स्वास्थ्य क्षेत्र में हजारों युवाओं को रोजगार मिलने का रास्ता खुलेगा।
सरकार के निर्णय पर टिकी निगाहें
फिलहाल लोक सेवा मंच ने अपनी मांग सरकार के समक्ष रखी है। अभी तक केंद्र या किसी राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस विषय पर कोई नीति या योजना तैयार की जाती है या नहीं। (Amar Bharti)
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