राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: युवा शक्ति, महिला आत्मनिर्भरता, विकास पर जोर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में भारत की युवा आबादी, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन देश की विकास यात्रा, युवा शक्ति और महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी केंद्रित रहा।
1. 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम, युवा शक्ति को बताया सबसे बड़ी संपदा
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन युवा आबादी के उल्लेख के साथ शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है। राष्ट्रपति ने इस युवा आबादी को देश की सबसे मूल्यवान संपदा बताया।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा टैलेंटेड, कमिटेड और स्किल्ड हैं। राष्ट्रपति ने जमीनी स्तर पर युवाओं द्वारा विभिन्न समस्याओं के निकाले जा रहे इनोवेटिव और प्रैक्टिकल समाधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समाधान युवाओं की समाज और देश के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम ने हाल ही में रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करके अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए चरण का शुभारंभ किया।
2. शिक्षा में बेटियों का प्रदर्शन प्रभावशाली
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में देश की बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ से अधिक महिला सदस्य हैं। इसके अलावा मुद्रा योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले उद्यमियों में लगभग दो-तिहाई लाभार्थी महिलाएं हैं।
राष्ट्रपति ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर वायु सेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने तक विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया।
3. 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के संदर्भ में राष्ट्रपति ने लखपति दीदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया था और इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि अब देश 3 करोड़ महिलाओं को नई लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की तरफ अग्रसर है। राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन इस तरह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी रेखांकित करता है।
4. देशहित पर आधारित है भारत की विदेश नीति
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन एक नए भारत की तस्वीर लिए हुए रहा। भारत की विदेश नीति पर राष्ट्रपति ने कहा कि देश की विदेश नीति देशहित पर आधारित है। आर्थिक सहयोग बढ़ाने और पारस्परिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए भारत ने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व पटल पर भारत का सम्मान बढ़ा है।
उन्होंने शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्शों को भारत की विदेश नीति के स्तंभ बताया।

5. आधुनिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे तक भी पहुंचा। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर अग्रणी योगदान दे रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी के विकास को पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स 2030 के कुछ लक्ष्यों को भारत ने समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है।
6. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत
देश की अर्थव्यवस्था पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से देश की आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है। राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन आर्थिक विकास को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार से जोड़ता नजर आया।
7. भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदाओं का संरक्षण
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन अतुलनिय रहा जिसमें उन्होने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हमारे किसी भी कार्य से आने वाली पीढ़ियों द्वारा प्राकृतिक संपदाओं के अधिकार के इस्तेमाल में तनिक भी कमी न हो।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों को और अधिक समृद्ध प्राकृतिक संपदाएं प्रदान करें। राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि प्राकृतिक संपदाओं पर भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है, जितना वर्तमान पीढ़ी का।
8. साधारण पृष्ठभूमि के लोग भी बड़े सपने देख सकते हैं
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन आम लोगों की क्षमता और उनके सपनों पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग अनेक क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे उनका यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है। उन्होंने विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता देने तथा विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर करने की बात कही।
9. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन
देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि गांवों की छोटी-छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल पेमेंट्स हो रहे हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, विश्व में आधे से अधिक रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करके सरकार ने जनकल्याण की सुविधाओं को पारदर्शी तरीके से जन-जन तक पहुंचाया है।
10. 25 करोड़ से अधिक लोगों की गरीबी से मुक्ति और 59 करोड़ जनधन खाते
गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन महत्वपूर्ण आंकड़ों के साथ सामने आया। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है।

उन्होंने प्रधानमंत्री जन धन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। इनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि 80 करोड़ लोगों के लिए निःशुल्क राशन की व्यवस्था के जरिए उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कर्तव्यों को भी रेखांकित करता नज़र आया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें।
उन्होंने कहा कि कार्यपालिका का दायित्व जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप देना है। वहीं न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।
भारत के विकास की दिशा पर राष्ट्रपति का संदेश
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन युवा शक्ति, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, आर्थिक विकास, विदेश नीति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। राष्ट्रपति ने 65 प्रतिशत युवा आबादी, 10 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों, करीब 59 करोड़ जनधन खाताधारकों और 25 करोड़ से अधिक लोगों के गरीबी से बाहर आने का उल्लेख किया। (Amar Bharti)
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