18 दिन से जारी भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक की सेहत नाजुक बताई जा रही है। जनहित याचिका में अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग की गई है।

डिजिटल डेस्क, एक्सपोज इंडिया: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के 18वें दिन भी अनशन पर डटे हुए हैं। लगातार उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अब यह आंदोलन केवल सामाजिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि कानूनी और मानवीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है।
2. जान बचाने के लिए हाईकोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के बीच उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने जनहित याचिका (PIL) दायर कर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि यदि समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई तो उनके जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

3. जीवन के अधिकार का दिया गया संवैधानिक आधार
याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। यदि किसी व्यक्ति का जीवन खतरे में है तो सरकार आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। याचिकाकर्ता ने अदालत से केंद्र और दिल्ली सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
4. तेजी से गिर रही है स्वास्थ्य स्थिति
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के दौरान उनका लगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg और ब्लड शुगर 67 mg/dL दर्ज की गई है। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक उपवास की स्थिति में यह स्वास्थ्य संकेत गंभीर माने जाते हैं और निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है।
5. डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा उपचार
जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें बैठने और खड़े होने पर चक्कर आते हैं तथा सामान्य गतिविधियां करने में भी कठिनाई महसूस हो रही है। डॉक्टर समय-समय पर मेडिकल जांच कर रहे हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

6. अस्पताल में भर्ती कराने और चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग
जनहित याचिका में अदालत से मांग की गई है कि यदि चिकित्सकीय आवश्यकता हो तो सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में पोषण या भोजन उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी जाए, ताकि उनके जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
7. आंदोलन को मिला सामाजिक समर्थन
सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके सहित कई सामाजिक संगठनों ने आंदोलन के समर्थन में सरकार से संवाद शुरू करने की अपील की है। समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, छात्रों और सामाजिक सुधार से जुड़े मुद्दों की आवाज है। उनका मानना है कि सरकार को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

8. 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा निकाली जाएगी। इस घोषणा के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है।
9. कानूनी और मानवीय बहस का केंद्र बना मामला
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल अब केवल विरोध प्रदर्शन का विषय नहीं रह गई है। यह मामला व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और जीवन के अधिकार जैसे संवैधानिक प्रश्नों को भी सामने ला रहा है। अदालत के सामने अब यह संतुलन बनाने की चुनौती होगी कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और जीवन की सुरक्षा के बीच किस प्रकार उचित संतुलन स्थापित किया जाए।

10. अब अदालत और सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
सभी की निगाहें अब इस बात पर हैं कि अदालत जनहित याचिका पर क्या आदेश देती है और केंद्र तथा दिल्ली सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं। यदि अदालत चिकित्सा हस्तक्षेप के निर्देश देती है तो यह आदेश भविष्य में लंबे अनशन से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है।
जीवन रक्षा संवैधानिक दायित्व
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार है तो दूसरी ओर जीवन की रक्षा का संवैधानिक दायित्व। लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और अदालत में दायर जनहित याचिका ने इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी, सामाजिक और मानवीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला और सरकार की प्रतिक्रिया इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। (Amar BhartI)
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