स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ ने इंदौर को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया। जबलपुर तीसरे और दिल्ली 21वें स्थान पर रही। जानिए पूरी रैंकिंग।

Swachh Vayu Survekshan 2026 में दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने इंदौर को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। लखनऊ को 198 अंक मिले, जबकि इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। सर्वेक्षण में वायु प्रदूषण कम करने के लिए शहरों की ओर से उठाए गए कदमों के साथ-साथ पीएम-10 के स्तर में आए सुधार को भी प्रमुख आधार बनाया गया।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ की बड़ी छलांग
Swachh Vayu Survekshan 2025 में इंदौर पहले स्थान पर था, जबकि लखनऊ 22वें स्थान पर रहा था। इस बार लखनऊ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं पिछले साल दूसरे स्थान पर रहा जबलपुर इस बार तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। आगरा, जो पिछली रैंकिंग में तीसरे स्थान पर था, इस बार पांचवें स्थान पर खिसक गया।
केंद्र सरकार ने स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में शामिल 130 शहरों की रैंकिंग जारी की। इसमें वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों और पिछले वर्षों में प्रदूषण के स्तर में आए बदलाव का आकलन किया गया।
130 शहरों में वायु सुधार के प्रयासों का आकलन
Swachh Vayu Survekshan 2026 में देश के 130 शहरों को अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया गया। इस बार नगरीय निकायों के वार्डों को भी सर्वेक्षण का हिस्सा बनाया गया।
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ पहले, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में ओडिशा का राउरकेला 198.5 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। फिरोजाबाद और गुंटूर 195-195 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अमरावती तीसरे स्थान पर रहा।
3 लाख से कम आबादी वाले शहरों में ओडिशा के तीन शहरों ने शीर्ष तीन स्थानों पर कब्जा किया। कलिंगा नगर पहले, अंगुल दूसरे और तालेचर तीसरे स्थान पर रहा।
वार्डों में भी लखनऊ का दबदबा
Swachh Vayu Survekshan2026 में पहली बार वार्डों को भी अलग श्रेणी में शामिल किया गया। 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों में लखनऊ का वार्ड नंबर 70 पहले स्थान पर रहा।इस श्रेणी में भोपाल का वार्ड नंबर 60 दूसरे और नासिक का वार्ड नंबर 7 तीसरे स्थान पर रहा।
वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों में भुवनेश्वर के वार्ड 30 और 36 शीर्ष स्थान पर रहे। विजयवाड़ा का वार्ड 60 दूसरे और प्रयागराज का वार्ड 31 तीसरे स्थान पर रहा। 10 हजार से कम आबादी वाले वार्डों में राउरकेला का वार्ड 13 पहले, नलगोंडा का वार्ड 16 दूसरे और नौगांव का वार्ड 8 तीसरे स्थान पर रहा।
दिल्ली की रैंकिंग में भी सुधार

बड़े शहरों की रैंकिंग में दिल्ली ने भी पिछले Swachh Vayu Survekshan के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। दिल्ली 32वें स्थान से बढ़कर 21वें स्थान पर पहुंच गई।इससे संकेत मिलता है कि दिल्ली समेत कई शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए उपायों का असर रैंकिंग में दिखाई दिया है।
किन मानकों पर तय हुई शहरों की रैंकिंग?
Swachh Vayu Survekshan 2026 में शहरों का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- कचरा जलाने पर रोक
- सड़क की धूल कम करने के उपाय
- निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण
- निर्माण एवं ठोस कचरे का बेहतर प्रबंधन
- वाहन प्रदूषण कम करने के उपाय
- औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण
- पीएम-10 के स्तर में सुधार
- स्वच्छता और सड़क सफाई की व्यवस्था
इन सभी मानकों के आधार पर शहरों को अंक दिए गए और फिर उनकी रैंकिंग तैयार की गई।
इन वजहों से लखनऊ बना नंबर-1
लखनऊ ने Swachh Vayu Survekshan में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। इनमें घर-घर से कचरा उठाने और उसके परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल, सड़क सफाई के लिए 97 मैकेनिकल और बैटरी से चलने वाले वाहनों की व्यवस्था तथा 22 सघन शहरी वन तैयार करना शामिल है। इसके अलावा करीब 560 किलोमीटर खराब सड़कों के निर्माण और सुधार को भी शहर के प्रयासों में शामिल किया गया।
लखनऊ के प्रदर्शन में पीएम-10 के स्तर में आया सुधार भी महत्वपूर्ण रहा। 2017-18 के मुकाबले लखनऊ में पीएम-10 के स्तर में 46 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया गया। वहीं इंदौर में करीब 39 प्रतिशत और जबलपुर में 28 प्रतिशत सुधार दर्ज हुआ।
हालांकि, औसत पीएम-10 स्तर की बात करें तो लखनऊ अभी भी इंदौर और जबलपुर से पीछे है। लखनऊ में औसत पीएम-10 स्तर 135, इंदौर में 76 और जबलपुर में 78 बताया गया है।
स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 16 हजार करोड़ से अधिक खर्च
Swachh Vayu Survekshan कार्यक्रम के तहत देश के 130 शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार अब तक 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारना और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना है।
विजेताओं को कितनी मिली पुरस्कार राशि?
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में Swachh Vayu Survekshan की दृष्टि से पहले स्थान पर आने वाले शहर को 1.50 करोड़ रुपये, दूसरे स्थान को 1 करोड़ रुपये और तीसरे स्थान को 50 लाख रुपये पुरस्कार के रूप में दिए गए।
3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में पुरस्कार राशि क्रमशः 75 लाख, 50 लाख और 25 लाख रुपये रही। 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए यह राशि क्रमशः 37.50 लाख, 25 लाख और 12.50 लाख रुपये रही। वहीं 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों में पहले स्थान के लिए 50 लाख, दूसरे के लिए 40 लाख और तीसरे स्थान के लिए 30 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया।
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की टॉप रैंकिंग
| शहर | स्कोर | रैंक |
|---|---|---|
| लखनऊ | 198 | 1 |
| इंदौर | 197 | 2 |
| जबलपुर | 195 | 3 |
| भोपाल | 192 | 4 |
| आगरा | 192 | 4 |
| सूरत | 191 | 5 |
| रायपुर | 189 | 6 |
| ठाणे | 187 | 7 |
| चंडीगढ़ | 187 | 7 |
| राजकोट | 187 | 7 |
| अहमदाबाद | 186 | 8 |
| विजयवाड़ा | 186 | 8 |
| गाजियाबाद | 184 | 9 |
| नवी मुंबई | 184 | 9 |
| नागपुर | 183.5 | 10 |
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