वाराणसी में मीट मछली दुकानें हटाने के फैसले का जोरदार विरोध, सड़कों पर उतरे व्यापारी

वाराणसी में मीट मछली दुकानें हटाने के फैसले को लेकर नगर आयुक्त को सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन

वाराणसी में मीट मछली दुकानें हटाने के फैसले का जोरदार विरोध, नगर आयुक्त को सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन
वाराणसी में मीट, मछली और मुर्गा व्यवसायियों ने नगर निगम के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन नगर आयुक्त को सौंपा।

वाराणसी/अमर भारती। वाराणसी में मीट मछली दुकानें शहर से 10 से 15 किलोमीटर बाहर स्थानांतरित करने के नगर निगम के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। मांस, मछली और मुर्गा व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों, विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सिगरा क्षेत्र से नगर निगम कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर नगर आयुक्त को आठ सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के प्रस्ताव को हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।

वाराणसी में मीट मछली दुकानें हटाने के फैसले पर भड़का आक्रोश

प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, भाकपा माले, अपना दल (कमेरावादी), छात्र संगठनों और विभिन्न बाजारों के व्यापारियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “व्यवसाय पर रोक नहीं सहेंगे”, “नगर निगम की मनमानी नहीं चलेगी” और “रोजगार पर जो वार करेगा, बनारस उसे माफ नहीं करेगा” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

व्यापारियों ने बताया आजीविका पर बड़ा संकट

चौकाघाट मछली मंडी के व्यापारी दिनेश चौहान ने कहा कि नगर निगम का प्रस्ताव केवल दुकानों को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि हजारों छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव डालने वाला फैसला है। उन्होंने कहा कि वर्षों से शहर में कारोबार कर रहे लोगों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बाहर भेजना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने मांग की कि यदि नगर निगम को व्यवस्थाओं में सुधार करना है तो पहले व्यापारियों से संवाद कर समाधान निकाला जाए।

उपभोक्ताओं को भी होगी भारी परेशानी

प्रदर्शन में शामिल बंगाली समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि वाराणसी में बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से मछली और मांस का सेवन करते हैं। यदि सभी दुकानें शहर से 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दी गईं तो लाखों उपभोक्ताओं को आवश्यक खाद्य सामग्री खरीदने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल व्यापारियों को ही नहीं बल्कि आम नागरिकों को भी प्रभावित करेगा।

छोटे व्यापारियों के साथ भेदभाव का आरोप

शिवपुर मंडी के अवधेश पटेल ने आरोप लगाया कि स्वच्छता के नाम पर केवल छोटे व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड कारोबार पर ऐसी कोई सख्ती दिखाई नहीं देती।

वहीं लहरतारा मीट मंडी के सुमित सोनकर ने कहा कि यह नीति छोटे व्यापारियों को कमजोर कर बड़े कॉरपोरेट कारोबार को बढ़ावा देने जैसी प्रतीत होती है।

राजनीतिक दलों ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी सदियों से विभिन्न संस्कृतियों, समुदायों और खान-पान की परंपराओं वाला शहर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी एक विचारधारा के आधार पर लोगों के भोजन और रोजगार के अधिकारों को प्रभावित करना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

समाजवादी पार्टी के पार्षद हारून ने कहा कि नगर निगम को दुकानों को हटाने के बजाय सभी मीट एवं मछली विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें लाइसेंस, प्रमाणपत्र, पक्की दुकानें, स्वच्छ पेयजल, बिजली, कोल्ड स्टोरेज और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश पटेल ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम-2014 के तहत सभी पात्र विक्रेताओं को कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए।

ज्ञापन में रखी गईं आठ प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने नगर आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में आठ प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नगर निगम के प्रस्तावित निर्णय को तत्काल वापस लेने, वर्षों से संचालित दुकानों का सर्वे कर नियमित करने, सभी विक्रेताओं को वैध लाइसेंस उपलब्ध कराने, पक्की दुकानें आवंटित करने, बिजली, स्वच्छ पेयजल, कोल्ड स्टोरेज और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की सुविधा देने, सभी दुकानों में आधुनिक स्वच्छता मानकों को लागू करने, स्ट्रीट वेंडर्स कानून के तहत संरक्षण देने तथा नागरिकों के भोजन, व्यापार और आजीविका के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रही।

नगर निगम के फैसले पर आगे भी आंदोलन की चेतावनी

व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि नगर निगम ने प्रस्तावित निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और रोजगार से जुड़ा सवाल है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने और सभी पक्षों को विश्वास में लेकर निर्णय लेने की मांग की।

राजनीतिक मुद्दा बना

वाराणसी में मीट मछली दुकानें शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर नगर निगम शहर में स्वच्छता और बेहतर व्यवस्था का तर्क दे रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी इसे अपने रोजगार और आजीविका पर सीधा हमला मान रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर निगम व्यापारियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और क्या दोनों पक्षों के बीच सहमति का कोई रास्ता निकल पाता है। (Amar Bharti)

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