वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग पर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रिपोर्ट: प्रवेश सिंह, वाराणसी
वाराणसी। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वाराणसी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग का पर्दाफाश करते हुए साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों के माध्यम से लोगों को सट्टेबाजी की सुविधा उपलब्ध कराते थे और करोड़ों रुपये के डिजिटल लेन-देन से जुड़े नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
प्रतिबिम्ब पोर्टल की जांच से खुला वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग का राज
पुलिस के अनुसार वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग का खुलासा प्रतिबिम्ब पोर्टल पर दर्ज एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की जांच के दौरान हुआ। जांच में पता चला कि एक व्यक्ति की इंस्टाग्राम आईडी हैक कर उसके माध्यम से क्यूआर कोड भेजकर धनराशि प्राप्त की गई थी।
साइबर टीम ने जब मोबाइल नंबर और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड का तकनीकी विश्लेषण किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस को पता चला कि नंबर का संबंध ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी गतिविधियों से है।
इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच शुरू की।
किराए के कमरे में चल रहा था ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर क्राइम थाना की टीम ने जगतगंज क्षेत्र स्थित दास नगर कॉलोनी में एक किराए के कमरे पर छापा मारा। यहां से पुलिस ने वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग के दो सक्रिय सदस्यों दीपक सिंह (22 वर्ष) और नवनीत सिंह (25 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपी मूल रूप से कानपुर नगर के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस को मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं, जो ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन की पुष्टि करते हैं।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वे विभिन्न ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों के लिए लोगों को बेटिंग आईडी उपलब्ध कराते थे।
इसके अलावा वे जमा और निकासी यानी पे-इन तथा पे-आउट की पूरी प्रक्रिया भी संचालित करते थे। इसके लिए फर्जी सिम कार्ड, म्यूल बैंक खाते और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता था।
पुलिस के अनुसार वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग लोगों को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार सामग्री का भी इस्तेमाल करता था।
बरामद मोबाइल से मिले अहम डिजिटल साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया है।
इन मोबाइल फोन की जांच में ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इनमें विभिन्न बैंक खातों के क्यूआर कोड, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, बेटिंग पैनल के डैशबोर्ड और प्रचार-प्रसार में उपयोग किए जाने वाले डिजिटल फ्लायर शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये डिजिटल साक्ष्य वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के नाम भी बताए हैं। पुलिस के अनुसार प्रवीन उर्फ अक्षय और दिलावर नामक व्यक्तियों की भूमिका भी इस नेटवर्क में सामने आई है।
फिलहाल पुलिस इन दोनों आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क वाराणसी के अलावा अन्य जिलों तक भी फैला हो सकता है।
इसी वजह से पुलिस डिजिटल लेन-देन और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।
कई धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग के खिलाफ साइबर क्राइम थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य अपराधों के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
युवाओं को निशाना बना रहे ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के नेटवर्क तेजी से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे गिरोह लोगों को जल्दी पैसे कमाने का लालच देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे नेटवर्क न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि साइबर अपराधों और बैंकिंग धोखाधड़ी को भी बढ़ावा देते हैं।
इसी वजह से पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड या ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से दूरी बनाए रखें।
वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग की जांच में सामने आ सकते हैं और बड़े नाम
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वाराणसी ऑनलाइन बेटिंग गैंग की जांच आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन बेटिंग और साइबर अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
साइबर क्राइम थाना की इस कार्रवाई को वाराणसी में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। (Amar Bharti)
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