विवादों से घिरे सम्राट चौधरी बने बिहार CM, क्या विकास होगा या सिर्फ सत्ता का खेल?

सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें CM, JDU से 2 डिप्टी CM — विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ता का चेहरा बदला गया, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह बदलाव विकास लाएगा या सिर्फ जातीय समीकरण और सत्ता का खेल है। सम्राट चौधरी आज बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने और बीजेपी का पहला सीएम बनकर इतिहास रचा, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा विवादों से भरी रही है। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में नाबालिग उम्र के आरोप में मंत्री पद से हटाए जाने, शैक्षणिक योग्यता पर सवाल (7वीं फेल तक के आरोप), और बार-बार पाला बदलने (RJD से JD(U) फिर BJP) की वजह से विपक्ष उन्हें “लालू स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स” का उत्पाद बता रहा है।

उनके साथ जदयू से दो डिप्टी सीएम — विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव — ने शपथ ली, लेकिन NDA के अंदर भी असंतोष की खबरें हैं। विपक्ष (RJD, कांग्रेस, SP) का आरोप है कि 20 साल की NDA सरकार के बावजूद बिहार की तिजोरी खाली है, उद्योग नहीं आए, शिक्षा-स्वास्थ्य में विफलता रही, बेरोजगारी चरम पर है और पलायन जारी है। तेजस्वी यादव ने कहा कि यह पहले से तय साजिश थी और बिहार अभी भी सबसे गरीब राज्य बना हुआ है।

सम्राट चौधरी ने “मोदी-नीतीश मॉडल” चलाने का वादा किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि जाति-आधारित राजनीति और माफिया-भ्रष्टाचार की चुनौतियां नई सरकार के लिए बड़ी बाधा बन सकती हैं। क्या “सम्राट युग” वाकई विकास लाएगा या सिर्फ पुरानी कहानी का नया चेहरा होगा — यह तो समय ही बताएगा।

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