12 अप्रैल 2026, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन, 20 भाषाओं में 12000 गीत, गिनीज बुक रिकॉर्ड में दर्ज है नाम

अप्रैल 12, 2026 मुंबई: एक आवाज़ जिसको सुनकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि उस आवाज़ की असल उम्र क्या है? 90 की उम्र में भी युवा कलाकारों को अपनी आवाज़ देना और गीतों का मशहूर हो जाना तो यही साबित करता है कि वह कोई साधारण गायिका नहीं थी बल्कि सृष्टि का एक अद्भुत उपहार थीं भारतीय सिने जगत के लिए. सुरों की इस रानी का नाम है आशा भोसले… दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोसले 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के बीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया. शनिवार शाम सीने में संक्रमण की शिकायत और थकान की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी हालत बिगड़ गई और शनिवार शाम उन्होने अंतिम सांस ली.
स्वर्गीय आशा भोसले को प्यार से सभी आशा ताई कहकर बुलाते थे. आशा ताई का करियर आठ दशकों से भी ज्यादा लंबा था — एक ऐसा सफर जो संघर्ष, दर्द, सफलता और अमर गानों से भरा हुआ था।
करियर का सफर और उतार-चढ़ाव शुरुआती संघर्ष (1933-1950s):
8 सितंबर 1933 को सांगली में जन्मी आशा मंगेशकर (बाद में भोसले) बचपन में ही पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने लगीं। बहन लता मंगेशकर की छाया में शुरू हुई उनकी यात्रा आसान नहीं थी।
ब्रेकथ्रू और उड़ान (1957 से 1960s):
फिल्म C.I.D. (1956) और फिर Naya Daur (1957) के गाने “उड़े जब जब जुल्फें तेरी” ने उन्हें पहचान दिलाई। ओ.पी. नैय्यर के साथ लंबा सहयोग शुरू हुआ — “देवाना हुआ बादल”, “आईये मेहरबान” जैसे हिट्स आए। मोहम्मद रफी के साथ भी कई यादगार ड्यूएट्स दिए। इस दौर में वे “वैंप” रोल्स के गानों की क्वीन बन गईं, लेकिन अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार संघर्ष करती रहीं.
पीक पर पहुंच (1970s):
आर.डी. बर्मन (पंचम) के साथ उनका जादुई कम्बिनेशन शुरू हुआ, और दोनों की कैमिस्ट्री ने “दम मारो दम”, “चुरा लिया है तुमने”, “यार का दीवाना”, “ये लड़का हाय अल्लाह” जैसे सुपरहिट गीत हिंदी सिने जगत को दिए. उन्होंने कैबरे, डिस्को, पॉप, रॉक — हर स्टाइल को अपनी आवाज दी। इस दौर में वे लता दीदी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी भी बनीं।
नई ऊंचाइयां और विविधता (1980s-2000s):
खय्याम के साथ Umrao Jaan (1981) में “दिल चीज क्या है”, “इन आंखों की मस्ती” जैसे ग़ज़ल गाकर साबित किया कि वे सिर्फ मॉडर्न गानों तक सीमित नहीं हैं। नेशनल अवॉर्ड भी मिला। ए.आर. रहमान, अनु मलिक जैसे नए संगीतकारों के साथ भी हिट्स दिए — “तन्हा तन्हा”, “कम्बख्त इश्क”।
रिकॉर्ड और सम्मान:
12,000 से ज्यादा गाने, 20 भाषाओं में। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (सबसे ज्यादा रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार), पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सहित), दो ग्रैमी नॉमिनेशन। उन्होंने भजन, कव्वाली, लोक, रोमांटिक — हर विधा को छुआ।
जीवन में कई बार हार मानने का मन हुआ, लेकिन संगीत उनकी सांस बना रहा। 90 की उम्र में भी स्टेज पर 3 घंटे गा सकती थीं। उन्होंने कहा था — “म्यूजिक मेरी सांस है… मुश्किल वक्तों से गुजरी, लेकिन जीती रही।” उनके निधन से संगीत जगत में मानों एक अधूरापन सा रह गया है. आशा ताई की वो जादुई आवाज, जो पीढ़ियों को जोड़ती रही, अब दिलों तक सिमट कर रह गई है।
उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली, ओम शांति… आपकी यादें अमर हैं