जिसे मृत मानकर किया अंतिम संस्कार, वही जिंदा मिला

विक्षिप्त भाई होने की आशंका के चलते किया अंतिम संस्कार, अब मृतक की पहचान पर सवाल

उतरौला, बलरामपुर। पुलिस ने जिस अज्ञात शव को मुस्तफा समझकर पोस्टमार्टम कराया और बाद में अंतिम संस्कार भी कर दिया, वही मुस्तफा रविवार को जिंदा अपने घर पहुंच गया। इस घटना से पुलिस प्रशासन और अंतिम संस्कार कराने वाले लोग हैरान हैं और अब असली मृतक की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शनिवार को कोतवाली क्षेत्र के देवरिया मैनहा गांव के पास सड़क किनारे एक क्षत-विक्षत और लगभग पांच से छह दिन पुराना अधेड़ व्यक्ति का शव मिला था। ग्राम प्रधान के पति राम सजन वर्मा की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया। बाद में पटेल नगर निवासी शमीम अहमद ने शव को अपने विक्षिप्त भाई मुस्तफा का होने की आशंका जताई। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

रविवार को जब कथित मुस्तफा का शव एंबुलेंस से पटेल नगर पहुंचा, उसी दौरान मुस्तफा खुद जिंदा अपने घर लौट आया। उसे देखकर परिजन दंग रह गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी कि जो शव उन्हें सौंपा गया है वह उनके भाई का नहीं है।

हालांकि पुलिस के दबाव में परिजनों और स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह मृतक कौन था जिसे बिना सही पहचान के दफना दिया गया। न तो उसकी जाति-धर्म स्पष्ट हो सका है और न ही मौत का कारण।

प्रशासन अब दोबारा शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू करने की बात कह रहा है, जबकि यह भी जांच का विषय है कि मृतक की मौत प्राकृतिक थी या हत्या कर शव को फेंका गया था।

प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह के अनुसार, पुराने और क्षत-विक्षत शव को देखते हुए शमीम ने अपने भाई के रूप में पहचान की थी, जिसके आधार पर शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया था। अब मामले की दोबारा जांच कर वास्तविक मृतक की पहचान की कोशिश की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *