ट्रंप टैरिफ़: चीन समेत कई देशों ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ़ एलान से भारत की व्यापारिक और आर्थिक चिंताएं बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत करीब 60 देशों पर 10 से 12.5 फीसदी तक का टैरिफ़ लगाने का एलान किया है। भारत पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया जाएगा। इसके साथ ही जेनेरिक दवाओं के आयात पर 2028 से 100 फीसदी और आगे चलकर 200 फीसदी तक शुल्क लगाने की मंशा भी जताई गई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ट्रंप टैरिफ़ भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन सकता है और इसका असर देश के निर्यात तथा फार्मा उद्योग पर कितना पड़ सकता है।
ट्रंप टैरिफ़ भारत के लिए क्यों बढ़ा सकता है मुश्किलें?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जिन देशों पर नया टैरिफ़ लगाया जा रहा है, वे अमेरिका को ऐसे सामानों का निर्यात कर रहे हैं, जिन्हें जबरन मजदूरी के जरिए बनाया गया है। अमेरिकी प्रशासन इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन से जोड़कर देख रहा है।
भारत को भी इस सूची में शामिल किया गया है और उसे 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ़ देना होगा। भारत की ओर से इस फैसले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह तर्क और फैसला सवालों के घेरे में है। भारत के थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने इस दावे पर सवाल उठाया है।
भारत ने जबरन मजदूरी के आरोप
अमेरिका ने अब तक ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि भारत से निर्यात होने वाले सामान जबरन मजदूरी कराकर बनाए जा रहे हैं। भारत में जबरन मजदूरी पर प्रतिबंध है।

इस दावे के बीच ट्रंप टैरिफ़ भारत को लेकर व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फैसले का असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है।
जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ़ की तैयारी
ट्रंप प्रशासन का एक और फैसला भारत के फार्मा उद्योग के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति ने जेनेरिक दवाओं के आयात पर 2028 से 100 फीसदी टैरिफ़ लगाने की मंशा जताई है। आगे चलकर यह शुल्क 200 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है।
भारत अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा सप्लायर है। ऐसे में अगर जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ़ लगाया जाता है, तो भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा, लागत और निर्यात से जुड़े दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा के बाद भारतीय फार्मा क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
1991 जैसे दौर से तुलना
अमेरिकी टैरिफ़ के एलान के बाद भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना 1991 के दौर से की गई है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत के सामने 1991 जैसा समय लौट आया है, लेकिन इस बार हालात और खराब हैं। 1991 से ठीक पहले भारत भारी भुगतान संतुलन की समस्या से जूझ रहा था। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए देश को कड़े आर्थिक सुधार लागू करने पड़े थे।

आपको बता दें कि1991 शीत युद्ध के अंत का दौर था। सोवियत संघ के पतन के साथ भारत के लिए चीन और अमेरिका के खिलाफ मौजूद सुरक्षा कवच भी समाप्त हो गया था। टैरिफ़ के दायरे में चीन, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, इसराइल, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर और हांग कांग और यूरोपीय संघ समेत कई अन्य देश शामिल हैं.
मौजूदा परिस्थितियों में भारत के सामने आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों का एक अलग दौर दिखाई दे रहा है।
चीन समेत कई देशों ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की
चीन ने भी अमेरिका के नए टैरिफ़ का विरोध किया है। चीन का कहना है कि उसके यहां जबरन मजदूरी जैसी कोई चीज नहीं है। चीन ने आरोप लगाया कि इस तरह का एकतरफा टैरिफ़ लगाकर राजनीतिक दुश्मनी निकाली जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और ब्राजील समेत कई देशों ने भी ट्रंप के नए टैरिफ़ की आलोचना की है।
इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी टैरिफ़ नीति का विरोध केवल भारत तक सीमित नहीं है। कई देश इस फैसले को लेकर अपनी आपत्ति जता चुके हैं।
भारत के सामने आगे क्या चुनौती?
ट्रंप टैरिफ़ भारत के लिए दो स्तरों पर चुनौती बन सकता है। एक ओर करीब 60 देशों पर लगाए गए नए टैरिफ़ के तहत भारत को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। दूसरी ओर, जेनेरिक दवाओं पर प्रस्तावित भारी टैरिफ़ से भारतीय फार्मा उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, भारत की ओर से इस फैसले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में आगे भारत सरकार की रणनीति और अमेरिकी फैसले पर उसकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन के नए फैसलों ने भारत के व्यापार और फार्मा क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टैरिफ़ नीति का वास्तविक असर आगे होने वाले फैसलों और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की दिशा पर निर्भर करेगा।
नई व्यापारिक चुनौती
ट्रंप टैरिफ़ भारत के लिए एक नई व्यापारिक चुनौती बनकर सामने आया है। भारत समेत करीब 60 देशों पर 10 से 12.5 फीसदी तक टैरिफ़ और जेनेरिक दवाओं पर 200 फीसदी तक शुल्क लगाने की संभावित योजना से भारतीय निर्यात और फार्मा उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फैसले पर गंभीर आर्थिक और रणनीतिक चर्चा जरूरी होगी। (Amar Bharti)
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