भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 की तस्वीर, जिसमें सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन सुधार और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

नई दिल्ली/अमर भारती। BRICS Summit 2026 शनिवार यानी 12 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू हो रहा है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच कई अहम समझौतों और साझा पहलों पर सहमति बनने की उम्मीद है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS के चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता—पर केंद्रित 50 से ज्यादा ठोस और व्यवहारिक नतीजे सामने आए हैं। इनमें कई फ्रेमवर्क, एक्शन प्लान और अन्य सहयोगात्मक पहल शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में पूरे साल BRICS के विभिन्न स्तरों पर बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सरकार के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संवाद बढ़ाना और अलग-अलग मुद्दों पर व्यापक सहमति तैयार करना रहा।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश
भारत के लिए BRICS Summit 2026 के प्रमुख संभावित नतीजों में आतंकवाद की कड़ी निंदा और उसके सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता अहम मानी जा रही है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख BRICS के एजेंडे में प्रमुखता से रहा है। इसके साथ ही वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के समर्थन को लेकर भी सहमति बनने की उम्मीद है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। ऐसे में BRICS मंच से इस मुद्दे को समर्थन मिलना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया के मुद्दे पर चुनौती
हालांकि BRICS Summit 2026 से पहले पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद एक चुनौती बने रहे। रिपोर्टों के मुताबिक, UAE और ईरान के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अलग-अलग रुख के कारण यह स्पष्ट नहीं था कि शिखर सम्मेलन का समापन किसी साझा घोषणापत्र के साथ होगा या नहीं। इससे पहले पश्चिम एशिया की स्थिति पर मतभेदों के चलते BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक भी किसी साझा बयान के बिना समाप्त हुई थी।
इसके बावजूद भारतीय सरकारी सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि भारत की अध्यक्षता को मिले व्यापक समर्थन के कारण शिखर सम्मेलन का परिणाम सकारात्मक रह सकता है। एक भारतीय अधिकारी के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए और पूरे साल करीब 400 बैठकें आयोजित करके भारत की अध्यक्षता ने सदस्य देशों को साथ लाने और आम सहमति बनाने की क्षमता दिखाई है।
‘ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बना भारत’
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ के मुद्दों को प्रमुखता देने पर भी जोर रहा। भारतीय पक्ष का मानना है कि उभरती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आकांक्षाओं और दृष्टिकोण को सामने रखने में BRICS ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शिखर सम्मेलन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित सत्र से होने की बात कही गई है। इस दौरान वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की भागीदारी और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। भारत का प्रयास रहा है कि BRICS को केवल राजनीतिक चर्चा का मंच न बनाकर व्यावहारिक सहयोग और ठोस परिणामों का मंच बनाया जाए।
30 से ज्यादा शहरों में हुए कार्यक्रम
सरकार के मुताबिक, भारत की BRICS अध्यक्षता को पूरे देश का सामूहिक प्रयास बनाया गया। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा विभिन्न संस्थानों, उद्योग जगत, शिक्षा क्षेत्र, युवाओं, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों की भागीदारी रही।
BRICS से जुड़े कार्यक्रम देश के 30 से ज्यादा शहरों में आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को BRICS की गतिविधियों से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दों को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, मंत्रियों और विभिन्न एजेंसियों के प्रमुखों की बैठकों से सामने आए आम सहमति वाले दस्तावेज भारत की अध्यक्षता के दौरान हुए काम का संकेत देते हैं।
साझा घोषणापत्र पर रहेगी नजर
अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit 2026 के अंत में सदस्य देश किस तरह का साझा संदेश जारी करते हैं। आतंकवाद, बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन में सुधार, ग्लोबल साउथ और पश्चिम एशिया जैसे मुद्दे शिखर सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकते हैं।
भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और BRICS के जरिए विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। 50 से ज्यादा संभावित परिणामों के साथ भारत की अध्यक्षता का फोकस अब इस बात पर है कि बैठकों और चर्चाओं को ठोस कार्रवाई और व्यावहारिक सहयोग में कैसे बदला जाए। (amar bharti)
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